Ujjain Shipra Parikrama 2026: गंगा दशहरा के पावन अवसर पर उज्जैन में आयोजित मां शिप्रा तीर्थ परिक्रमा यात्रा (Ujjain Shipra Parikrama 2026) का समापन मंगलवार को रामघाट पर भव्यता और श्रद्धा के साथ हुआ। इस पूरे आयोजन ने शहर को भक्ति, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति के रंग में रंग दिया। रामघाट पर हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति के बीच पूरा वातावरण ‘हर-हर शिप्रा’ के जयघोष से गूंज उठा।
मुख्यमंत्री ने किया मां शिप्रा का पूजन, अर्पित की 351 फीट लंबी चुनरी
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर सपत्नीक मां शिप्रा का विधिवत पूजन किया और 351 फीट लंबी चुनरी अर्पित की। इस दौरान उन्होंने प्रदेश की सुख-समृद्धि और उज्जैन की निरंतर प्रगति की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा दशहरा का यह पर्व इस वर्ष अत्यंत भव्य और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रूप (Ujjain Shipra Parikrama 2026) में मनाया जा रहा है। उन्होंने प्रदेशवासियों को इस पावन पर्व की शुभकामनाएं भी दीं।
भारतीय नौसेना बैंड की प्रस्तुति ने बढ़ाई भव्यता
रामघाट पर आयोजित कार्यक्रम (Ujjain Shipra Parikrama 2026) में भारतीय नौसेना के बैंड की विशेष प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया। अनुशासन और राष्ट्रभक्ति से भरी धुनों ने पूरे वातावरण को भावनात्मक और ऊर्जावान बना दिया। इसके साथ ही प्रसिद्ध भजन गायिका मैथिली ठाकुर की प्रस्तुतियों ने माहौल को पूरी तरह भक्तिमय कर दिया। उनके भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
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दीपदान और आस्था का अद्भुत दृश्य
कार्यक्रम के दौरान (Ujjain Shipra Parikrama 2026) बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मां शिप्रा में दीप प्रवाहित कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। दीपों की जगमगाहट से नदी का किनारा दिव्यता से भर उठा और दृश्य अत्यंत मनमोहक हो गया।भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे, जिससे पूरा आयोजन शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ।
दो दिवसीय तीर्थ परिक्रमा यात्रा का भव्य स्वरूप
मां शिप्रा तीर्थ परिक्रमा यात्रा (Ujjain Shipra Parikrama 2026) सोमवार से प्रारंभ हुई थी, जो दो दिनों तक धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के साथ चली। पहले दिन यात्रा रामघाट से शुरू होकर नृसिंह घाट, कर्कराज मंदिर, वेधशाला, महामृत्युंजय द्वार और प्रशांतिधाम होते हुए दत्त अखाड़ा पहुंची, जहां रात्रि विश्राम किया गया। दूसरे दिन यह यात्रा दत्त अखाड़ा से आगे बढ़कर रणजीत हनुमान, कालभैरव, मंगलनाथ, सांदीपनि आश्रम, गढ़कालिका, भर्तृहरि गुफा और वाल्मीकि धाम होते हुए पुनः रामघाट पर समाप्त हुई।
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सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी
इस धार्मिक यात्रा (Ujjain Shipra Parikrama 2026) के दौरान विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं ने श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए जगह-जगह शिविर लगाए। यात्रियों के लिए ठंडा पानी, शरबत, फल और प्रसाद की व्यवस्था की गई, जिससे पूरे आयोजन में सेवा भाव स्पष्ट दिखाई दिया। स्थानीय नागरिकों की भागीदारी ने इस आयोजन को और अधिक भव्य और जनसहभागिता से भरपूर बना दिया।
संयोजन और आयोजन का व्यापक प्रबंधन
इस आयोजन का संचालन शिप्रा लोक संस्कृति समिति के संयोजन में किया गया। इसके साथ ही महाराज विक्रमादित्य रिसर्च इंस्टीट्यूट, उज्जैन विकास प्राधिकरण और रामघाट तीर्थ पुरोहितों का सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा। प्रशासन और आयोजकों के समन्वय से यह पूरा कार्यक्रम सफलतापूर्वक और भव्य रूप में संपन्न हुआ।
भक्ति, संस्कृति और परंपरा का संगम
मां शिप्रा तीर्थ परिक्रमा यात्रा (Ujjain Shipra Parikrama 2026) और गंगा दशहरा का यह आयोजन केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का प्रतीक बनकर सामने आया। रामघाट पर दीपों, भजनों और राष्ट्रभक्ति की धुनों के साथ संपन्न यह पर्व श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय अनुभव बन गया।
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