Petrol-Diesel Price Hike: देशभर में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पिछले 12 दिनों के भीतर चौथी बार ईंधन के दाम बढ़ाए गए हैं, जिससे नौकरीपेशा लोगों से लेकर ट्रांसपोर्ट कारोबारियों तक हर वर्ग का मासिक बजट प्रभावित हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बने संकट का असर अब सीधे भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर दिखाई देने लगा है।
तेल विपणन कंपनियों (OMCs) की ओर से चरणबद्ध तरीके से किए जा रहे मूल्य संशोधन के बाद देश के कई राज्यों में पेट्रोल और डीजल के दाम (Petrol-Diesel Price Hike) फिर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में खाद्य वस्तुओं, ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों में भी तेजी आ सकती है।
12 दिनों में कितना महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल?
इंडियन ऑयल से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक 15 मई के बाद से ईंधन कीमतों में संशोधन का सिलसिला दोबारा शुरू हुआ। शुरुआत में मामूली बढ़ोतरी हुई, लेकिन धीरे-धीरे इसका असर बड़ा होता गया। अब तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों (Petrol-Diesel Price Hike) में करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा हो चुका है।
वहीं सीएनजी की कीमतें (Petrol-Diesel Price Hike) भी लगातार बढ़ रही हैं। बीते 10 दिनों में सीएनजी करीब 4 रुपये प्रति किलोग्राम महंगी हो चुकी है। इसका असर सबसे ज्यादा ऑटो चालकों, कैब ड्राइवर्स और छोटे ट्रांसपोर्ट कारोबारियों पर पड़ रहा है। कई शहरों में किराया बढ़ाने की मांग भी तेज हो गई है।
क्यों बढ़ रहे हैं ईंधन के दाम?
इस बार ईंधन कीमतों में उछाल के पीछे कई बड़े अंतरराष्ट्रीय कारण हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास सप्लाई बाधित होने की आशंका और वैश्विक ऊर्जा संकट ने कच्चे तेल की कीमतों (Petrol-Diesel Price Hike) को अस्थिर कर दिया है। इसके अलावा रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव लगातार बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से भारतीय तेल कंपनियों की लागत बढ़ी है। लंबे समय तक घाटा सहने के बाद अब कंपनियां धीरे-धीरे इसका बोझ खुदरा उपभोक्ताओं पर डाल रही हैं।
हर राज्य में अलग क्यों हैं कीमतें?
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें (Petrol-Diesel Price Hike) हर राज्य में अलग-अलग हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह राज्य सरकारों द्वारा लगाया जाने वाला वैट (VAT) है। केंद्र सरकार का एक्साइज ड्यूटी पूरे देश में समान रहता है, लेकिन राज्यों का टैक्स अलग होने के कारण अंतिम कीमत बदल जाती है।
इस समय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल जैसे राज्यों में पेट्रोल सबसे महंगा बिक रहा है। यहां कीमतें 112 रुपये से लेकर करीब 118 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुकी हैं। इन राज्यों में भारी वैट, अतिरिक्त शुल्क और इंफ्रास्ट्रक्चर सेस लगाया जाता है। वहीं दिल्ली, गुजरात, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में टैक्स अपेक्षाकृत कम होने के कारण पेट्रोल अभी भी 99 से 102 रुपये प्रति लीटर के बीच बना हुआ है।
ट्रांसपोर्ट और बाजार पर पड़ेगा असर
ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। ट्रकों और माल ढुलाई की लागत बढ़ने से सब्जियों, फल, दूध, राशन और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतें भी प्रभावित होती हैं। ट्रांसपोर्ट सेक्टर से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि डीजल महंगा होने से ऑपरेटिंग कॉस्ट तेजी से बढ़ रही है। अगर कीमतों में जल्द राहत नहीं मिली तो मालभाड़ा बढ़ाना मजबूरी बन सकता है। इससे बाजार में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।
सरकार के सामने बड़ी चुनौती
केंद्र सरकार अब दोहरी चुनौती का सामना कर रही है। एक तरफ अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर घरेलू महंगाई को नियंत्रित रखना भी जरूरी है। सरकार पहले ही कई बार एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर राहत दे चुकी है, लेकिन लगातार बढ़ते वैश्विक दबाव के कारण स्थिति फिर मुश्किल होती जा रही है। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत ने अब तक अन्य देशों की तुलना में ईंधन कीमतों को काफी हद तक नियंत्रित रखा है। अमेरिका और यूरोप समेत कई देशों में बीते वर्षों में ईंधन कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला, जबकि भारत में लंबे समय तक कंपनियों ने घाटा झेलकर कीमतों को स्थिर बनाए रखा।
आगे क्या बढ़ेगी महंगाई?
अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें (Petrol-Diesel Price Hike) इसी तरह ऊंचे स्तर पर बनी रहीं, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल और सीएनजी के दामों में और बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता। इसका सीधा असर आम आदमी के मासिक खर्च और बाजार की महंगाई पर पड़ेगा।



