Pushkar Singh Dhami Protest: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अल्मोड़ा दौरे के दौरान दन्या बाजार में उस समय माहौल अचानक गरमा गया, जब युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनके काफिले के सामने पहुंचकर काले झंडे दिखाए और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मुख्यमंत्री के वाहन के पहुंचते ही प्रदर्शनकारियों ने ‘गो बैक’ के नारे लगाए और विभिन्न मुद्दों को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया। इस घटनाक्रम के बाद कुछ देर के लिए इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बन गई। Pushkar Singh Dhami Protest को लेकर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है।
अचानक सड़क पर उतरे युवा कांग्रेस कार्यकर्ता
जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी योग दिवस के कार्यक्रमों में शामिल होने के बाद अल्मोड़ा जिले के दन्या क्षेत्र में आयोजित जनसभा और अन्य कार्यक्रमों में हिस्सा लेने पहुंचे थे। इसी दौरान जैसे ही उनका काफिला दन्या बाजार में पहुंचा, पहले से मौजूद युवा कांग्रेस कार्यकर्ता हाथों में काले झंडे लेकर सड़क पर उतर आए।
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कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के काफिले की ओर बढ़ते हुए सरकार विरोधी नारे लगाए। अचानक हुए इस विरोध प्रदर्शन से मौके पर मौजूद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां भी सक्रिय हो गईं। Pushkar Singh Dhami Protest के दौरान कुछ देर के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ और बाजार क्षेत्र में लोगों की भीड़ जमा हो गई।
पुलिस और भाजपा कार्यकर्ताओं ने संभाला मोर्चा
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया। हालांकि युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता लगातार नारेबाजी करते रहे और अपना विरोध दर्ज कराते रहे।
हालात बिगड़ते देख पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। बाद में उन्हें दन्या थाने ले जाया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए यह कार्रवाई की गई, ताकि मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों में किसी प्रकार की बाधा न आए।
विरोध के पीछे बताए गए कई मुद्दे
युवा कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उनका प्रदर्शन किसी व्यक्तिगत कारण से नहीं बल्कि प्रदेश से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर था। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
इसके अलावा युवाओं ने पेपर लीक मामलों, बढ़ती बेरोजगारी, महिला सुरक्षा और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को भी उठाया। उनका कहना है कि सरकार इन मामलों पर जवाब देने में विफल रही है। इसी वजह से मुख्यमंत्री के समक्ष काले झंडे दिखाकर विरोध दर्ज कराया गया। Pushkar Singh Dhami Protest के दौरान इन मुद्दों को लेकर सबसे ज्यादा नारेबाजी सुनाई दी।
खुफिया तंत्र पर भी उठे सवाल
मुख्यमंत्री के काफिले तक प्रदर्शनकारियों के पहुंचने के बाद पुलिस और खुफिया विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। बताया जा रहा है कि विरोध प्रदर्शन अचानक हुआ, जिससे सुरक्षा एजेंसियों को स्थिति संभालने में कुछ समय लगा।
हालांकि पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए माहौल को नियंत्रित कर लिया और मुख्यमंत्री का कार्यक्रम बिना किसी बाधा के संपन्न कराया गया। लेकिन इस घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
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योग दिवस के कार्यक्रम के बाद पहुंचे थे अल्मोड़ा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर चंपावत जिले के बनबसा में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। वहां उन्होंने हजारों लोगों के साथ योगाभ्यास किया और राज्य को योग एवं वेलनेस की वैश्विक राजधानी बनाने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
इसके बाद मुख्यमंत्री अल्मोड़ा पहुंचे, जहां उन्होंने दन्या क्षेत्र में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों और जनसभाओं में भाग लिया। इसी दौरान Pushkar Singh Dhami Protest का मामला सामने आया।
प्रदेश की राजनीति में तेज हुई बयानबाजी
अल्मोड़ा की इस घटना के बाद राजनीतिक हलकों में बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार को जनता के सवालों का जवाब देना चाहिए, जबकि भाजपा नेताओं ने विरोध प्रदर्शन को राजनीतिक स्टंट करार दिया है।
भाजपा का कहना है कि प्रदेश सरकार लगातार विकास कार्यों में जुटी हुई है और विपक्ष मुद्दों के अभाव में इस तरह के प्रदर्शन कर रहा है। वहीं कांग्रेस का दावा है कि जनता से जुड़े कई सवालों पर सरकार जवाब देने से बच रही है।
कुछ देर बाद सामान्य हुआ माहौल
दन्या बाजार में विरोध प्रदर्शन के कारण कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति जरूर बनी, लेकिन पुलिस की तत्परता के चलते हालात जल्द ही सामान्य हो गए। मुख्यमंत्री का काफिला निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ गया और सभी कार्यक्रम शांतिपूर्वक संपन्न हुए।
हालांकि Pushkar Singh Dhami Protest की यह घटना अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
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