Pauri Forest Fire: उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में बढ़ती गर्मी के बीच Pauri Forest Fire की घटनाओं ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। जिले के कई इलाकों में जंगलों में लगी आग तेजी से फैलती दिखाई दी, जिससे वन संपदा, वन्यजीव और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। इस बीच गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने जंगलों में बढ़ती आग की घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए वन विभाग और प्रशासन को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
पौड़ी में आयोजित दिशा समिति की बैठक के बाद जब सांसद अनिल बलूनी कोटद्वार लौट रहे थे, तब उन्होंने पौड़ी-सतपुली मार्ग पर जंगलों में धधकती आग देखी। आग कई स्थानों पर सड़क किनारे तक पहुंच चुकी थी, जिससे आसपास के क्षेत्रों में दहशत का माहौल बन गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सांसद ने तुरंत वन विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया और आग पर शीघ्र नियंत्रण पाने के निर्देश दिए।
पौड़ी-सतपुली मार्ग पर दिखी भीषण आग
स्थानीय लोगों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से जिले में तापमान लगातार बढ़ रहा है। सूखी घास और तेज हवाओं के कारण जंगलों में आग तेजी से फैल रही है। रविवार शाम पौड़ी-सतपुली मार्ग पर कई किलोमीटर तक जंगलों में आग की लपटें दिखाई दीं। कई जगहों पर धुआं इतना ज्यादा था कि सड़क पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने लगी।
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Pauri Forest Fire की घटना के दौरान राहगीरों और स्थानीय ग्रामीणों में भी डर का माहौल देखा गया। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते आग पर काबू नहीं पाया गया, तो यह नजदीकी गांवों तक भी पहुंच सकती है।
सांसद अनिल बलूनी ने जताई चिंता
गढ़वाल सांसद Anil Baluni ने कहा कि उत्तराखंड की वन संपदा राज्य की सबसे बड़ी प्राकृतिक धरोहर है। जंगल केवल हरियाली का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि जल स्रोतों, जैव विविधता और पहाड़ के जीवन का आधार भी हैं। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ रही Pauri Forest Fire की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं।
सांसद ने कहा कि जंगलों में लगने वाली आग से बहुमूल्य वन संपदा नष्ट हो रही है और वन्यजीवों का जीवन भी खतरे में पड़ रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि जंगलों में आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए सभी नागरिक जिम्मेदारी निभाएं और किसी भी प्रकार की लापरवाही से बचें।
वन विभाग को दिए तत्काल कार्रवाई के निर्देश
स्थिति को गंभीर देखते हुए सांसद अनिल बलूनी ने वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से फोन पर संपर्क कर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने स्थानीय प्रशासन को भी राहत और सुरक्षा उपायों में तेजी लाने के लिए कहा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि आग प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत टीमें भेजकर आग पर नियंत्रण किया जाए।
वन विभाग के अनुसार, Pauri Forest Fire से प्रभावित क्षेत्रों में फायर लाइन तैयार की जा रही है ताकि आग को आगे फैलने से रोका जा सके। कई जगहों पर वन कर्मियों और स्थानीय ग्रामीणों की मदद से आग बुझाने का अभियान चलाया गया।
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फायर वॉचर और टीमें अलर्ट मोड पर
डीएफओ सिविल सोयम Pawan Negi ने बताया कि जिन स्थानों से आग लगने की सूचना मिल रही है, वहां विभाग की टीमें तुरंत पहुंच रही हैं। उन्होंने कहा कि आग पर नियंत्रण पाने के लिए फायर वॉचर तैनात किए गए हैं और संवेदनशील इलाकों की लगातार निगरानी की जा रही है।
उन्होंने बताया कि गर्मियों के मौसम में जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में विभाग की प्राथमिकता आग को फैलने से रोकना और वन क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
पर्यावरण और वन्यजीवों पर बड़ा खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ती Pauri Forest Fire की घटनाएं पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं। जंगलों में लगने वाली आग से न केवल पेड़-पौधे नष्ट होते हैं, बल्कि कई दुर्लभ वन्यजीवों का जीवन भी प्रभावित होता है।
इसके अलावा जंगलों में आग लगने से मिट्टी की गुणवत्ता कमजोर होती है और जल स्रोतों पर भी असर पड़ता है। पहाड़ी क्षेत्रों में वन आग के कारण भूस्खलन और जल संकट जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।
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स्थानीय लोगों से सहयोग की अपील
प्रशासन और वन विभाग ने स्थानीय लोगों से जंगलों में सतर्कता बरतने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा कि कई बार छोटी लापरवाही बड़ी वनाग्नि का कारण बन जाती है। जंगलों में जलती बीड़ी-सिगरेट फेंकना, सूखी घास में आग लगाना या कूड़ा जलाना खतरनाक साबित हो सकता है।
सांसद अनिल बलूनी ने भी कहा कि Pauri Forest Fire जैसी घटनाओं को रोकने के लिए केवल सरकारी प्रयास काफी नहीं हैं। इसमें जनता की भागीदारी बेहद जरूरी है। यदि लोग जागरूक रहेंगे और समय रहते सूचना देंगे, तो बड़े नुकसान को रोका जा सकता है।
आने वाले दिनों में बढ़ सकती है चुनौती
मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ सकती हैं। प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं।
फिलहाल वन विभाग की टीमें प्रभावित इलाकों में लगातार काम कर रही हैं और आग पर नियंत्रण पाने की कोशिश जारी है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मियों के पूरे मौसम में सतर्कता बनाए रखना बेहद जरूरी होगा, ताकि उत्तराखंड की अमूल्य वन संपदा को सुरक्षित रखा जा सके।
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