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Lokhitkranti > उत्तराखंड > Haridwar Ash Immersion Controversy: हर की पैड़ी पर अस्थि विसर्जन को लेकर कथावाचक के बयान पर बवाल, ई-एफआईआर दर्ज करने की मांग
उत्तराखंड

Haridwar Ash Immersion Controversy: हर की पैड़ी पर अस्थि विसर्जन को लेकर कथावाचक के बयान पर बवाल, ई-एफआईआर दर्ज करने की मांग

Manisha
Last updated: 2026-06-08 5:06 अपराह्न
Manisha Published 2026-06-08
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Haridwar Ash Immersion Controversy over alleged remarks on Asthi Visarjan at Har Ki Pauri as Ganga Sabha files complaint
Haridwar Ash Immersion Controversy over alleged remarks on Asthi Visarjan at Har Ki Pauri as Ganga Sabha files complaint
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Haridwar Ash Immersion Controversy: विश्व प्रसिद्ध तीर्थनगरी हरिद्वार एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। इस बार मामला धार्मिक आस्था और सनातन परंपराओं से जुड़ा है। Haridwar Ash Immersion Controversy उस समय शुरू हुई जब कथावाचक संजय कृष्ण भैया का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने हरिद्वार में होने वाले अस्थि विसर्जन संस्कार को लेकर कथित रूप से विवादित टिप्पणी की। वीडियो सामने आने के बाद तीर्थ पुरोहितों, धार्मिक संगठनों और श्रद्धालुओं के बीच नाराजगी देखने को मिल रही है।

Contents
क्या है पूरा मामला?धार्मिक संगठनों में नाराजगीई-एफआईआर दर्ज, जांच की मांग तेजपुलिस ने क्या कहा?आस्था और जिम्मेदारी का सवाल

मामले को गंभीर मानते हुए हरिद्वार के तीर्थ पुरोहित डॉ. भव्य नारायण ने कथावाचक के खिलाफ ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई है। वहीं श्री गंगा सभा ने भी बयान की कड़ी निंदा करते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की है। इस पूरे प्रकरण ने Haridwar Ash Immersion Controversy को प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना दिया है।

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क्या है पूरा मामला?

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कथित तौर पर कहा गया कि हरिद्वार में केवल एक विशेष घाट पर अस्थि विसर्जन कराया जाता है और वहां लगाए गए जाल के माध्यम से अस्थियों को बाद में बाहर निकालकर किसी फैक्ट्री में भेज दिया जाता है। इस बयान को लेकर तीर्थ पुरोहित समाज ने कड़ी आपत्ति जताई है।

डॉ. भव्य नारायण का कहना है कि यह दावा पूरी तरह निराधार, भ्रामक और असत्य है। उनके अनुसार बिना किसी प्रमाण के इस प्रकार का बयान देना न केवल हरिद्वार की धार्मिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था को भी ठेस पहुंचाता है।

उन्होंने कहा कि हरिद्वार सदियों से हिंदू धर्म के प्रमुख तीर्थ स्थलों में शामिल रहा है, जहां श्रद्धालु अपने पूर्वजों की अस्थियों का वैदिक परंपराओं के अनुसार विसर्जन करते हैं। ऐसे में इस पवित्र धार्मिक संस्कार के बारे में गलत जानकारी फैलाना समाज में भ्रम पैदा कर सकता है।

धार्मिक संगठनों में नाराजगी

Haridwar Ash Immersion Controversy के सामने आने के बाद श्री गंगा सभा ने भी कड़ा रुख अपनाया है। संस्था के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने कहा कि इस तरह के बयान हरिद्वार की छवि और सनातन परंपराओं को नुकसान पहुंचाने वाले हैं।

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उन्होंने कहा कि अस्थि विसर्जन केवल एक धार्मिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की भावनाओं और विश्वास से जुड़ा विषय है। यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक मंच से इस तरह के आरोप लगाता है तो उससे श्रद्धालुओं के मन में अनावश्यक संदेह उत्पन्न हो सकता है।

श्री गंगा सभा ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि बयान तथ्यहीन पाया जाता है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

ई-एफआईआर दर्ज, जांच की मांग तेज

डॉ. भव्य नारायण ने मामले को लेकर ई-एफआईआर दर्ज कराई है। शिकायत में कहा गया है कि वायरल वीडियो की डिजिटल जांच की जाए और उसके स्रोत तथा प्रसार की भी पड़ताल हो। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि वीडियो के व्यापक प्रसार से समाज में भ्रम और आक्रोश की स्थिति बनी है।

उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि संबंधित सामग्री को सुरक्षित रखते हुए उसकी फोरेंसिक जांच कराई जाए। साथ ही जांच पूरी होने तक कथावाचक के सार्वजनिक कार्यक्रमों और कथाओं पर रोक लगाने की भी मांग उठाई गई है।

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पुलिस ने क्या कहा?

हरिद नगर कोतवाली के प्रभारी कुंदन सिंह राणा ने बताया कि शिकायत प्राप्त हुई है और मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि ई-एफआईआर के आधार पर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री की सत्यता की जांच की जाएगी। यदि किसी प्रकार की भ्रामक या आपत्तिजनक जानकारी फैलाने की पुष्टि होती है तो कानून के अनुसार उचित कदम उठाए जाएंगे।

आस्था और जिम्मेदारी का सवाल

विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक विषयों पर सार्वजनिक बयान देते समय तथ्यों और संवेदनशीलता का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। हरिद्वार जैसे पवित्र तीर्थ से जुड़ी परंपराएं करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की टिप्पणी समाज में व्यापक प्रतिक्रिया पैदा कर सकती है।

फिलहाल Haridwar Ash Immersion Controversy को लेकर धार्मिक संगठनों, प्रशासन और श्रद्धालुओं की नजर जांच प्रक्रिया पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष इस मामले की दिशा तय करेंगे, लेकिन फिलहाल यह विवाद हरिद्वार और धार्मिक जगत में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।

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