US Special Forces Rescue: मध्य-पूर्व में जारी भारी तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान की सरजमीं पर एक बेहद साहसिक और खतरनाक रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया है। ईरान द्वारा मार गिराए गए अमेरिकी F-15E फाइटर जेट के दूसरे क्रू मेंबर को अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। यह ऑपरेशन केवल एक बचाव कार्य नहीं था, बल्कि वाशिंगटन के लिए अपनी सैन्य प्रतिष्ठा को बचाने का सवाल था। रिपोर्टों के अनुसार, भारी गोलीबारी और दुश्मन के इलाके में फंसे होने के बावजूद, अमेरिकी जांबाजों ने अपने साथी को सुरक्षित निकाल कर 1979 जैसी ऐतिहासिक शर्मिंदगी से खुद को बचा लिया है।
अल जजीरा और अमेरिकी रक्षा सूत्रों के मुताबिक, यह रेस्क्यू ऑपरेशन शनिवार रात को चलाया गया। जिस समय अमेरिकी हेलीकॉप्टर पायलट को रिकवर करने के लिए नीचे उतरे, उस दौरान ईरानी पुलिस और सुरक्षा बलों की ओर से ताबड़तोड़ गोलीबारी की जा रही थी। सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे अमेरिकी हेलीकॉप्टर गोलियों की बौछार के बीच से अपने पायलट को ढूंढकर वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं। घंटों चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद आखिरकार अमेरिका दूसरे पायलट को भी रिकवर करने में कामयाब रहा, जबकि पहले पायलट को विमान गिरने के तुरंत बाद ही सुरक्षित निकाल लिया गया था। (US Special Forces Rescue)
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अमेरिका ने दिखाई सैन्य ताकत
जब F-15E विमान को डाउन किया गया और उसके पायलट लापता हुए, तो अमेरिकी सैन्य मुख्यालय (Pentagon) में हड़कंप मच गया। अमेरिका किसी भी कीमत पर अपने पायलटों को ईरान की कैद में नहीं देखना चाहता था। इसी मकसद से इस ऑपरेशन में अमेरिका के 100 सबसे घातक कमांडर लगाए गए। इन कमांडरों को 12 अत्याधुनिक हेलीकॉप्टरों और भारी हथियारों के साथ उस पहाड़ी इलाके में भेजा गया, जहां विमान गिरा था। इन हेलीकॉप्टरों ने पूरे इलाके की घेराबंदी की और भारी गोलाबारी के बीच पायलट तक पहुंच बनाई। (US Special Forces Rescue)
दुश्मन के इलाके में पहला ऐसा डबल रेस्क्यू
अमेरिकी राष्ट्रपति ने खुद इस सफल ऑपरेशन की पुष्टि करते हुए इसकी जटिलता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह पहली बार है जब दुश्मन के इलाके के भीतर से दो अमेरिकी पायलटों को अलग-अलग ऑपरेशनों में सफलतापूर्वक बचाया गया है। राष्ट्रपति ने ट्रुथ सोशल पर अपने बयान में कहा,’पिछले कुछ घंटों में अमेरिकी सेना ने अपने एक अधिकारी को बचाने के लिए बेहद कठिन रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया, जो अब सुरक्षित है। यह अधिकारी ईरान के पहाड़ी इलाके में दुश्मन के बीच फंसा हुआ था और लगातार खतरे में था। सेना लगातार उसकी लोकेशन पर नजर रख रही थी और उनकी निगरानी में यह ऑपरेशन चलाया गया। मेरे आदेश पर कई विमान और घातक हथियार भेजे गए, जिन्होंने उसे सुरक्षित बाहर निकाला।’ (US Special Forces Rescue)

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प्रतिष्ठा का सवाल और 1979 का साया
इतिहास गवाह है कि 1979 में ईरान में अमेरिकी बंधकों को छुड़ाने का ‘ऑपरेशन ईगल क्लॉ’ बुरी तरह विफल रहा था, जिससे अमेरिका को वैश्विक स्तर पर शर्मिंदगी झेलनी पड़ी थी। इस बार, अमेरिका ने कोई कसर नहीं छोड़ी। सूत्रों का कहना है कि अगर पायलट ईरान की सेना के हाथ लग जाते, तो यह अमेरिका के लिए एक बहुत बड़ा रणनीतिक और कूटनीतिक झटका होता। यही कारण था कि अमेरिका ने अपनी पूरी सैन्य मशीनरी इस एक अधिकारी को बचाने में झोंक दी। (US Special Forces Rescue)
निगरानी में था पूरा अमेरिका
पायलट ईरान के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में फंसे हुए थे और दुश्मन की सेनाएं उनकी तलाश में थी। अमेरिकी खुफिया एजेंसियां सैटेलाइट और ड्रोन के जरिए पल-पल की लोकेशन ट्रैक कर रही थीं। जैसे ही सटीक लोकेशन मिली, स्पेशल फोर्सेज ने बिजली की रफ्तार से हमला बोला और पायलट को सुरक्षित विमान में बैठा लिया। हालांकि पायलटों को ईरान से बाहर निकाल लिया गया है, लेकिन क्षेत्र में तनाव अभी भी चरम पर है। (US Special Forces Rescue)



