Jadung Village Revival: भारत-चीन सीमा से सटे उत्तराखंड के ऐतिहासिक जादुंग और नेलांग गांव एक बार फिर सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों के केंद्र बन गए। जाड़ समुदाय के आराध्य लाल देवता की वार्षिक पूजा और पारंपरिक पांडव नृत्य के आयोजन ने पूरे क्षेत्र को आस्था और संस्कृति के रंग में रंग दिया। वर्षों बाद अपने पैतृक गांव जादुंग पहुंचने पर बगोरी गांव के लोग भावुक हो उठे। इस अवसर पर ग्रामीणों ने सरकार से नेलांग गांव को भी दोबारा बसाने और सीमा क्षेत्र में लागू इनर लाइन परमिट की बाध्यता में राहत देने की मांग की।
Jadung Village Revival के बीच सांस्कृतिक विरासत का भव्य प्रदर्शन
भारत-चीन सीमा के निकट स्थित जादुंग और नेलांग गांव कभी जाड़ भोटिया समुदाय की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान का केंद्र हुआ करते थे। समय के साथ परिस्थितियां बदलीं और अधिकांश परिवारों को इन गांवों से विस्थापित होना पड़ा। हालांकि अब सरकार द्वारा जादुंग गांव के पुनर्विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के बीच Jadung Village Revival की चर्चा फिर से तेज हो गई है।
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वार्षिक धार्मिक आयोजन के दौरान रिंगाली देवी की देवडोली के साथ जाड़ समुदाय के लोग एक दिवसीय प्रवास पर जादुंग और नेलांग पहुंचे। इस दौरान ग्रामीणों ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा में सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और अपनी विरासत को जीवंत किया।
लाल देवता की वार्षिक पूजा में उमड़ी आस्था
नेलांग में स्थित लाल देवता मंदिर और देवथात में विशेष पूजा-अर्चना की गई। जाड़ समुदाय के लोगों ने अपने आराध्य देवता का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन किया। पूजा के दौरान पांडवों से जुड़े अस्त्र-शस्त्रों का भी विधिवत पूजन किया गया।
इसके बाद आयोजित पारंपरिक पांडव नृत्य ने पूरे माहौल को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक ऊर्जा से भर दिया। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह नृत्य केवल एक सांस्कृतिक परंपरा नहीं बल्कि उनकी पहचान और इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। Jadung Village Revival के प्रयासों के बीच इस तरह के आयोजन सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
सेना और आईटीबीपी ने किया गर्मजोशी से स्वागत
सीमा क्षेत्र में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान भारतीय सेना और आईटीबीपी के जवानों ने ग्रामीणों का स्वागत किया। ग्रामीणों ने पारंपरिक रासो-तांदी नृत्य प्रस्तुत कर अपनी सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन किया।
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कार्यक्रम में शामिल लोगों ने जादुंग गांव में विकसित हो रही बुनियादी सुविधाओं, होमस्टे परियोजनाओं और पर्यटन संभावनाओं का भी अवलोकन किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि Jadung Village Revival केवल गांव के पुनर्विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय संस्कृति, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई पहचान दे सकता है।
नेलांग गांव को भी दोबारा बसाने की मांग तेज
धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन के दौरान ग्रामीणों ने सरकार के सामने अपनी प्रमुख मांगें भी रखीं। बगोरी गांव की ग्राम प्रधान रणजीता डोगरा, जाड़ भोटिया जन कल्याण समिति के अध्यक्ष इंद्र सिंह नेगी, भवान सिंह राणा और जसपाल रावत ने कहा कि जिस प्रकार जादुंग गांव को पुनर्जीवित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है, उसी प्रकार नेलांग गांव को भी पुनर्वास योजना में शामिल किया जाना चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि नेलांग भी उनके पूर्वजों की भूमि रही है और वहां के पुनर्विकास से क्षेत्र की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को नई मजबूती मिलेगी। उनका मानना है कि Jadung Village Revival की सफलता के बाद नेलांग को बसाने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की घोषणाओं का किया जिक्र
स्थानीय लोगों ने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री पहले भी सीमा क्षेत्र के पुराने गांवों को पुनर्जीवित करने की बात कह चुके हैं। हालांकि, जमीनी स्तर पर अभी तक नेलांग को बसाने की दिशा में अपेक्षित प्रगति नहीं दिखाई दी है।
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ग्रामीणों ने मांग की कि सरकार इस दिशा में स्पष्ट रोडमैप तैयार करे ताकि आने वाली पीढ़ियां अपने पैतृक गांवों से दोबारा जुड़ सकें। उनका कहना है कि Jadung Village Revival की तरह नेलांग के विकास से भी सीमावर्ती क्षेत्रों में आबादी बढ़ेगी और स्थानीय संस्कृति को संरक्षण मिलेगा।
इनर लाइन परमिट में राहत की उठी मांग
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने एक और महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि अपने ही पैतृक गांवों में जाने के लिए उन्हें कई प्रशासनिक प्रक्रियाओं और अनुमति प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है।
ग्रामीणों ने मांग की कि सीमा क्षेत्र के मूल निवासियों को विशेष छूट दी जाए और इनर लाइन परमिट की बाध्यता को सरल बनाया जाए। उनका तर्क है कि अपने पूर्वजों की भूमि तक पहुंचने में आने वाली प्रशासनिक कठिनाइयों को दूर करना आवश्यक है।
सीमा क्षेत्र के विकास से जुड़ी हैं बड़ी उम्मीदें
स्थानीय लोगों का मानना है कि जादुंग और नेलांग जैसे ऐतिहासिक गांवों का पुनर्विकास केवल सांस्कृतिक संरक्षण का विषय नहीं है, बल्कि यह सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और पर्यटन को बढ़ावा देने का भी अवसर है।
Jadung Village Revival को लेकर बढ़ती उम्मीदों के बीच जाड़ समुदाय चाहता है कि सरकार सांस्कृतिक धरोहर, स्थानीय आबादी और सीमा क्षेत्र के विकास को साथ लेकर आगे बढ़े। फिलहाल जादुंग में हुए इस आयोजन ने लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ नेलांग के भविष्य को लेकर नई चर्चा भी शुरू कर दी है।
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