JDU and RJD in Kerala Elections: भारत की राजनीति में अक्सर राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दल अपने प्रभाव को दूसरे राज्यों तक बढ़ाने की कोशिश करते हैं। इसी कड़ी में बिहार की दो बड़ी पार्टियां राष्ट्रीय जनता दल और जनता दल यूनाइटेड लंबे समय से केरल की राजनीति में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही हैं।
हालांकि केरल की सियासत पर दशकों से वाम दलों और कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन का दबदबा रहा है, लेकिन इसके बावजूद बिहार की इन पार्टियों की मौजूदगी लगातार बनी हुई है। अब सवाल यह उठता है कि JDU and RJD in Kerala Elections आखिर कितनी ताकत रखते हैं और क्या वे इस वाम गढ़ में कोई राजनीतिक जगह बना पाएंगे।
केरल की राजनीति क्यों है अलग?
केरल की राजनीति पूरे देश से काफी अलग मानी जाती है। यहां मुख्य रूप से दो बड़े गठबंधन वाम लोकतांत्रिक मोर्चा और संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा के बीच सीधी टक्कर होती है।
लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट का नेतृत्व कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट) कर रही है, जबकि यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट का नेतृत्व इंडियन नेशनल कांग्रेस कर रही है।
ऐसे में किसी भी बाहरी क्षेत्रीय पार्टी के लिए यहां राजनीतिक जमीन बनाना आसान नहीं होता। फिर भी JDU and RJD in Kerala Elections की चर्चा इसलिए होती है क्योंकि इन पार्टियों ने कई बार यहां चुनावी मैदान में उतरने की कोशिश की है।
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केरल में JDU की मौजूदगी
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड काफी समय से केरल में संगठन खड़ा करने की कोशिश कर रही है।
पार्टी का मानना है कि केरल में उत्तर भारतीय मजदूरों और कुछ सामाजिक समूहों के बीच उसकी राजनीतिक जमीन बन सकती है। इसी वजह से पार्टी ने कई बार स्थानीय निकाय और विधानसभा चुनावों में उम्मीदवार भी उतारे हैं।
हालांकि अभी तक JDU को यहां कोई बड़ी चुनावी सफलता नहीं मिली है। बावजूद इसके, पार्टी लगातार अपने संगठन को मजबूत करने का दावा करती रही है। यही कारण है कि JDU and RJD in Kerala Elections का मुद्दा समय-समय पर चर्चा में आ जाता है।
RJD की केरल में क्या है स्थिति?
दूसरी ओर राष्ट्रीय जनता दल, जिसकी पहचान मुख्य रूप से बिहार की राजनीति से जुड़ी है, ने भी केरल में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश की है।
पार्टी के संस्थापक लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे तेजस्वी यादव की लोकप्रियता बिहार और उत्तर भारत में ज्यादा है, लेकिन दक्षिण भारत में पार्टी का संगठन अभी कमजोर माना जाता है।
इसके बावजूद RJD ने कुछ इलाकों में पार्टी इकाइयां बनाकर चुनावी राजनीति में कदम रखने की कोशिश की है। इसी वजह से JDU and RJD in Kerala Elections को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों की दिलचस्पी बनी रहती है।
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वाम गढ़ में चुनौती कितनी बड़ी?
केरल को लंबे समय से वामपंथी राजनीति का मजबूत गढ़ माना जाता है। मौजूदा समय में राज्य के मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन के नेतृत्व में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा सत्ता में है।
ऐसे में JDU और RJD जैसी पार्टियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे मतदाताओं के बीच अपनी अलग पहचान कैसे बनाएं।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक इन पार्टियों का मजबूत स्थानीय नेतृत्व नहीं बनता, तब तक JDU and RJD in Kerala Elections का प्रभाव सीमित ही रहने की संभावना है।
क्या इस बार चुनाव लड़ेंगी ये पार्टियां?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार केरल के चुनाव में JD(U) हिस्सा लेगी या नहीं। फिलहाल पार्टी की ओर से इस बारे में कोई स्पष्ट घोषणा नहीं हुई है। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक पार्टी संगठन को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है और सही समय का इंतजार कर रही है।
दूसरी तरफ RJD भी फिलहाल बड़े स्तर पर चुनाव लड़ने की स्थिति में नहीं दिखाई देती। ऐसे में JDU and RJD in Kerala Elections फिलहाल ज्यादा चर्चा का विषय तो है, लेकिन जमीनी असर अभी सीमित ही माना जा रहा है।
भविष्य में क्या बन सकती है राजनीतिक जमीन?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केरल में बाहरी क्षेत्रीय दलों के लिए जगह बनाना बेहद कठिन है। लेकिन अगर JDU और RJD लंबे समय तक संगठन निर्माण पर ध्यान देती हैं, तो भविष्य में वे कुछ क्षेत्रों में प्रभाव बना सकती हैं।
उत्तर भारतीय प्रवासी मजदूरों की बढ़ती संख्या को देखते हुए कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में इन पार्टियों के लिए सीमित राजनीतिक अवसर बन सकते हैं।
हालांकि फिलहाल केरल की राजनीति में वाम दलों और कांग्रेस का ही दबदबा दिखाई देता है। इसलिए JDU and RJD in Kerala Elections अभी ज्यादा संभावनाओं से ज्यादा राजनीतिक प्रयोग के रूप में ही देखा जा रहा है।
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