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Lokhitkranti > मध्य प्रदेश > MP Wheat Procurement Record: गेहूं खरीदी में मध्यप्रदेश ने रचा नया इतिहास, किसानों से खरीदा 104 लाख मीट्रिक टन गेहूं
मध्य प्रदेश

MP Wheat Procurement Record: गेहूं खरीदी में मध्यप्रदेश ने रचा नया इतिहास, किसानों से खरीदा 104 लाख मीट्रिक टन गेहूं

Lokhit Kranti
Last updated: 2026-05-29 5:27 pm
Lokhit Kranti Published 2026-05-29
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MP Wheat Procurement Record
MP Wheat Procurement Record: गेहूं खरीदी में मध्यप्रदेश ने रचा नया इतिहास, किसानों से खरीदा 104 लाख मीट्रिक टन गेहूं
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MP Wheat Procurement Record: मुख्यमंत्री  डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने इस साल गेहूं उपार्जन में नया रिकॉर्ड बनाकर देशभर का ध्यान अपनी ओर खींचा है। प्रदेश सरकार ने निर्धारित लक्ष्य से आगे बढ़ते हुए 104 लाख 22 हजार मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की खरीदी की है। यह उपलब्धि केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे किसानों के भरोसे, प्रशासनिक तैयारी और सरकार की आक्रामक खरीद नीति का परिणाम माना जा रहा है।

Contents
पंजाब के बाद दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक खरीदार बना एमपीछोटे किसानों पर रहा सरकार का खास फोकसखरीदी केंद्रों पर बदली व्यवस्था, रात तक चला कामकिसानों के खातों में पहुंचे 23 हजार करोड़ से ज्यादाभोपाल और उज्जैन संभाग रहे सबसे आगेक्या ग्रामीण वोट बैंक को मजबूत करने की तैयारी?

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने इसे किसानों के हित में सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता बताया। खास बात यह रही कि शुरुआत में केंद्र सरकार ने मध्यप्रदेश को 78 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य दिया था, लेकिन मुख्यमंत्री मोहन यादव के प्रयासों के बाद इसे बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन (MP Wheat Procurement Record) किया गया। इसके बावजूद प्रदेश ने तय सीमा को भी पार कर दिया।

पंजाब के बाद दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक खरीदार बना एमपी

गेहूं उपार्जन के मामले में (MP Wheat Procurement Record) मध्यप्रदेश अब पंजाब के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य बनकर उभरा है। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर प्रदेश के 13 लाख 41 हजार 266 किसानों से गेहूं खरीदा गया, जो देश में सबसे अधिक किसानों की भागीदारी वाले राज्यों में शामिल है। कोविड काल को छोड़ दिया जाए तो पिछले एक दशक में यह सबसे बड़ा गेहूं उपार्जन माना जा रहा है। इससे साफ है कि राज्य सरकार ने इस बार खरीदी प्रक्रिया को लेकर पहले से अधिक तैयारी की थी।

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छोटे किसानों पर रहा सरकार का खास फोकस

इस बार की खरीदी प्रक्रिया में लघु और सीमांत किसानों को प्राथमिकता देना सरकार की रणनीति का अहम हिस्सा रहा। प्रदेश के 8 लाख 9 हजार 990 छोटे और सीमांत किसानों से 32 लाख 14 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा गेहूं खरीदा (MP Wheat Procurement Record) गया।

सरकार ने कोशिश की कि छोटे किसानों को मंडियों और खरीदी केंद्रों पर किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। यही वजह रही कि स्लॉट बुकिंग करा चुके किसानों के लिए खरीदी की अंतिम तारीख 23 मई से बढ़ाकर 28 मई तक कर दी गई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसानों के बीच अपनी मजबूत पकड़ बनाने के लिए मोहन यादव सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर विशेष फोकस कर रही है और यह रिकॉर्ड उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

खरीदी केंद्रों पर बदली व्यवस्था, रात तक चला काम

इस बार सरकार ने खरीदी (MP Wheat Procurement Record) केंद्रों पर व्यवस्थाओं को लेकर भी कई बदलाव किए। किसानों की सुविधा के लिए तौल कांटों की संख्या बढ़ाई गई। तौल पर्ची जारी करने का समय रात 10 बजे तक रखा गया, जबकि भुगतान प्रक्रिया रात 12 बजे तक जारी रखने के निर्देश दिए गए।

केंद्रों पर पीने के पानी, छायादार स्थान, बारदाना, हम्माल, सिलाई मशीन, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण और साफ-सफाई की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने खुद कई खरीदी केंद्रों का औचक निरीक्षण किया और किसानों से सीधे बातचीत कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली। सरकार की कोशिश थी कि किसानों को लाइन, भुगतान या तौल जैसी समस्याओं का सामना कम से कम करना पड़े।

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किसानों के खातों में पहुंचे 23 हजार करोड़ से ज्यादा

राज्य सरकार ने अब तक किसानों को 23 हजार 708 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान कर दिया है। खरीदे गए गेहूं (MP Wheat Procurement Record) में से 96 लाख 52 हजार 957 मीट्रिक टन गेहूं का परिवहन भी पूरा हो चुका है, जो कुल खरीदी का लगभग 93 प्रतिशत है। इस बार किसानों को 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य के साथ 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस भी दिया गया। यानी कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदा गया। सरकार का मानना है कि बोनस की घोषणा से किसानों को आर्थिक राहत मिली और अधिक किसानों ने सरकारी खरीदी केंद्रों का रुख किया।

भोपाल और उज्जैन संभाग रहे सबसे आगे

संभागवार आंकड़ों पर नजर डालें तो भोपाल संभाग में सबसे अधिक 28.47 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा (MP Wheat Procurement Record) गया। इसके बाद उज्जैन संभाग में 22.84 लाख मीट्रिक टन उपार्जन दर्ज हुआ। इसके अलावा जबलपुर, नर्मदापुरम, इंदौर, सागर और रीवा संभागों में भी बड़े स्तर पर खरीदी हुई। इससे स्पष्ट है कि इस बार पूरे प्रदेश में खरीदी प्रक्रिया व्यापक स्तर पर सक्रिय रही।

क्या ग्रामीण वोट बैंक को मजबूत करने की तैयारी?

रिकॉर्ड गेहूं खरीदी (MP Wheat Procurement Record) केवल कृषि उपलब्धि नहीं, बल्कि राजनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है। एक तरफ इससे किसानों में सरकार के प्रति विश्वास बढ़ा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नकदी प्रवाह भी मजबूत हुआ है। आने वाले समय में यदि सरकार इसी तरह भुगतान, बोनस और सुविधाओं पर फोकस बनाए रखती है, तो मध्यप्रदेश देश के कृषि मॉडल राज्यों में और मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।

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