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Lokhitkranti > उत्तराखंड > Labour Exit Plan: नोएडा श्रमिक हिंसा के बाद अलर्ट हुआ उत्तराखंड, सरकार का बड़ा ‘EXIT Plan’, बढ़ी मजदूरी और लागू हुआ VDA
उत्तराखंड

Labour Exit Plan: नोएडा श्रमिक हिंसा के बाद अलर्ट हुआ उत्तराखंड, सरकार का बड़ा ‘EXIT Plan’, बढ़ी मजदूरी और लागू हुआ VDA

Lokhit Kranti
Last updated: 2026-05-07 9:21 पूर्वाह्न
By Lokhit Kranti 3 महीना ago
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Fire Safety Audit: Officials conducting Uttarakhand audits in hospitals, malls and commercial buildings following Delhi and Lucknow fire tragedies.
Fire Safety Audit: Officials conducting Uttarakhand audits in hospitals, malls and commercial buildings following Delhi and Lucknow fire tragedies.
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Labour Exit Plan: उत्तर प्रदेश के नोएडा में न्यूनतम मजदूरी को लेकर हुए श्रमिक आंदोलन और हिंसा के बाद उत्तराखंड सरकार ने समय रहते बड़ा और रणनीतिक कदम उठाया है। राज्य सरकार ने औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ते श्रमिक असंतोष को देखते हुए नई न्यूनतम मजदूरी दरें लागू कर दी हैं। खास बात यह है कि उत्तराखंड में पहली बार इंजीनियरिंग क्षेत्र के श्रमिकों के लिए अलग से न्यूनतम मजदूरी तय की गई है।

Contents
नोएडा हिंसा के बाद बढ़ी चिंतापहली बार तय हुई इंजीनियरिंग सेक्टर की मजदूरीVDA लागू होने से मिलेगी अतिरिक्त राहतपड़ोसी राज्यों से बेहतर मजदूरी देने की कोशिशहर महीने होगा श्रमिक-प्रबंधन संवादलंबे समय से बनी थी असमानतासरकार की तेज कार्रवाई चर्चा मेंऔद्योगिक स्थिरता पर रहेगा असर

सरकार के इस कदम को एक तरह का Labour Exit Plan माना जा रहा है, जिसका मकसद संभावित आंदोलन और औद्योगिक अस्थिरता को पहले ही रोकना है। इसके साथ ही गैर-इंजीनियरिंग क्षेत्रों में भी मजदूरी बढ़ाने और वेरिएबल डियरनेस अलाउंस यानी VDA लागू करने का फैसला लिया गया है।

नोएडा हिंसा के बाद बढ़ी चिंता

हाल ही में नोएडा में न्यूनतम मजदूरी को लेकर श्रमिकों का विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया था। कई जगह आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई थीं। इस घटना ने आसपास के राज्यों को भी सतर्क कर दिया। उत्तराखंड सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए पहले ही हालात संभालने की रणनीति तैयार कर ली।

दरअसल हरिद्वार और उधम सिंह नगर जैसे औद्योगिक जिलों में स्थित SIDCUL क्षेत्रों में लंबे समय से मजदूरी बढ़ाने की मांग उठ रही थी। बढ़ती महंगाई और पुराने वेतन ढांचे को लेकर श्रमिकों में नाराजगी थी। खासकर इंजीनियरिंग सेक्टर में अब तक स्पष्ट न्यूनतम मजदूरी नीति नहीं होने से असंतोष लगातार बढ़ रहा था।

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पहली बार तय हुई इंजीनियरिंग सेक्टर की मजदूरी

राज्य गठन के करीब 25 साल बाद पहली बार इंजीनियरिंग उद्योगों में न्यूनतम मजदूरी निर्धारित की गई है। श्रम विभाग ने तेजी दिखाते हुए कुछ ही दिनों में समीक्षा, कमेटी गठन और अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी कर नई दरों को लागू कर दिया।

नई दरों के अनुसार इंजीनियरिंग क्षेत्र में अकुशल श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी 13,800 रुपये तय की गई है। पहले यह राशि 12,356 रुपये थी। वहीं अर्ध-कुशल श्रमिकों का वेतन 13,590 रुपये से बढ़ाकर 15,100 रुपये किया गया है। कुशल श्रमिकों के लिए मजदूरी 15,224 रुपये से बढ़ाकर 16,900 रुपये निर्धारित की गई है।

