CM Mohan Yadav Meeting: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav Meeting) ने मंत्रालय से राज्य में चल रहे विभिन्न विकास और जनकल्याणकारी अभियानों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी संभागायुक्तों और जिला कलेक्टरों के साथ योजनाओं की प्रगति पर चर्चा की और कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की सभी योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी सुनिश्चित होगा जब उनमें जनता की सक्रिय भागीदारी और सहयोग बढ़ेगा।
जनभागीदारी को बताया योजनाओं की सफलता की कुंजी
सीएम मोहन यादव (CM Mohan Yadav Meeting) ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि हर अभियान में जनसहभागिता को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि प्रशासन तभी सफल माना जाएगा जब सरकारी योजनाएं जमीन पर असर दिखाएं और आम नागरिक उनसे सीधे लाभान्वित हों। उन्होंने कलेक्टरों से कहा कि वे नियमित रूप से फील्ड विजिट करें, ग्रामीणों से संवाद करें और उनकी समस्याओं का तुरंत समाधान सुनिश्चित करें।
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‘संकल्प से समाधान अभियान’ और जल गंगा संवर्धन की समीक्षा
मुख्यमंत्री ने बताया कि 12 जनवरी से 31 मार्च तक चलाए गए ‘संकल्प से समाधान अभियान’ के तहत 106 प्रकार की योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाया गया।
इसके साथ ही उन्होंने जल संरक्षण को लेकर चल रहे ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ की भी समीक्षा की, जो 19 मार्च से प्रारंभ होकर 30 जून 2026 तक जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण अब केवल योजना नहीं बल्कि जनआंदोलन बनना चाहिए।
गेहूं उपार्जन में पारदर्शिता और किसानों को प्राथमिकता
मुख्यमंत्री (CM Mohan Yadav Meeting) ने गेहूं उपार्जन प्रक्रिया की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि छोटे किसानों का गेहूं प्राथमिकता से खरीदा जाए और उन्हें समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए। अधिकारियों ने जानकारी दी कि अब तक 1.13 लाख किसानों से लगभग 4.96 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है और 355 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है। खास बात यह रही कि इस वर्ष पहली बार किसानों को दूसरे दिन ही भुगतान मिल रहा है।
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स्वच्छता और जल संरक्षण को जोड़ने पर जोर
सीएम (CM Mohan Yadav Meeting) ने नगरीय प्रशासन विभाग को निर्देश दिए कि स्वच्छता अभियानों को जल गंगा संवर्धन अभियान से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर प्याऊ और पेयजल सुविधाएं बढ़ाई जाएं और उनकी नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने नवाचार और तकनीक के उपयोग को भी बढ़ावा देने पर जोर दिया।
शिक्षा क्षेत्र में सुधार और सांदीपनि विद्यालयों पर फोकस
मुख्यमंत्री (CM Mohan Yadav Meeting) ने कहा कि प्रदेश के सांदीपनि विद्यालयों ने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार किया है और इनके परिणामों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित किया जाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी सांदीपनि विद्यालयों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया जाए। साथ ही अभिभावकों को विद्यालयों की उपलब्धियों से अवगत कराने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। सीएम ने दावा किया कि शिक्षा सुधार के कारण ड्रॉपआउट रेशियो लगभग समाप्त हो गया है।
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स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के निर्देश
स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा में मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों पर कम से कम 50 बेड के अस्पताल विकसित किए जाएं। इसके साथ ही संभागीय स्तर पर बर्न यूनिट्स स्थापित करने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने सभी अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने और गर्मी के मौसम के लिए मेडिकल प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने को कहा।
पेयजल व्यवस्था पर विशेष फोकस
मुख्यमंत्री (CM Mohan Yadav Meeting) ने ग्रीष्मकाल में निर्बाध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर टैंकरों से जल आपूर्ति की जाए और जल संरचनाओं का संरक्षण प्राथमिकता में रखा जाए।
‘ज्ञान भारतम ऐप’ और डिजिटल पहल
बैठक में ‘ज्ञान भारतम ऐप’ का भी उल्लेख किया गया, जिसमें अब तक 6.5 लाख से अधिक पांडुलिपियां अपलोड की जा चुकी हैं। सीएम ने सभी जिलों में इस अभियान को गति देने के लिए जिला स्तरीय समितियों के गठन के निर्देश दिए।
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कलेक्टरों की रैंकिंग और जवाबदेही सिस्टम
मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कलेक्टरों की वार्षिक प्रदर्शन रैंकिंग प्रणाली लागू करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इससे स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और प्रशासनिक कार्यों में सुधार होगा।
महिला सशक्तिकरण और आगामी कार्यक्रम
सीएम मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में अग्रणी राज्य है। उन्होंने घोषणा की कि 20 अप्रैल को भोपाल में महिला सशक्तिकरण सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल होंगी।
प्रशासनिक सुधारों पर सरकार का बढ़ता फोकस
इस समीक्षा बैठक से स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश सरकार विकास योजनाओं को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए कड़े निर्देश और जवाबदेही व्यवस्था लागू कर रही है। प्रशासनिक रैंकिंग और फील्ड विजिट जैसे कदम इस दिशा में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
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