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Lokhitkranti > मध्य प्रदेश > Police Mental Stress: 12 दिन में 5 पुलिसकर्मियों की आत्महत्या से मचा हड़कंप, बढ़ते दबाव पर उठे गंभीर सवाल
मध्य प्रदेश

Police Mental Stress: 12 दिन में 5 पुलिसकर्मियों की आत्महत्या से मचा हड़कंप, बढ़ते दबाव पर उठे गंभीर सवाल

Lokhit Kranti
Last updated: 2026-06-14 1:59 pm
Lokhit Kranti Published 2026-06-14
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Police Mental Stress: MP police personnel standing in formation as concerns over police mental stress and suicides spark debate on mental health and work pressure
Police Mental Stress: MP police personnel standing in formation as concerns over police mental stress and suicides spark debate on mental health and work pressure
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Police Mental Stress को लेकर मध्य प्रदेश में एक बार फिर गंभीर बहस छिड़ गई है। पिछले 12 दिनों के भीतर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में पांच पुलिसकर्मियों द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटनाओं ने न केवल पुलिस विभाग बल्कि सरकार और समाज को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। लगातार सामने आ रहे मामलों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पुलिसकर्मी बढ़ते कार्यभार, मानसिक दबाव और निजी परेशानियों के बीच खुद को अकेला महसूस कर रहे हैं?

Contents
डबरा में आरक्षक राघवेंद्र तोमर ने उठाया आत्मघाती कदमक्या बढ़ता कार्यभार बन रहा है बड़ी वजह?मानसिक स्वास्थ्य पर बढ़ी चर्चाविभागीय स्तर पर सुधार की जरूरत

ताजा मामला ग्वालियर जिले के डबरा क्षेत्र से सामने आया है, जहां एक आरक्षक ने अपने सरकारी आवास में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद पुलिस विभाग में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि Police Mental Stress अब केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं बल्कि एक संस्थागत चुनौती बन चुका है, जिस पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है।

डबरा में आरक्षक राघवेंद्र तोमर ने उठाया आत्मघाती कदम

ग्वालियर जिले के डबरा सिटी थाना क्षेत्र में पदस्थ आरक्षक राघवेंद्र तोमर ने शुक्रवार रात अपने सरकारी आवास में फांसी लगाकर जान दे दी। जानकारी के अनुसार आत्महत्या से कुछ समय पहले उन्होंने अपनी पत्नी को वीडियो कॉल किया था। परिजनों के मुताबिक बातचीत के दौरान उन्होंने पत्नी को अंतिम बार “बाय-बाय” कहा और फिर कॉल समाप्त कर दी।

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जब काफी देर तक उनका फोन रिसीव नहीं हुआ तो परिजनों को चिंता हुई। इसके बाद सहकर्मियों को सूचना दी गई। जब पुलिसकर्मी सरकारी आवास पहुंचे तो राघवेंद्र फंदे पर लटके मिले। मौके पर पहुंची पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने जांच शुरू कर दी है।

राघवेंद्र तोमर मूल रूप से मुरैना जिले के पोरसा क्षेत्र के रहने वाले थे और करीब एक साल से डबरा में तैनात थे। उन्हें अनुकंपा नियुक्ति मिली थी और उनके परिवार में पत्नी सहित दो छोटे बच्चे हैं। इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है।

12 दिनों में पांच पुलिसकर्मियों की मौत ने बढ़ाई चिंता

मध्य प्रदेश में हाल के दिनों में सामने आए आत्महत्या के मामलों ने Police Mental Stress को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। डबरा की घटना से पहले भी चार पुलिसकर्मी आत्मघाती कदम उठा चुके हैं।

मंडला में ब्लैकमेलिंग से परेशान आरक्षक ने दी जान

8 जून को मंडला जिले के बम्हनी बंजर थाना परिसर स्थित सरकारी क्वार्टर में आरक्षक सुनील सरयाम ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। जांच में सामने आया कि वह कथित रूप से आपत्तिजनक वीडियो के आधार पर ब्लैकमेलिंग का शिकार हो रहे थे। इस मामले में पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार भी किया है।

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गुना में महिला आरक्षक की आत्महत्या

9 जून को गुना जिले में तैनात 25 वर्षीय महिला आरक्षक निशा शर्मा ने अपने पुलिस क्वार्टर में आत्महत्या कर ली थी। घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला, जिसके चलते पुलिस विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है।

छिंदवाड़ा में महिला प्रधान आरक्षक की संदिग्ध मौत

3 जून को छिंदवाड़ा पुलिस लाइन में पदस्थ महिला प्रधान आरक्षक दीपा नेगी का शव उनके घर में जली हुई अवस्था में मिला था। बताया गया कि वह लंबे समय से अवसाद और मानसिक तनाव का इलाज करा रही थीं।

उमरिया में सब-इंस्पेक्टर ने खुद को मारी गोली

31 मई को उमरिया पुलिस लाइन में पदस्थ सब-इंसेक्टर विजय सिंह कोल ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर से खुद को गोली मार ली थी। जानकारी के अनुसार हाल ही में उनका प्रमोशन हुआ था, लेकिन उन्होंने पदोन्नति लेने से इनकार कर दिया था।

क्या बढ़ता कार्यभार बन रहा है बड़ी वजह?

पुलिस विभाग में काम करने वाले कर्मचारियों को अक्सर लंबे समय तक ड्यूटी करनी पड़ती है। त्योहार, चुनाव, वीआईपी सुरक्षा, कानून व्यवस्था और आपातकालीन परिस्थितियों में लगातार काम करने के कारण उन्हें पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता।

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विशेषज्ञों का मानना है कि Police Mental Stress का सबसे बड़ा कारण अनियमित कार्य समय, पारिवारिक जीवन के लिए समय की कमी और लगातार दबाव में काम करना है। कई बार पुलिसकर्मी अपनी मानसिक समस्याओं को साझा भी नहीं कर पाते, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।

मानसिक स्वास्थ्य पर बढ़ी चर्चा

लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद पुलिस विभाग के भीतर मानसिक स्वास्थ्य को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याएं अब पुलिस बल में तेजी से बढ़ रही हैं। यदि समय रहते इनकी पहचान और उपचार न किया जाए तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि प्रत्येक जिले में नियमित काउंसलिंग सत्र, मनोवैज्ञानिक सहायता केंद्र और हेल्पलाइन सेवाएं शुरू की जानी चाहिए। इससे पुलिसकर्मियों को अपनी समस्याएं साझा करने और समाधान पाने में मदद मिल सकती है।

विभागीय स्तर पर सुधार की जरूरत

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि केवल अनुशासन और कार्यक्षमता पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। कर्मचारियों के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य की निगरानी भी उतनी ही जरूरी है। इसके लिए तनाव प्रबंधन कार्यक्रम, योग, मेडिटेशन और नियमित स्वास्थ्य जांच जैसी पहलें प्रभावी साबित हो सकती हैं।

मध्य प्रदेश में 12 दिनों के भीतर पांच पुलिसकर्मियों द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं। ये मामले केवल व्यक्तिगत त्रासदी नहीं बल्कि पूरे सिस्टम के सामने खड़े एक बड़े प्रश्न हैं। Police Mental Stress को गंभीरता से समझना और समय रहते प्रभावी कदम उठाना आवश्यक है। यदि पुलिसकर्मियों को मानसिक रूप से मजबूत और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाता है, तो न केवल उनकी कार्यक्षमता बढ़ेगी बल्कि ऐसी दुखद घटनाओं को भी काफी हद तक रोका जा सकेगा।

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