Operation Sindoor: 7 मई 2026 को भारत के चर्चित सैन्य अभियान Operation Sindoor की पहली वर्षगांठ है। पिछले वर्ष 2025 में भारतीय सेना ने 7 मई से 10 मई के बीच यह ऑपरेशन चलाया था। इस अभियान की शुरुआत जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद हुई, जिसमें 26 पर्यटकों की जान चली गई थी। देशभर में गुस्से के माहौल के बीच भारत ने पाकिस्तान स्थित आतंकी ढांचे को निशाना बनाकर जवाबी कार्रवाई की थी।
चार दिनों तक चले इस सैन्य अभियान में भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के कई रणनीतिक ठिकानों को टारगेट किया। भारत का मुख्य उद्देश्य आतंकी लॉन्चपैड, ट्रेनिंग कैंप और उन सैन्य संरचनाओं को नुकसान पहुंचाना था, जिन पर आतंकियों को संरक्षण देने के आरोप लगते रहे हैं। अब ऑपरेशन की पहली वर्षगांठ पर एक बार फिर चर्चा तेज है कि आखिर Operation Sindoor में पाकिस्तान ने क्या-क्या खोया।
पाकिस्तान के कई एयरबेस बने निशाना
खुले स्रोतों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय सेना ने ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान के करीब दर्जनभर एयरबेस और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। इनमें नूर खान एयरबेस, रफीकी एयरबेस, मुरिद बेस, सरगोढ़ा, सुक्कर, स्कार्दू, भोलारी, जैकबाबाद और सियालकोट जैसे महत्वपूर्ण ठिकानों के नाम प्रमुखता से सामने आए।
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इसके अलावा चकलाला और रहीम यार खान एयरपोर्ट पर भी हमलों की जानकारी सामने आई थी। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि इन ठिकानों पर रनवे, कम्युनिकेशन सिस्टम और सैन्य उपकरणों को नुकसान पहुंचा। हालांकि पाकिस्तान सरकार ने आधिकारिक तौर पर नुकसान को सीमित बताया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञों ने इन हमलों को पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ा झटका माना।
आतंकी ठिकानों पर सबसे बड़ा प्रहार
Operation Sindoor का सबसे बड़ा फोकस आतंकवाद से जुड़े ढांचे को तबाह करना था। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, बहावलपुर, मुरीदके, कोटली, मुज़फ्फराबाद, गुलपुर, बरनाला और शवाई नाला कैंप जैसे इलाकों में आतंकी प्रशिक्षण शिविरों को भारी नुकसान पहुंचाया गया।
भारतीय सेना ने इन ठिकानों को लेकर दावा किया था कि यहां लंबे समय से आतंकियों को ट्रेनिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट दिया जा रहा था। कई कैंपों में मौजूद हथियार डिपो, कमांड सेंटर और कम्युनिकेशन नेटवर्क पूरी तरह नष्ट कर दिए गए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कार्रवाई से पाकिस्तान समर्थित आतंकी नेटवर्क की गतिविधियों पर बड़ा असर पड़ा।
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चीनी एयर डिफेंस सिस्टम पर भी असर
Operation Sindoor के दौरान पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम को लेकर भी काफी चर्चा रही। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय सेना ने कई जगहों पर पाकिस्तान के चीनी रडार और एयर डिफेंस सिस्टम को जाम या निष्क्रिय करने में सफलता हासिल की।
लाहौर और पसूर क्षेत्र में एयर डिफेंस इंस्टॉलेशन को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई थी। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि शुरुआती हमलों के दौरान पाकिस्तान के कई अर्ली वॉर्निंग रडार सिस्टम काम नहीं कर पाए, जिससे उसकी प्रतिक्रिया क्षमता कमजोर हुई। हालांकि इन दावों की पूरी आधिकारिक पुष्टि अब तक सार्वजनिक नहीं हुई है।
लड़ाकू विमानों और सैन्य संसाधनों को नुकसान
Operation Sindoor के दौरान पाकिस्तान के कुछ लड़ाकू विमानों और सैन्य संसाधनों को भी नुकसान पहुंचने की खबरें आई थीं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नूर खान एयरबेस पर एक सी-130 विमान को क्षति पहुंची थी। वहीं भोलारी एयरबेस पर रडार सिस्टम और तकनीकी ढांचे को नुकसान हुआ।
कुछ अंतरराष्ट्रीय रक्षा विश्लेषकों ने दावा किया था कि कम से कम पांच पाकिस्तानी जेट और एक अर्ली वॉर्निंग विमान प्रभावित हुए। हालांकि पाकिस्तान की ओर से इस पर कोई विस्तृत आधिकारिक सूची जारी नहीं की गई। इसके बावजूद रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि भारतीय कार्रवाई ने पाकिस्तान की सैन्य तैयारी पर मनोवैज्ञानिक और रणनीतिक दबाव जरूर बनाया।
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जनहानि और आतंकियों के मारे जाने का दावा
पाकिस्तान सरकार ने इस Operation Sindoor में 40 नागरिकों और 13 सैन्यकर्मियों की मौत की बात स्वीकार की थी। वहीं भारतीय पक्ष का दावा था कि शुरुआती हमलों में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए। हालांकि पाकिस्तान लगातार आतंकियों की मौजूदगी से ही इनकार करता रहा।
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में आतंकी सरगना मसूद अज़हर के परिवार के कई सदस्यों और उसके करीबी सहयोगियों के मारे जाने का दावा भी किया गया था। आतंकी अब्दुल रऊफ अज़हर का नाम भी चर्चा में रहा, लेकिन इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी।
एक साल बाद भी चर्चा में क्यों है Operation Sindoor?
एक साल बाद भी Operation Sindoor सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि भारत की आतंकवाद के खिलाफ रणनीतिक नीति का प्रतीक माना जा रहा है। इस अभियान ने यह संदेश दिया कि सीमा पार आतंकवाद को लेकर भारत अब सीधे जवाब देने की नीति पर काम कर रहा है।
हालांकि ऑपरेशन से जुड़े कई आंकड़े और दावे अब भी बहस का विषय हैं, लेकिन इतना साफ है कि इस कार्रवाई ने पाकिस्तान के आतंकी ढांचे और सैन्य प्रतिष्ठानों पर गहरा असर छोड़ा। यही वजह है कि ऑपरेशन सिंदूर आज भी भारत की सबसे चर्चित सैन्य कार्रवाइयों में गिना जाता है।
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