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Lokhitkranti > Blog > राष्ट्रीय > India Oil Import: युद्ध के खतरे के बीच भारत तैयार! रणनीतिक तेल भंडार 64% भरा, राज्यसभा में बड़ा खुलासा
राष्ट्रीय

India Oil Import: युद्ध के खतरे के बीच भारत तैयार! रणनीतिक तेल भंडार 64% भरा, राज्यसभा में बड़ा खुलासा

Rupam
Last updated: 2026-03-24 12:14 पूर्वाह्न
Rupam Published 2026-03-24
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India Strategic
India Oil Import: युद्ध के खतरे के बीच भारत तैयार! रणनीतिक तेल भंडार 64% भरा, राज्यसभा में बड़ा खुलासा
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India Strategic: दुनियाभर में गहराते भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी युद्ध की आहट के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर अभेद्य ‘सुरक्षा कवच’ तैयार कर लिया है। सोमवार को राज्यसभा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserves), जो किसी भी आपात स्थिति में देश की तेल जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाए गए हैं, वर्तमान में अपनी कुल क्षमता के लगभग 64 प्रतिशत तक भरे हुए हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने सदन में स्पष्ट किया कि सप्लाई में रुकावट या वैश्विक कीमतों में अचानक उछाल आने की स्थिति में ये भंडार एक मजबूत बफर के रूप में काम करेंगे।

Contents
India Strategic- संकट के समय भारत का ‘अभय कवच’होर्मुज स्ट्रेट पर निर्भरता और समुद्री मार्गों की चुनौतीनए सप्लायर्स और तेल स्रोतों में विविधताभंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए ‘फेज-II’ पर काम शुरूभारत की वर्तमान स्थिति

भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता है, अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 88.7 प्रतिशत हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में वैश्विक अस्थिरता के बीच अपनी अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए भारत ने आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम और कर्नाटक के मंगलुरु व पादुर में विशाल भूमिगत भंडारण सुविधाएं विकसित की हैं। मंत्री ने बताया कि वर्तमान में इंडियन स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व लिमिटेड (ISPRL) के पास लगभग 3.372 मिलियन टन कच्चे तेल का स्टॉक उपलब्ध है। यह रणनीतिक तैयारी न केवल देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को दर्शाती है, बल्कि वैश्विक संकट के समय भारतीय बाजारों में ईंधन की किल्लत को रोकने के लिए एक ठोस बैकअप प्लान के रूप में भी देखी जा रही है। (India Strategic)

India Strategic- संकट के समय भारत का ‘अभय कवच’

सप्लाई चेन में अचानक आने वाली रुकावटों से निपटने के लिए भारत ने 5.33 मिलियन टन की कुल क्षमता वाली तीन भूमिगत भंडारण सुविधाएं बनाई हैं। सुरेश गोपी ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में कहा, “इन गुफाओं (भंडारों) में उपलब्ध कच्चे तेल की मात्रा बाजार की स्थितियों के आधार पर बदलती रहती है। अभी ISPRL के पास लगभग 3.372 मिलियन टन कच्चे तेल का स्टॉक उपलब्ध है, जो कुल भंडारण क्षमता का लगभग 64 फीसदी है।’ उन्होंने यह भी जोड़ा कि ये भंडार एक ‘गतिशील भंडार’ (Dynamic Inventory) के रूप में कार्य करते हैं, जो वास्तविक खपत और स्टॉक की स्थिति के अनुसार घटते-बढ़ते रहते हैं। (India Strategic)

पढ़े ताजा अपडेट : Hindi News, Today Hindi News, Breaking

होर्मुज स्ट्रेट पर निर्भरता और समुद्री मार्गों की चुनौती

भारत के तेल आयात का एक बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट के देशों जैसे सऊदी अरब, इराक और यूएई से आता है। ये तमाम खेपें रणनीतिक रूप से संवेदनशील ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) के रास्ते भारत पहुंचती हैं। आंकड़ों के अनुसार, भारत ने अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच 110 अरब डॉलर कच्चे तेल पर खर्च किए हैं। विशेष रूप से एलपीजी (LPG) का 85-95 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। युद्ध की स्थिति में इस मार्ग पर होने वाली किसी भी गतिविधि का सीधा असर भारत की रसोई और उद्योगों पर पड़ सकता है, जिसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने वैकल्पिक स्रोतों पर काम तेज कर दिया है। (India Strategic)

India Strategic
India Strategic

नए सप्लायर्स और तेल स्रोतों में विविधता

किसी एक क्षेत्र या देश पर निर्भरता कम करने के लिए भारत की सरकारी तेल कंपनियों ने अपने आयात बास्केट का विस्तार किया है। मंत्री ने बताया कि वर्तमान में भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां (PSEs) 41 देशों से कच्चे तेल का आयात कर रही हैं। पारंपरिक सप्लायर इराक और कुवैत के अलावा अब अमेरिका, नाइजीरिया, कनाडा, ब्राजील, कोलंबिया और मेक्सिको जैसे नए देशों से भी तेल मंगाया जा रहा है। रूस से आने वाले तेल ने भी मिडिल ईस्ट पर निर्भरता कम करने में बड़ी भूमिका निभाई है, जिससे वैश्विक संकट के बावजूद भारतीय आपूर्ति श्रृंखला स्थिर बनी हुई है। (India Strategic)

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भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए ‘फेज-II’ पर काम शुरू

ऊर्जा सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए सरकार ने जुलाई 2021 में दो और रणनीतिक भंडारों को मंजूरी दी थी, जिनकी कुल क्षमता 6.5 मिलियन टन होगी। इसमें ओडिशा के चांदीखोल में 4 मिलियन टन और कर्नाटक के पादुर में 2.5 मिलियन टन की अतिरिक्त क्षमता विकसित की जाएगी। सुरेश गोपी ने जानकारी दी कि पादुर में निर्माण कार्य शुरू करने का ठेका 1 अक्टूबर, 2025 को दे दिया गया है। इसके अलावा, भारत ने कमर्शियल पार्टनरशिप के तहत अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के साथ भी समझौता किया है, जो मंगलुरु के भंडारण का इस्तेमाल कर रही है। (India Strategic)

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भारत की वर्तमान स्थिति

सरकार के अनुसार, यदि देश की कुल स्टोरेज कैपेसिटी (रणनीतिक भंडार + तेल मार्केटिंग कंपनियों की सुविधाएं) को मिला दिया जाए, तो भारत के पास लगभग 74 दिनों की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त तेल उपलब्ध है। मंत्री ने दोहराया, “वास्तविक भंडार एक गतिशील संख्या है जो स्टॉक और वास्तविक खपत पर निर्भर करती है, और ये दोनों ही स्थिर नहीं रहते।” सरकार की इस दूरदर्शी नीति का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों की अनिश्चितता से घरेलू उपभोक्ताओं को बचाना और युद्ध जैसी विषम परिस्थितियों में देश के चक्के को जाम होने से रोकना है। (India Strategic)

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