Uttarakhand Assembly: उत्तराखंड विधानसभा का Budget Session अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है। करीब पांच दिनों तक चले इस सत्र में वित्तीय वर्ष 2026–27 के बजट के साथ कई महत्वपूर्ण विधेयकों और अध्यादेशों को मंजूरी दी गई। 9 मार्च से शुरू हुए इस सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली, वहीं कई अहम विधायी निर्णय भी लिए गए।
पांच दिनों में 41 घंटे से अधिक चली सदन की कार्यवाही
विधानसभा सचिवालय के अनुसार बजट सत्र के दौरान सदन की कुल कार्यवाही 41 घंटे 10 मिनट तक चली। इस दौरान Uttarakhand Assembly में प्रश्नकाल, शून्यकाल और विभिन्न नियमों के तहत कई मुद्दों पर चर्चा हुई।
Budget Session के दौरान Uttarakhand Assembly को 50 अल्पसूचित प्रश्न और 545 तारांकित प्रश्न प्राप्त हुए। इनमें से 291 प्रश्नों के उत्तर सरकार की ओर से दिए गए। प्रश्नकाल के दौरान विभिन्न विभागों से जुड़े विषयों पर विधायकों ने सरकार से जवाब मांगे और कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा भी हुई।
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चार अध्यादेशों को भी मिली मंजूरी
Budget Session के दौरान राज्य सरकार की ओर से लाए गए चार अध्यादेशों को भी सदन ने मंजूरी दे दी। इनमें प्रशासनिक सुधार, कर व्यवस्था और नागरिक अधिकारों से जुड़े संशोधन शामिल हैं।
सदन में जिन अध्यादेशों को स्वीकृति मिली उनमें उत्तराखंड दुकान और स्थापना (रोजगार विनिमय और सेवा शर्त) संशोधन अध्यादेश 2025, उत्तराखंड जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) अध्यादेश 2025, उत्तराखंड माल और सेवा कर (संशोधन) अध्यादेश 2025 और उत्तराखंड समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश 2026 शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इन अध्यादेशों का उद्देश्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना और विभिन्न क्षेत्रों में सुधार लाना है।
सदन में 12 महत्वपूर्ण विधेयक हुए पारित
Budget Session के दौरान विधानसभा ने विनियोग विधेयक सहित कुल 12 विधेयकों को मंजूरी दी। इन विधेयकों में रोजगार, शिक्षा, प्रशासन, सामाजिक न्याय और कानून व्यवस्था से जुड़े कई संशोधन शामिल हैं।
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पारित विधेयकों में उत्तराखंड दुकान और स्थापन (रोजगार विनियमन और सेवा-शर्त) संशोधन विधेयक 2026, उत्तराखंड जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक 2026, उत्तराखंड माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक 2026, और समान नागरिक संहिता, उत्तराखंड (संशोधन) विधेयक 2026 प्रमुख रहे।
इसके अलावा उत्तराखंड कारागार और सुधारात्मक सेवाएं (संशोधन) विधेयक, उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग (संशोधन) विधेयक, उत्तराखंड भाषा संस्थान (संशोधन) विधेयक, उत्तराखंड देवभूमि परिवार विधेयक 2026, उत्तराखंड निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक और उत्तराखंड सार्वजनिक द्यूत रोकथाम विधेयक भी सदन से पारित किए गए। इन विधेयकों को सरकार ने राज्य के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने और विभिन्न क्षेत्रों में सुधार के लिए जरूरी बताया।
विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना
Uttarakhand Assembly सत्र समाप्त होने के बाद नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि विपक्ष ने पूरे सत्र के दौरान अपनी जिम्मेदारी का ईमानदारी से निर्वहन किया। उनका कहना था कि सरकार शुरुआत से ही सत्र को जल्दी समाप्त करना चाहती थी, लेकिन विपक्ष ने विभिन्न नियमों के तहत सरकार को कई मुद्दों पर घेरने का काम किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि बजट में ठोस योजनाओं की कमी है और यह सिर्फ घोषणाओं का पुलिंदा बनकर रह गया है। उनके अनुसार राज्य के सामने मौजूद कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार स्पष्ट जवाब देने में असहज नजर आई।
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कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक मनोज तिवारी और हरीश धामी ने भी सत्र के दौरान सरकार पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि विभागीय प्रश्नों के दौरान कई मंत्रियों के पास स्पष्ट जवाब नहीं थे और कुछ मामलों में अधिकारियों की ओर से गलत आंकड़े भी प्रस्तुत किए गए।
भाजपा ने सत्र को बताया सकारात्मक
वहीं सत्तारूढ़ भाजपा के विधायक विनोद कंडारी ने बजट सत्र को सकारात्मक और रचनात्मक बताया। उन्होंने कहा कि सरकार ने विकास और प्रशासनिक सुधार से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय इस सत्र में लिए हैं।
कंडारी का कहना था कि कांग्रेस लगातार सत्र की अवधि बढ़ाने की बात करती रही, लेकिन कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में भाग नहीं लेकर उसने अपने ही तर्क को कमजोर कर दिया। उनके अनुसार विपक्ष ने कई बार सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी की, जबकि सरकार ने विधायी कार्यों को प्राथमिकता दी।
राजनीतिक बहस के बीच संपन्न हुआ सत्र
पांच दिनों तक चले इस Budget Session में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस भी हुई और कई बार सदन का माहौल गरम भी रहा। हालांकि इसके बावजूद विधायी कार्य पूरे किए गए और राज्य के लिए कई अहम निर्णय लिए गए।
Budget Session के समापन के साथ ही अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि बजट में घोषित योजनाओं और पारित विधेयकों को सरकार किस तरह जमीन पर लागू करती है।
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