हरियाणा के रेवाड़ी में पिछले 10 दिनों से जारी वकीलों की हड़ताल के बीच आखिरकार Rewari SDM Transfer का आदेश जारी कर दिया गया। बुधवार शाम सरकार द्वारा जारी तबादला सूची में एसडीएम सुरेश कुमार को हटाकर दलबीर सिंह को नया रेवाड़ी एसडीएम नियुक्त किया गया। इस फैसले के बाद जिले में चल रहे विवाद और आंदोलन को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।
काफी समय से वकील Rewari SDM Transfer की मांग कर रहे थे। उनका आरोप था कि एसडीएम द्वारा कई मामलों में पक्षपातपूर्ण निर्णय लिए गए और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित किया गया। इसी मुद्दे को लेकर जिला बार एसोसिएशन लगातार विरोध प्रदर्शन कर रही थी।
Rewari SDM Transfer के पीछे क्या रहा विवाद?
रेवाड़ी बार एसोसिएशन का आरोप है कि एसडीएम सुरेश कुमार ने कई मामलों में गलत निर्णय दिए, जिससे आम लोगों और सरकार दोनों को नुकसान हुआ। बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि लगभग 48 मामलों में प्रभावशाली लोगों के पक्ष में फैसले सुनाए गए।
इन्हीं आरोपों के चलते वकीलों ने पहले प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और बाद में आंदोलन का रास्ता अपनाया। जब उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो Rewari SDM Transfer को लेकर 20 जुलाई से हड़ताल शुरू कर दी गई। इस दौरान जिला न्यायालय के साथ-साथ कई तहसीलों में भी कामकाज प्रभावित रहा।
Rewari SDM Transfer के बाद वकीलों की प्रतिक्रिया
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विश्वामित्र ने कहा कि उनका आंदोलन केवल तबादले तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि जिन मामलों में कथित अनियमितताएं हुई हैं, उनकी स्वतंत्र जांच भी कराई जानी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार वकीलों के साथ दुर्व्यवहार किया गया और उनकी आपत्तियों को गंभीरता से नहीं लिया गया। बार एसोसिएशन का कहना है कि Rewari SDM Transfer उनकी मांगों की पहली सफलता है, लेकिन वे फैसलों की समीक्षा और जांच की मांग भी आगे उठाएंगे।
Rewari SDM Transfer पर एसडीएम सुरेश कुमार का पक्ष
विवाद के बीच एसडीएम सुरेश कुमार ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि उनका किसी वकील से व्यक्तिगत विवाद नहीं है और उन्हें बेवजह बदनाम किया जा रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि Rewari SDM Transfer को किसी विवाद से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए क्योंकि सरकारी सेवा में तबादला एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है। उनके अनुसार यदि किसी को उनके निर्णयों से आपत्ति थी तो उसके लिए उच्च अधिकारियों और न्यायालय का रास्ता खुला हुआ था।
सुरेश कुमार ने यह भी दावा किया कि उन्होंने वकीलों से कई बार बातचीत की कोशिश की, लेकिन बातचीत के प्रयास सफल नहीं हो सके।
Rewari SDM Transfer के दौरान तहसीलों में भी ठप रहा काम
हड़ताल का असर केवल जिला अदालत तक सीमित नहीं रहा। डहीना, मनेठी और पाल्हावास सहित कई तहसीलों में वकीलों, स्टांप वेंडरों, डीड राइटरों और टाइपिस्टों ने भी काम बंद रखा।
इसके कारण रजिस्ट्री, दस्तावेज सत्यापन और अन्य प्रशासनिक कार्य प्रभावित हुए। आम नागरिकों को अपने जरूरी कार्यों के लिए इंतजार करना पड़ा। कई लोगों ने बताया कि उनके मामले लंबित रह गए और सुनवाई नहीं हो सकी।
Rewari SDM Transfer के बाद आगे क्या?
प्रशासन को उम्मीद है कि Rewari SDM Transfer के बाद हालात सामान्य होंगे और न्यायालयों व तहसीलों में कामकाज फिर से शुरू हो जाएगा। हालांकि बार एसोसिएशन ने संकेत दिए हैं कि यदि भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच नहीं हुई तो वे आगे भी अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
फिलहाल सरकार के इस फैसले ने जिले की राजनीति, प्रशासन और कानूनी जगत में नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि Rewari SDM Transfer के बाद विवाद पूरी तरह समाप्त होता है या जांच की मांग को लेकर नया अध्याय शुरू होता है।
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