Iran-US War: पश्चिम एशिया में जारी ईरान और इजरायल के बीच का संघर्ष अब अपने सबसे विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया है। युद्ध के 11वें दिन ईरान ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन माने जाने वाले ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ को बंद करने का दावा किया है, जिसके बाद इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि वे ईरानी सत्ता की हड्डियां चूर-चूर कर देंगे। इस बीच, तेहरान में भारी धमाकों और नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति ने इस आग में घी डालने का काम किया है।
दूसरी ओर, वैश्विक राजनीति के केंद्र में अब डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन की बातचीत आ गई है। ट्रंप ने दावा किया है कि युद्ध उनके नियंत्रण में है, जबकि पुतिन ने ऊर्जा संकट को लेकर पूरी दुनिया को आगाह किया है। खाड़ी देशों से लेकर यूरोप तक इस युद्ध की तपिश महसूस की जा रही है, जहाँ कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई हैं, जिससे वैश्विक बाजारों में हड़कंप मच गया है।
हॉर्मुज पर कब्जा और सुरक्षा टैक्स का ऐलान
ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ को बंद कर दिया है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) का दावा है कि अब फारस की खाड़ी से गुजरने वाले हर जहाज को ‘सिक्योरिटी ड्यूटी’ यानी सुरक्षा टैक्स देना होगा। इस कदम ने अंतरराष्ट्रीय नौवहन मार्ग में बड़ी बाधा उत्पन्न कर दी है, जिससे सऊदी अरामको जैसी दिग्गज कंपनियों ने विनाशकारी परिणामों की चेतावनी दी है। (Iran-US War)
‘नहीं पता युद्ध कब तक चलेगा’
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कर दिया है कि उनका सैन्य अभियान रुकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं पता कि यह अभियान कब तक जारी रहेगा। ऐसा नहीं है कि मुझे पता है और मैं आपको नहीं बता रहा। इजरायली सेना ने ईरान के ‘रेजीम इंफ्रास्ट्रक्चर’, मिसाइल लॉन्च साइट्स और कमांड सेंटर्स को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। (Iran-US War)
ट्रंप का यू-टर्न और पुतिन की एंट्री
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच करीब एक घंटे तक चली बातचीत ने नई उम्मीदें और आशंकाएं दोनों पैदा कर दी हैं। जहां ट्रंप युद्ध को जल्द खत्म करने का दावा कर रहे हैं, वहीं पुतिन ने मध्य पूर्व में गहराते ऊर्जा संकट पर अपनी चिंता जताई है। हालांकि, ईरानी अधिकारी अली लारीजानी ने ट्रंप की धमकियों को ‘कागजी’ करार देते हुए कहा कि ईरानी कौम इनसे डरने वाली नहीं है।

अबू धाबी और कनाडा तक पहुंची जंग की आंच
यह युद्ध अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहा। अबू धाबी के रुवैस इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स पर ड्रोन हमले के बाद भारी आग लग गई है। वहीं, कनाडा में अमेरिकी दूतावास पर फायरिंग की घटना सामने आई है, जिसका कनेक्शन ‘लोन वुल्फ’ विचारधारा और ईरान समर्थित प्रदर्शनों से जोड़ा जा रहा है। बहरीन में भी सोशल मीडिया पर ईरान का समर्थन करने वाले 5 पाकिस्तानी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। (Iran-US War)
अमेरिका का सबसे भीषण हमला
अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्युरी’ का ऐलान करते हुए कहा है कि आज का दिन ईरान के सैन्य ठिकानों पर अब तक का सबसे भीषण हमला होगा। पेंटागन के अनुसार, ईरान के मिसाइल केंद्रों को पूरी तरह नेस्तनाबूत करने की योजना तैयार कर ली गई है। (Iran-US War)
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मानवीय संकट और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन
ह्यूमन राइट्स वॉच ने गंभीर आरोप लगाया है कि इजरायल ने दक्षिणी लेबनान के रिहायशी इलाकों में ‘व्हाइट फॉस्फोरस’ का इस्तेमाल किया है। यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का सीधा उल्लंघन माना जाता है। लेबनान के बेरूत और कतर की राजधानी दोहा में भी धमाकों की गूंज सुनाई दे रही है, जिससे पूरा क्षेत्र शरणार्थी संकट की ओर बढ़ रहा है। (Iran-US War)



