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Lokhitkranti > उत्तराखंड > Haridwar Kumbh 2027: अर्ध कुंभ या पूर्ण कुंभ? हाईकोर्ट में उठे सवाल पर सुनवाई के बाद याचिका खारिज
उत्तराखंड

Haridwar Kumbh 2027: अर्ध कुंभ या पूर्ण कुंभ? हाईकोर्ट में उठे सवाल पर सुनवाई के बाद याचिका खारिज

Manisha
Last updated: 2026-05-30 8:22 पूर्वाह्न
Manisha Published 2026-05-30
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Haridwar Kumbh 2027: Devotees at Haridwar Ganga Ghat during Haridwar Kumbh 2027 discussion as Uttarakhand High Court hears Ardh Kumbh naming dispute case.
Haridwar Kumbh 2027: Devotees at Haridwar Ganga Ghat during Haridwar Kumbh 2027 discussion as Uttarakhand High Court hears Ardh Kumbh naming dispute case.
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Haridwar Kumbh 2027: उत्तराखंड हाईकोर्ट में 2027 में हरिद्वार में आयोजित होने वाले धार्मिक आयोजन को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद बड़ा फैसला सामने आया है। याचिका में सरकार पर आरोप लगाया गया था कि वह 2027 में होने वाले अर्ध कुंभ को “कुंभ” बताकर प्रचारित कर रही है और केंद्र सरकार से अधिक बजट लेने की तैयारी कर रही है। इस मामले पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने जनहित याचिका को निरस्त कर दिया। हालांकि अदालत ने याचिकाकर्ता को राज्य सरकार के समक्ष अपना पक्ष रखने की स्वतंत्रता भी दी है।

Contents
हाईकोर्ट ने क्या कहा?क्या था पूरा विवाद?कुंभ और अर्ध कुंभ में क्या अंतर?धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मुद्दासरकार की तैयारी पर भी नजरदूसरी याचिका पर भी हुई सुनवाईआने वाले समय में और तेज हो सकती है बहस

यह मामला अब केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक बहस का विषय बन गया है। हरिद्वार में साधु-संतों, धार्मिक संगठनों और श्रद्धालुओं के बीच भी Haridwar Kumbh 2027 को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि यह धार्मिक भावनाओं से जुड़ा विषय है। अदालत ने याचिकाकर्ता को सलाह दी कि वे अपनी याचिका वापस लें और यदि कोई आपत्ति है तो सरकार को प्रत्यावेदन दें।

इसके बाद अदालत ने जनहित याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब यह मामला सीधे सरकार और धार्मिक संगठनों के बीच चर्चा का विषय बन सकता है।

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क्या था पूरा विवाद?

हरिद्वार निवासी और गंगा सभा हरिद्वार के अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया कि वर्ष 2027 में हरिद्वार में अर्ध कुंभ आयोजित होना है, लेकिन सरकार उसे “कुंभ” के रूप में प्रचारित कर रही है।

याचिकाकर्ता का कहना था कि Haridwar Kumbh 2027 को पूर्ण कुंभ बताना धार्मिक परंपराओं और आस्था के विपरीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बड़े बजट की मांग के लिए आयोजन को कुंभ का नाम दे रही है, जिससे श्रद्धालुओं में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।

कुंभ और अर्ध कुंभ में क्या अंतर?

याचिका में यह भी कहा गया कि हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्ण कुंभ का आयोजन 12 वर्षों में एक बार होता है, जबकि अर्ध कुंभ छह साल में आयोजित किया जाता है। हरिद्वार में 2021 में पूर्ण कुंभ आयोजित हुआ था, इसलिए अगला पूर्ण कुंभ 2033 में होना चाहिए। ऐसे में 2027 का आयोजन अर्ध कुंभ माना जाएगा।

धार्मिक परंपराओं के जानकारों के अनुसार पूर्ण कुंभ में शाही स्नान का विशेष महत्व होता है। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि यदि 2027 के आयोजन को कुंभ कहा जाएगा तो शाही स्नान की परंपरा भी लागू होगी, जिससे सामान्य श्रद्धालुओं को असुविधा हो सकती है।

इसी मुद्दे को लेकर Haridwar Kumbh 2027 चर्चा का केंद्र बना हुआ है। कई धार्मिक संगठनों का मानना है कि सदियों पुरानी परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं को स्पष्ट रूप से बनाए रखना जरूरी है।

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धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मुद्दा

हरिद्वार को हिंदू धर्म की सबसे पवित्र नगरीयों में गिना जाता है। यहां होने वाला कुंभ और अर्ध कुंभ केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा विषय है। यही कारण है कि इस मामले में भावनात्मक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं।

कुछ लोग सरकार की तैयारी और प्रचार को उचित मान रहे हैं। उनका कहना है कि बड़े स्तर पर श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए सरकार को व्यापक तैयारी करनी पड़ती है। वहीं दूसरी ओर कुछ धार्मिक संगठनों का कहना है कि धार्मिक आयोजनों के नाम और परंपराओं में बदलाव नहीं होना चाहिए।

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सरकार की तैयारी पर भी नजर

हालांकि सरकार की ओर से इस मामले में अब तक कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर 2027 के आयोजन को लेकर तैयारियां शुरू होने की चर्चा है। हरिद्वार में बुनियादी ढांचे, यातायात, सुरक्षा और गंगा घाटों के विकास को लेकर योजनाएं बनाई जा रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि चाहे आयोजन को अर्ध कुंभ कहा जाए या कुंभ, श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन के लिए व्यवस्थाएं करना बड़ी चुनौती होगी। इसी वजह से सरकार व्यापक स्तर पर तैयारियों में जुटी हुई है।

दूसरी याचिका पर भी हुई सुनवाई

इसी दौरान हाईकोर्ट में सितारगंज चीनी मिल से जुड़े कर्मचारियों के मामले पर भी सुनवाई हुई। कर्मचारियों ने आरोप लगाया था कि सरकार द्वारा पीपी मोड पर चीनी मिल दिए जाने के बाद उनके देयकों का भुगतान नहीं किया गया और उन्हें दूसरी जगह समायोजित भी नहीं किया गया। वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए औद्योगिक सचिव को कर्मचारियों के प्रत्यावेदन पर विचार करने के निर्देश दिए हैं।

आने वाले समय में और तेज हो सकती है बहस

फिलहाल हाईकोर्ट ने जनहित याचिका खारिज कर दी है, लेकिन Haridwar Kumbh 2027 को लेकर बहस खत्म होती नहीं दिख रही। धार्मिक संगठनों, संत समाज और प्रशासन के बीच आने वाले समय में इस मुद्दे पर और चर्चाएं हो सकती हैं।

हरिद्वार जैसे धार्मिक शहर में कुंभ और अर्ध कुंभ केवल आयोजन नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और परंपरा का प्रतीक हैं। ऐसे में सरकार के हर फैसले पर लोगों की नजर बनी हुई है।

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