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Lokhitkranti > पश्चिम बंगाल > Bengal Political News: टीएमसी में सबसे बड़ी बगावत, स्पीकर ने 58 विधायकों के गुट को दी मंजूरी
पश्चिम बंगाल

Bengal Political News: टीएमसी में सबसे बड़ी बगावत, स्पीकर ने 58 विधायकों के गुट को दी मंजूरी

Lokhit Kranti
Last updated: 2026-06-04 8:31 pm
Lokhit Kranti Published 2026-06-04
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TMC Rebel MLAs: Ritabrata Banerjee with rebel TMC MLAs after receiving recognition from West Bengal Assembly Speaker
TMC Rebel MLAs: Ritabrata Banerjee with rebel TMC MLAs after receiving recognition from West Bengal Assembly Speaker
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TMC Rebel MLAs: पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय बड़ा राजनीतिक विस्फोट देखने को मिला जब TMC Rebel MLAs के एक बड़े गुट को विधानसभा स्पीकर की मंजूरी मिल गई। इस घटनाक्रम ने राज्य की सियासत को पूरी तरह बदलकर रख दिया है। ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान अब खुली बगावत में बदल चुकी है।

Contents
ऋतब्रत बनर्जी के साथ 58 विधायकों का दावाकौन बने नेता और किसे मिली बड़ी जिम्मेदारी?ममता बनर्जी के धरने से क्यों रहे दूर विधायक?दलबदल कानून में कैसे मिला फायदा?निलंबन से शुरू हुई थी बगावतबंगाल की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर?

विधानसभा अध्यक्ष रवीन्द्र नाथ बोस ने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को मान्यता देते हुए उन्हें नेता प्रतिपक्ष का दर्जा प्रदान कर दिया। इस फैसले के बाद बंगाल की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है कि आखिर असली टीएमसी कौन है।

ऋतब्रत बनर्जी के साथ 58 विधायकों का दावा

बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया है कि उनके साथ कुल 60 विधायक हैं। विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे गए समर्थन पत्र में 58 विधायकों के हस्ताक्षर शामिल थे। इसी आधार पर स्पीकर ने उनके गुट को मान्यता प्रदान की।

TMC Rebel MLAs का कहना है कि वे ही पार्टी के मूल सिद्धांतों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और जनता के हितों के लिए काम करना चाहते हैं। इस गुट ने नई नेतृत्व टीम का भी प्रस्ताव रखा, जिसमें कई वरिष्ठ नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

Read : बंगाल में एक के बाद एक विवाद, सुरेंद्रनाथ कॉलेज से नकदी मिलने पर मचा बवाल

कौन बने नेता और किसे मिली बड़ी जिम्मेदारी?

स्पीकर को सौंपे गए प्रस्ताव के अनुसार ऋतब्रत बनर्जी को विधायक दल का नेता बनाया गया है। वहीं जावेद खान, संदीपन साहा और शिउली साहा को उपनेता की जिम्मेदारी दी गई है। रघुनाथगंज के विधायक अखरुज्जमान को मुख्य सचेतक यानी चीफ व्हिप नियुक्त किया गया है।

इस नए शक्ति प्रदर्शन ने यह संकेत दिया है कि TMC Rebel MLAs केवल विरोध जताने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे एक संगठित राजनीतिक इकाई के रूप में खुद को स्थापित करना चाहते हैं।

ममता बनर्जी के धरने से क्यों रहे दूर विधायक?

राजनीतिक हलकों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि बागी गुट के विधायक ममता बनर्जी के हालिया धरने से पूरी तरह दूर रहे। जब पार्टी नेतृत्व अपने समर्थकों को एकजुट करने में जुटा था, तब कई विधायक अलग रणनीति पर काम कर रहे थे।

दिलचस्प बात यह भी रही कि तृणमूल नेतृत्व के करीबी माने जाने वाले कई बड़े नेता भी विधानसभा में हुई बागी बैठक से दूर दिखाई दिए। इससे पार्टी के भीतर बढ़ती दूरी और असंतोष की अटकलों को और बल मिला।

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दलबदल कानून में कैसे मिला फायदा?

भारतीय दलबदल विरोधी कानून के अनुसार किसी भी अलग गुट को अयोग्यता से बचने के लिए कम से कम दो-तिहाई विधायकों का समर्थन चाहिए होता है। तृणमूल कांग्रेस के कुल 80 विधायकों को देखते हुए यह संख्या 54 बनती है।

चूंकि TMC Rebel MLAs ने 58 विधायकों का समर्थन दिखाया, इसलिए उनके दावे को कानूनी मजबूती मिली। यही वजह रही कि विधानसभा अध्यक्ष ने उनके अनुरोध को स्वीकार कर लिया।

निलंबन से शुरू हुई थी बगावत

चुनाव परिणाम आने के बाद ममता बनर्जी ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को निलंबित कर दिया था। इसके बाद से पार्टी में असंतोष की खबरें लगातार सामने आने लगीं।

हालांकि ऋतब्रत बनर्जी ने ममता बनर्जी के खिलाफ सीधा मोर्चा खोलने से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी अभी भी उनकी नेता हैं और वे उनसे मार्गदर्शन की उम्मीद रखते हैं।

बंगाल की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि TMC Rebel MLAs का यह कदम पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय तक असर डाल सकता है। इससे न केवल तृणमूल कांग्रेस की आंतरिक एकजुटता पर सवाल खड़े हुए हैं, बल्कि आगामी राजनीतिक समीकरण भी बदल सकते हैं।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि ममता बनर्जी और पार्टी नेतृत्व इस चुनौती का जवाब किस तरह देते हैं। आने वाले दिनों में यह बगावत बंगाल की राजनीति की दिशा और दशा दोनों तय कर सकती है।

कुल मिलाकर, TMC Rebel MLAs का उभार पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक माना जा रहा है। यदि यह गुट अपनी एकजुटता बनाए रखता है, तो राज्य की राजनीति में बड़ा सत्ता संतुलन परिवर्तन देखने को मिल सकता है।

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