BPSC Paper Leak: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की दो महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक मामले ने नया और चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की जांच में ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक इस घोटाले में शामिल कई बायोमेट्रिक ऑपरेटर और कोऑर्डिनेटर खुद उसी परीक्षा के अभ्यर्थी थे, जिसकी निगरानी की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई थी। (BPSC Paper Leak)
20 अप्रैल 2026 को आयोजित सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) परीक्षा और 23 अप्रैल 2026 को हुई सहायक लोक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी परीक्षा में पेपर लीक की शिकायतें सामने आई थीं। मामले की जांच कर रही EOU ने अब तक 35 लोगों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। जांच में सामने आए खुलासों ने पूरे भर्ती तंत्र को हिला कर रख दिया है। (BPSC Paper Leak)
EOU ने किया चौंकाने वाला खुलासा
आर्थिक अपराध इकाई के डीआईजी मानवजीत सिंह ढिल्लों ने शुक्रवार को प्रेस ब्रीफिंग के दौरान बताया कि इस बार पेपर लीक का तरीका पहले के मामलों से बिल्कुल अलग था। आमतौर पर ऐसे मामलों में प्रिंटिंग प्रेस, परिवहन व्यवस्था या लॉजिस्टिक चेन से जुड़े लोग शामिल पाए जाते थे, लेकिन इस बार परीक्षा प्रक्रिया के अंदर मौजूद बायोमेट्रिक सिस्टम का कथित दुरुपयोग किया गया। डीआईजी के अनुसार, जांच में ऐसे कई सबूत मिले हैं जो यह संकेत देते हैं कि परीक्षा संचालन से जुड़े कुछ कर्मियों ने अपनी जिम्मेदारी का गलत फायदा उठाया। (BPSC Paper Leak)
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बायोमेट्रिक कंपनी की भूमिका पर उठे सवाल
BPSC ने परीक्षाओं में बायोमेट्रिक सत्यापन की जिम्मेदारी जयपुर स्थित मेसर्स साई एजुकेट प्राइवेट लिमिटेड को सौंपी थी। जांच के दौरान कंपनी के कुछ जिला समन्वयकों और सुपरवाइजर्स की कथित संलिप्तता सामने आई है। EOU के मुताबिक दोनों परीक्षाओं में यही कंपनी बायोमेट्रिक सत्यापन का कार्य कर रही थी। जांच में यह भी सामने आया कि अनुबंध की कई महत्वपूर्ण शर्तों का पालन नहीं किया गया। सबसे गंभीर बात यह रही कि जिन कर्मचारियों को परीक्षा की निगरानी और बायोमेट्रिक सत्यापन की जिम्मेदारी दी गई थी, उनमें से कई स्वयं उसी परीक्षा के उम्मीदवार थे। (BPSC Paper Leak)
आठ केस दर्ज, पांच की जांच EOU के पास
पेपर लीक मामले को लेकर अब तक कुल आठ प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं। पहला मामला मुंगेर जिले में दर्ज हुआ था। इसके बाद बेगूसराय, नालंदा, नवादा और पटना के श्रीकृष्णपुरी थाना क्षेत्र में भी मामले सामने आए। इनमें से पांच मामलों की जांच आर्थिक अपराध इकाई कर रही है। जांच एजेंसी विभिन्न जिलों में दर्ज मामलों को आपस में जोड़कर पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हुई है। (BPSC Paper Leak)
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35 आरोपी गिरफ्तार, कई और रडार पर
EOU ने अब तक 35 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। एजेंसी का दावा है कि यह सिर्फ शुरुआती कार्रवाई है और जांच आगे बढ़ने पर कई और लोगों की भूमिका सामने आ सकती है। जांचकर्ता यह भी पता लगा रहे हैं कि प्रश्नपत्र लीक होने से पहले और बाद में किन-किन लोगों के बीच संपर्क हुआ था और परीक्षा से जुड़े संवेदनशील डेटा तक किसे पहुंच मिली थी। (BPSC Paper Leak)
भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल
इस खुलासे के बाद बिहार की प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था और पारदर्शिता पर गंभीर बहस शुरू हो गई है। अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि परीक्षा संचालन में शामिल लोग ही उम्मीदवार बन जाएं, तो निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए परीक्षा एजेंसियों को तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर कड़े कदम उठाने होंगे। साथ ही निजी कंपनियों के चयन और निगरानी की प्रक्रिया को भी अधिक सख्त बनाने की जरूरत है। (BPSC Paper Leak)
जांच जारी, और खुलासों की संभावना
EOU की जांच अभी जारी है और एजेंसी को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े और बड़े नाम सामने आ सकते हैं। फिलहाल 35 गिरफ्तारियां इस बात का संकेत हैं कि मामला सिर्फ पेपर लीक तक सीमित नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में सुनियोजित सेंधमारी का हो सकता है। (BPSC Paper Leak)
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