Ankita Bhandari Case: उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में एक ऐसा अप्रत्याशित और चौंकाने वाला मोड़ आया है, जिसने देहरादून से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। पौड़ी गढ़वाल की 19 वर्षीय रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी (Ankita Bhandari Case) की हत्या के मामले में अदालत द्वारा साल 2025 में मुख्य आरोपी पुलकित आर्य सहित तीनों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद माना जा रहा था कि यह केस बंद हो चुका है। लेकिन, इस हत्याकांड के केंद्र में रहे सबसे बड़े रहस्य यानी उस तथाकथित ‘VIP’ के नाम को लेकर साल 2026 में एक बार फिर भारी बवाल खड़ा हो गया है। इसी सिलसिले में देहरादून (Ankita Bhandari Case) की डालनवाला पुलिस ने एक बेहद गोपनीय और त्वरित कार्रवाई करते हुए हरिद्वार की ज्वालापुर सीट से भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस की यह ताबड़तोड़ कार्रवाई कोई सामान्य आपराधिक मामला नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत गौतम की शिकायत पर की गई है। आरोप है कि अंकिता भंडारी मर्डर केस की आड़ में एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश (Ankita Bhandari Case) के तहत कुछ फर्जी और आपत्तिजनक ऑडियो-वीडियो क्लिप्स सोशल मीडिया पर वायरल किए गए थे। इन क्लिप्स के जरिए बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव का नाम उस रहस्यमयी ‘VIP’ से जोड़ने का प्रयास किया गया, जिसने अंकिता पर ‘स्पेशल सर्विस’ देने का दबाव बनाया था। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद उत्तराखंड की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है और विपक्ष ने एक बार फिर इस पूरे मामले की नए सिरे से सीबीआई (CBI) जांच कराने की मांग तेज कर दी है।
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डालनवाला पुलिस का सीक्रेट ऑपरेशन
देहरादून की डालनवाला पुलिस ने पुख्ता सबूतों और तकनीकी जांच के आधार पर पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर को हरिद्वार के बुग्गावाला इलाके से हिरासत में लिया और पूछताछ के बाद सलाखों के पीछे भेज दिया। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई पूरी तरह से कानून सम्मत और साक्ष्यों के आधार पर की गई है। इस मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट (Ankita Bhandari Case) की कई गंभीर व गैर-जमानती धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि इन कथित फेक ऑडियो-वीडियो क्लिप्स को बनाने और उन्हें सर्कुलेट करने में सुरेश राठौर के साथ और कौन-कौन से चेहरे शामिल थे।
राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत गौतम ने दर्ज कराई FIR
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब खुद भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत गौतम ने देहरादून के डालनवाला थाने में इस गंभीर साजिश के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। दुष्यंत गौतम का सीधा आरोप था कि सुरेश राठौर और उनके कुछ राजनीतिक सहयोगियों ने जानबूझकर उनके खिलाफ यह भ्रामक अभियान चलाया। शिकायत में स्पष्ट किया गया है, ‘सुरेश राठौर और उनके सहयोगियों ने जानबूझकर (Ankita Bhandari Case) सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे झूठे, मनगढ़ंत और आपत्तिजनक ऑडियो-वीडियो क्लिप्स वायरल किए, जिससे उनका नाम अंकिता भंडारी हत्याकांड के उस तथाकथित ‘VIP’ से जोड़ा जा सके।’
उर्मिला सनावर के वीडियो और ‘VIP’ एंगल का पूरा सच
अंकिता भंडारी केस (Ankita Bhandari Case) की शुरुआत यानी सितंबर 2022 से ही इस बात पर लगातार सस्पेंस बना रहा कि वनंत्रा रिजॉर्ट में किस वीआईपी मेहमान के आने की बात हो रही थी। साल 2025 के अंत और 2026 की शुरुआत में अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो और ऑडियो क्लिप जारी कर इस “VIP एंगल” को लेकर कई सनसनीखेज दावे किए थे। इन दावों के बाद एसआईटी (SIT) ने पूर्व विधायक सुरेश राठौर से कई घंटों तक लंबी पूछताछ भी की थी। हालांकि, उस समय राठौर ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा था कि उन्होंने जांच में पूरा सहयोग दिया है और उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह निराधार हैं।
इंसाफ की लड़ाई और न्याय व्यवस्था पर जनता के सवाल
अंकिता भंडारी का मामला सिर्फ एक रिसेप्शनिस्ट की हत्या तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह उत्तराखंड (Ankita Bhandari Case) में महिलाओं की सुरक्षा, राजनीतिक शुचिता और जांच एजेंसियों की विश्वसनीयता का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुका है। हालांकि वनंत्रा रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और उसके दो साथी जेल में उम्रकैद काट रहे हैं, लेकिन अंकिता के परिवार और जनता का एक वर्ग आज भी इस बात पर अड़ा है कि जब तक उस कथित ‘VIP’ का चेहरा पूरी तरह बेनकाब नहीं हो जाता, तब तक अंकिता को पूर्ण न्याय नहीं मिलेगा। पूर्व विधायक की इस ताजा गिरफ्तारी ने अंकिता केस की बंद हो चुकी परतों को दोबारा खोल दिया है।
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