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Supreme Court on Twisha Sharma Case: ‘मृत बेटी से बेहतर तलाकशुदा बेटी’, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने बदल दी बहस की दिशा

Gajendra Singh Tanwar
Last updated: 2026-05-25 12:07 अपराह्न
Gajendra Singh Tanwar Published 2026-05-25
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Supreme Court on Twisha Sharma Case
Supreme Court on Twisha Sharma Case: ‘मृत बेटी से बेहतर तलाकशुदा बेटी’, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने बदल दी बहस की दिशा
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Supreme Court on Twisha Sharma Case: ट्विशा शर्मा मौत मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। इस मामले को लेकर अदालत ने स्वतः संज्ञान लिया है और सुनवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं। सबसे ज्यादा चर्चा उस टिप्पणी की हो रही है जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘मृत बेटी से बेहतर है तलाकशुदा बेटी।’ अदालत की इस टिप्पणी को घरेलू हिंसा और वैवाहिक विवादों के मामलों में एक बड़ा सामाजिक संदेश माना जा रहा है।

Contents
‘न्यायपालिका पर सवाल खड़े करना दुर्भाग्यपूर्ण’मीडिया इंटरव्यू पर भी सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंताSG तुषार मेहता ने उठाए सवालगिरिबाला सिंह के बयान पर बहस‘दोषियों तक पहुंचे जांच एजेंसी’सामाजिक बहस का केंद्र बना मामला

सुनवाई (Supreme Court on Twisha Sharma Case) के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि किसी भी बेटी की जान से ज्यादा महत्वपूर्ण उसका सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए और मीडिया ट्रायल से बचना जरूरी है।

‘न्यायपालिका पर सवाल खड़े करना दुर्भाग्यपूर्ण’

सुनवाई के दौरान कोर्ट (Supreme Court on Twisha Sharma Case) ने इस बात पर चिंता जताई कि सोशल मीडिया और कुछ सार्वजनिक मंचों पर यह नैरेटिव बनाया जा रहा है कि आरोपियों का संबंध न्यायपालिका से होने के कारण निष्पक्ष जांच संभव नहीं होगी। अदालत ने कहा कि इस तरह की बातें संस्थागत विश्वास को कमजोर करती हैं। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मामले में यह धारणा बनाई जा रही है कि क्योंकि आरोपी पक्ष में पति वकील है और सास पूर्व जज हैं, इसलिए न्याय नहीं मिल पाएगा। अदालत ने साफ कहा कि न्यायपालिका और जांच एजेंसियों की निष्पक्षता पर भरोसा बनाए रखना जरूरी है।

Read More: दूसरे पोस्टमार्टम से उठे नए सवाल, सुप्रीम कोर्ट की एंट्री ने बढ़ाया सस्पेंस

मीडिया इंटरव्यू पर भी सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court on Twisha Sharma Case) ने दोनों पक्षों को मीडिया में बयानबाजी से बचने की सलाह दी। अदालत ने कहा कि परिवारों को टीवी इंटरव्यू और सार्वजनिक मंचों पर बयान देने के बजाय जांच एजेंसी के सामने अपना पक्ष रखना चाहिए, ताकि जांच प्रभावित न हो। मुख्य न्यायाधीश ने मीडिया से भी संवेदनशीलता बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि मीडिया को पीड़ित परिवारों के पास बार-बार इंटरव्यू के लिए नहीं जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि किसी भी प्रकार की सार्वजनिक बयानबाजी से जांच प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।

SG तुषार मेहता ने उठाए सवाल

मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुनवाई के दौरान कहा कि कुछ इंटरव्यू और मीडिया चर्चाएं मामले की दिशा प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह लगातार मीडिया चैनलों पर जाकर पीड़िता की छवि खराब कर रही हैं। तुषार मेहता ने कहा कि अगर जांच को निष्पक्ष रखना है तो सभी पक्षों को सार्वजनिक बयानबाजी से बचना होगा। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि मीडिया कवरेज के कारण कई तथ्य सामने आए हैं, जिससे जांच को दिशा मिली।

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गिरिबाला सिंह के बयान पर बहस

गिरिबाला सिंह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने अदालत में कहा कि पुलिस के सामने दर्ज किया गया उनका पूरा बयान मीडिया में लीक हो गया। इस पर अदालत ने भी चिंता जताई और कहा कि जांच से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक होना गंभीर विषय है। वहीं दूसरी ओर तुषार मेहता ने कहा कि मीडिया में लगातार जाकर बयान देना भी उचित नहीं है। अदालत ने दोनों पक्षों को संयम बरतने की सलाह देते हुए कहा कि न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली किसी भी गतिविधि से बचना चाहिए।

‘दोषियों तक पहुंचे जांच एजेंसी’

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court on Twisha Sharma Case) ने साफ कहा कि फिलहाल अदालत किसी आरोप या तथ्य पर कोई राय नहीं दे रही है। मामले की तह तक पहुंचना जांच एजेंसी का काम है। कोर्ट ने उम्मीद जताई कि चाहे राज्य पुलिस जांच करे या फिर सीबीआई, सच्चाई सामने लाई जाएगी और दोषियों को कानून के मुताबिक सजा मिलेगी। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालत का उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी हो। उन्होंने कहा कि पीड़िता और आरोपी दोनों पक्षों के अधिकारों की रक्षा होना जरूरी है।

सामाजिक बहस का केंद्र बना मामला

ट्विशा शर्मा केस (Supreme Court on Twisha Sharma Case) अब केवल एक कानूनी मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह सामाजिक और संस्थागत विश्वास की बहस का विषय भी बन गया है। सुप्रीम Court की ‘तलाकशुदा बेटी बेहतर है’ वाली टिप्पणी ने घरेलू हिंसा, मानसिक उत्पीड़न और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। अदालत ने इस टिप्पणी के जरिए समाज को यह संदेश देने की कोशिश की है कि असफल विवाह से बाहर निकलना किसी भी महिला के लिए शर्म की बात नहीं, बल्कि उसकी सुरक्षा और सम्मान ज्यादा महत्वपूर्ण है।

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