Vinesh Phogat Ban Controversy: भारतीय महिला कुश्ती की सबसे चर्चित खिलाड़ियों में शामिल विनेश फोगाट एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह कोई मेडल या टूर्नामेंट नहीं, बल्कि उनकी खेल में वापसी को लेकर उठा विवाद है। दिल्ली हाई कोर्ट ने भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के फैसले पर गंभीर सवाल उठाते हुए साफ कहा कि किसी खिलाड़ी के साथ ‘बदले की भावना’ से व्यवहार नहीं होना चाहिए, खासकर तब जब वह मैटरनिटी ब्रेक के बाद वापसी (Vinesh Phogat Ban Controversy) कर रही हो।
चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि देश में मातृत्व को सम्मान और खुशी की दृष्टि से देखा जाता है। ऐसे में किसी महिला खिलाड़ी की वापसी को तकनीकी नियमों के आधार पर रोकना खेल भावना के खिलाफ माना जा सकता है।
क्या है पूरा मामला?
विवाद तब शुरू हुआ जब भारतीय कुश्ती संघ (WFI) ने विनेश फोगाट (Vinesh Phogat Ban Controversy) पर अनुशासनहीनता और नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए जून 2026 तक घरेलू प्रतियोगिताओं में भाग लेने पर रोक लगा दी। संघ का कहना है कि किसी भी खिलाड़ी को रिटायरमेंट या लंबे ब्रेक के बाद वापसी करने से पहले छह महीने पहले सूचना देनी होती है।
WFI के मुताबिक, विनेश ने इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया, इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। इसी फैसले के कारण उन्हें 30 और 31 मई को होने वाले एशियन गेम्स चयन ट्रायल्स में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं मिली।
हालांकि, विनेश फोगाट ने इस कार्रवाई को अनुचित बताते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने दलील दी कि उनके साथ अलग व्यवहार किया जा रहा है, जबकि पहले कई नामी खिलाड़ियों को विशेष परिस्थितियों में छूट मिलती रही है।
Read More: हेलिकॉप्टर छोड़ ट्रेन से दिल्ली जाएंगे हरियाणा CM नायब सैनी, जनता को देंगे खास संदेश
हाई कोर्ट ने उठाए निष्पक्षता पर सवाल
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि पहले भी कई मशहूर खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं में सीधे एंट्री या विशेष अनुमति दी जाती रही है। ऐसे में WFI का मौजूदा रवैया कई सवाल खड़े करता है। कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिए कि नियमों का इस्तेमाल किसी खिलाड़ी को बाहर करने के हथियार के रूप में नहीं होना चाहिए। बेंच ने केंद्र सरकार से यह सुनिश्चित करने को भी कहा कि विनेश फोगाट (Vinesh Phogat Ban Controversy) को आगामी एशियन गेम्स चयन ट्रायल्स में हिस्सा लेने का निष्पक्ष अवसर मिले। अदालत ने यह भी सुझाव दिया कि इस पूरे मामले की जांच के लिए विशेषज्ञों की एक समिति बनाई जाए, ताकि भविष्य में ऐसे विवाद दोबारा न हों।
मैटरनिटी ब्रेक और महिला खिलाड़ियों की चुनौतियां
यह मामला (Vinesh Phogat Ban Controversy) केवल एक खिलाड़ी के बैन तक सीमित नहीं रह गया है। अब यह बहस महिला खिलाड़ियों के अधिकारों और मैटरनिटी ब्रेक के बाद उनके करियर को लेकर भी शुरू हो चुकी है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय खेल संस्थाओं को अब महिला एथलीट्स के लिए ज्यादा संवेदनशील और आधुनिक नीतियां बनानी होंगी। सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) के नियमों में विशेष परिस्थितियों में योग्यता संबंधी नियमों में छूट देने का प्रावधान मौजूद है। इसी आधार पर अदालत ने केंद्र सरकार से विनेश के मामले पर गंभीरता से विचार करने को कहा।
Latest News Update Uttar Pradesh News, उत्तराखंड की ताज़ा ख़बर
खेल से बड़ा नहीं होना चाहिए विवाद
दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी विवाद (Vinesh Phogat Ban Controversy) से ऊपर खिलाड़ियों और खेल का हित होना चाहिए। कोर्ट का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारतीय कुश्ती पहले से कई प्रशासनिक विवादों और खिलाड़ियों के विरोध प्रदर्शनों के कारण चर्चा में रही है। यदि किसी अंतरराष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी को वापसी का उचित मौका नहीं मिलता, तो इसका असर केवल उसके करियर पर नहीं बल्कि भारतीय खेलों की छवि पर भी पड़ता है।
अब आगे क्या?
फिलहाल, विनेश फोगाट (Vinesh Phogat Ban Controversy) को तुरंत ट्रायल्स में खेलने की अनुमति नहीं मिली है, क्योंकि WFI का बैन अभी प्रभावी है। लेकिन हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद यह मामला अब केवल एक अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं, बल्कि महिला खिलाड़ियों के अधिकार, समान अवसर और खेल प्रशासन की पारदर्शिता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया है। आने वाले दिनों में केंद्र सरकार और विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट इस विवाद की दिशा तय कर सकती है। वहीं, खेल जगत की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या विनेश फोगाट को एशियन गेम्स के लिए खुद को साबित करने का निष्पक्ष मौका मिल पाएगा या नहीं।
पढ़े ताजा अपडेट : Hindi News, Today Hindi News, Breaking



