Ajmer Dargah : उत्तर प्रदेश के संभल जिले में शाही मस्जिद के सर्वे को लेकर हुए बवाल अभी थमा नहीं कि अब राजस्थान के अजमेर जिले में ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह को लेकर मामला गरमा गया है। दरअसल, अजमेर सिविल कोर्ट ने उस याचिका को स्वीकार कर लिया है जिसमें दरगाह में संकट मोचन महादेव मंदिर होने का दावा किया जा रहा है। इस मामले पर AIMIM के प्रमुख असदद्दुीन ओवैसी ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि ये अदालतों का कानूनी फर्ज है के वो 1991 एक्ट को अमल में लाए बहुत ही अफसोसनाक बात है के हिंदुत्व तंजीमों का एजेंडा पूरा करने के लिए कानून और संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रहीं हैं।
Ajmer Dargah : नरेंद्र मोदी चुप चाप देख रहे
ओवैसी ने पोस्ट में आगे लिखा कि सुल्तान-ए-हिन्द ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती (RA) भारत के मुसलमानों के सबसे अहम औलिया इकराम में से एक हैं। उनके आस्तान पर सदियों से लोग जा रहे हैं और जाते रहेंगे इंशाअल्लाह। कई राजा, महाराजा, शहंशाह, आए और चले गए, लेकिन ख्वाजा अजमेरी का आस्तान आज भी आबाद है। 1991 का इबादतगाहों का कानून साफ कहता है के किसी भी इबादतगाह की मजहबी पहचान को तब्दील नहीं किया जा सकता, ना अदालत में इन मामलों की सुनवाई होगी। ये अदालतों का कानूनी फर्ज है के वो 1991 एक्ट को अमल में लाए, बहुत ही अफसोसनाक बात है के हिंदुत्व तंजीमों का एजेंडा पूरा करने के लिए कानून और संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रहीं हैं और नरेंद्र मोदी चुप चाप देख रहे हैं।
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