Restricts LPG Cylinders PNG Users: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अब सीधे भारत की रसोई तक पहुंचने लगा है। ईरान और अमेरिका-इज़राइल के बीच जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। इसी बीच भारत सरकार ने गैस आपूर्ति को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब जिन उपभोक्ताओं के घरों में पाइपलाइन के जरिए PNG यानी पाइप्ड नेचुरल गैस की सुविधा उपलब्ध है, उन्हें LPG गैस सिलेंडर नहीं दिया जाएगा। सरकार का यह आदेश (Restricts LPG Cylinders PNG Users) तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
सरकार का कहना है कि देश में एलपीजी की उपलब्धता पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध जैसे हालात और खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट की वजह से भारत के लिए गैस आयात करना मुश्किल होता जा रहा है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है और उसमें भी ज्यादातर आपूर्ति मध्य पूर्व के देशों से होती है।
ऐसे में सरकार अब उपलब्ध गैस संसाधनों को प्राथमिकता के आधार पर बांटने की तैयारी में है। जिन लोगों के पास पहले से PNG कनेक्शन मौजूद हैं, उन्हें अब एलपीजी सिलेंडर (Restricts LPG Cylinders PNG Users) देने की जरूरत नहीं मानी जा रही। सरकार का मानना है कि इससे उन परिवारों को राहत मिलेगी जो पूरी तरह सिलेंडर पर निर्भर हैं।
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भारत की गैस जरूरत और बढ़ती चुनौती
भारत ने वर्ष 2025 में करीब 33.15 मिलियन मीट्रिक टन एलपीजी की खपत की। इसमें लगभग 60 प्रतिशत गैस आयात के जरिए देश में पहुंची। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस आयात का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा मध्य पूर्व पर निर्भर रहा है। ईरान संकट के चलते समुद्री मार्ग प्रभावित होने की आशंका है। अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही बाधित होती है, तो भारत समेत कई देशों के लिए तेल और गैस आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है। यही वजह है कि सरकार पहले से ही आपूर्ति प्रबंधन की रणनीति पर काम कर रही है। (Restricts LPG Cylinders PNG Users)
आम लोगों पर क्या होगा असर?
इस फैसले (Restricts LPG Cylinders PNG Users) का सबसे ज्यादा असर उन शहरी परिवारों पर पड़ सकता है जिन्होंने सुविधा के लिए PNG और LPG दोनों विकल्प ले रखे थे। अब उन्हें केवल पाइपलाइन गैस पर निर्भर रहना होगा। हालांकि सरकार का दावा है कि PNG सप्लाई सामान्य बनी रहेगी, लेकिन लोगों के बीच चिंता बढ़ना शुरू हो गई है। कई शहरों में पहले से ही गैस सिलेंडर की डिलीवरी में देरी की शिकायतें सामने आ रही हैं। अगर अंतरराष्ट्रीय हालात और बिगड़ते हैं तो आने वाले समय में गैस की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
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पेट्रोल-डीजल के बाद अब गैस महंगी होने के संकेत
हाल ही में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। इसका असर भारत में पेट्रोल और डीजल (Restricts LPG Cylinders PNG Users) की कीमतों पर भी देखने को मिला। अब माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में घरेलू गैस सिलेंडर भी महंगे हो सकते हैं। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो भारत को गैस आयात के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। इसका सीधा बोझ आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
सरकार की रणनीति क्या है?
सरकार पिछले कुछ वर्षों से लोगों को PNG अपनाने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रही थी। इसे सुरक्षित, सुविधाजनक और पर्यावरण के लिहाज से बेहतर विकल्प बताया गया। अब संकट की घड़ी में सरकार उसी नेटवर्क का इस्तेमाल गैस आपूर्ति संतुलित करने के लिए कर रही है। इसके अलावा कई उद्योगों के लिए भी एलपीजी आपूर्ति में कटौती किए जाने की खबरें सामने आई हैं। सरकार फिलहाल घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने की रणनीति पर काम कर रही है ताकि ग्रामीण और छोटे शहरों में गैस संकट ज्यादा न बढ़े।
आने वाले समय में क्या बदल सकता है?
ऊर्जा बाजार पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान संकट जल्दी नहीं थमता, तो भारत को वैकल्पिक गैस आपूर्ति स्रोत तलाशने पड़ सकते हैं। साथ ही सरकार को घरेलू गैस वितरण नीति में भी बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं। फिलहाल सरकार का यह फैसला एक अस्थायी व्यवस्था के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि वैश्विक युद्ध और तनाव का असर अब आम भारतीय परिवारों की रसोई तक पहुंच चुका है।
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