सरकार का मानना है कि यह बढ़ोतरी श्रमिकों की आर्थिक स्थिति सुधारने के साथ-साथ औद्योगिक संतुलन बनाए रखने में भी मदद करेगी।

VDA लागू होने से मिलेगी अतिरिक्त राहत

उत्तराखंड सरकार ने केवल न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने तक खुद को सीमित नहीं रखा। महंगाई के असर को देखते हुए श्रमिकों के लिए VDA यानी Variable Dearness Allowance लागू करने का भी फैसला किया गया है।

यह अलाउंस महंगाई दर के आधार पर समय-समय पर संशोधित होता है, जिससे कर्मचारियों की आय पर बढ़ती कीमतों का असर कम पड़ता है। सरकार ने वर्ष 2024 से अब तक का VDA एरियर देने के भी निर्देश जारी किए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि Labour Exit Plan के तहत लिया गया यह फैसला श्रमिकों में भरोसा बढ़ाने और संभावित विरोध को शांत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

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पड़ोसी राज्यों से बेहतर मजदूरी देने की कोशिश

सरकार ने नई मजदूरी दरें तय करते समय पड़ोसी राज्यों की स्थिति का भी अध्ययन किया। उत्तराखंड ने कई मामलों में उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और बिहार की तुलना में बेहतर न्यूनतम मजदूरी देने की कोशिश की है।

श्रम विभाग का मानना है कि इससे न केवल श्रमिकों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि राज्य में उद्योगों के लिए स्थिर माहौल भी तैयार होगा। औद्योगिक विशेषज्ञों का कहना है कि मजदूरी विवाद लंबे समय तक जारी रहने पर उत्पादन और निवेश दोनों प्रभावित होते हैं। ऐसे में सरकार का यह कदम उद्योग और श्रमिक दोनों के हित में माना जा रहा है।

हर महीने होगा श्रमिक-प्रबंधन संवाद

सरकार ने श्रम विभाग को यह भी निर्देश दिए हैं कि उद्योग प्रबंधन और श्रमिकों के बीच नियमित संवाद सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए हर महीने बैठकें आयोजित की जाएंगी, ताकि किसी भी समस्या को समय रहते सुलझाया जा सके। औद्योगिक क्षेत्रों में अक्सर छोटे विवाद बड़े आंदोलन का रूप ले लेते हैं। ऐसे में यह संवाद प्रक्रिया औद्योगिक शांति बनाए रखने में मददगार साबित हो सकती है।

लंबे समय से बनी थी असमानता

दिलचस्प बात यह है कि अब तक उत्तराखंड में न्यूनतम मजदूरी की समीक्षा मुख्य रूप से गैर-इंजीनियरिंग क्षेत्रों में ही होती रही थी। इंजीनियरिंग सेक्टर लंबे समय तक इस प्रक्रिया से बाहर रहा, जिससे वहां काम करने वाले श्रमिक खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे थे। अब सरकार ने इस असंतुलन को दूर करने की कोशिश की है। माना जा रहा है कि इससे इंजीनियरिंग उद्योगों में काम कर रहे हजारों श्रमिकों को सीधा लाभ मिलेगा।

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सरकार की तेज कार्रवाई चर्चा में

इस पूरे मामले में सरकार की सक्रियता भी चर्चा का विषय बनी हुई है। महज चार से पांच दिनों के भीतर कमेटी गठन, समीक्षा और मंजूरी जैसी प्रक्रियाएं पूरी कर नई मजदूरी दरों को लागू कर दिया गया।

अप्रैल के अंत में मुख्यमंत्री की मंजूरी मिलने के बाद इसे औपचारिक रूप दिया गया। राजनीतिक और औद्योगिक जानकार इसे उत्तराखंड सरकार का “प्री-एम्प्टिव मूव” बता रहे हैं, जिसमें संभावित संकट को पहले ही भांपकर समाधान निकाल लिया गया।

औद्योगिक स्थिरता पर रहेगा असर

विशेषज्ञों का मानना है कि Labour Exit Plan के तहत लिया गया यह फैसला केवल तत्काल स्थिति संभालने तक सीमित नहीं है। इसका असर लंबे समय तक राज्य की औद्योगिक स्थिरता पर दिखाई दे सकता है।

अगर सरकार और उद्योग प्रबंधन इसी तरह श्रमिकों के मुद्दों पर समय रहते फैसले लेते रहे, तो उत्तराखंड औद्योगिक निवेश और रोजगार के लिहाज से और मजबूत स्थिति में पहुंच सकता है।

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