Israel Attack on Iran: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान का रुख एक बार फिर सवालों के घेरे में है। एक तरफ इस्लामाबाद की सरकार अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों (Israel Attack on Iran) की निंदा करती नजर आती है, तो दूसरी ओर ईरान के जवाबी हमलों पर भी तीखी प्रतिक्रिया देती है। इस पूरे घटनाक्रम ने पाकिस्तान की कूटनीति को ‘संतुलन साधने की कोशिश’ के रूप में पेश किया है, लेकिन आलोचक इसे दोहरी नीति बता रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि जहां सरकार राजनयिक भाषा में बयान दे रही है, वहीं पाकिस्तान की सड़कों पर जनता का गुस्सा खुलकर दिखाई दे रहा है।
सरकार का संतुलित बयान या रणनीतिक मजबूरी?
पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने अमेरिका और इजरायल के हमलों (Israel Attack on Iran) की निंदा करते हुए उन्हें अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में तनाव बढ़ाने वाली किसी भी कार्रवाई का समर्थन नहीं किया जा सकता। वहीं प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान की ओर से सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों में किए गए जवाबी हमलों की आलोचना की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई पोस्ट साझा कर बताया कि उन्होंने बहरीन, कतर, जॉर्डन और सऊदी अरब के नेतृत्व से बातचीत की है और क्षेत्रीय शांति बनाए रखने पर जोर दिया है। सरकार की ओर से जारी बयानों में अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के उल्लंघन (Israel Attack on Iran) पर चिंता जताई गई है और यह भी कहा गया है कि किसी भी देश के राष्ट्राध्यक्ष या सर्वोच्च नेतृत्व को निशाना बनाना परंपराओं के खिलाफ है।
Read More: दुबई एयरपोर्ट पर संकट, पीवी सिंधू से लेकर कई बॉलीवुड हस्तियां फंसीं, भारत सरकार से मदद की अपील
खामेनेई की ‘शहादत’ पर संवेदना
पाकिस्तानी नेतृत्व ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या पर गहरी संवेदना व्यक्त की है। बयान में कहा गया कि पाकिस्तान की सरकार और जनता ईरान के लोगों के दुख में बराबर की भागीदार है। इस बयानबाजी ने एक बार फिर यह दिखाया कि पाकिस्तान एक ओर ईरान (Israel Attack on Iran) के साथ सहानुभूति जताना चाहता है, तो दूसरी ओर खाड़ी देशों से अपने संबंध भी बनाए रखना चाहता है। यही वजह है कि इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की कूटनीति बेहद सावधानी से कदम बढ़ाती दिख रही है।
Latest News Update Uttar Pradesh News, उत्तराखंड की ताज़ा ख़बर
सड़कों पर अलग तस्वीर, जनता का उफनता गुस्सा
जहां सरकार संतुलन की बात कर रही है, वहीं पाकिस्तान के कई शहरों में हालात अलग नजर आए। जनता का एक बड़ा वर्ग ईरान के समर्थन (Israel Attack on Iran) में खुलकर सामने आया। अमेरिका और इजरायल के खिलाफ नारेबाजी हुई और कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन तेज हो गए। सबसे हिंसक तस्वीर कराची में देखने को मिली। यहां अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के बाहर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़पें हुईं। स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक इस हिंसा में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई। इस घटना ने यह संकेत दिया कि पाकिस्तान के भीतर भावनाएं कितनी तीव्र हैं।
कूटनीतिक संतुलन बनाम जनभावना
विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान इस समय बेहद जटिल भू-राजनीतिक समीकरणों से गुजर रहा है। एक ओर उसे खाड़ी देशों के साथ अपने आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों को बनाए रखना है, तो दूसरी ओर ईरान (Israel Attack on Iran) के साथ धार्मिक और क्षेत्रीय संबंधों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सरकार का प्रयास है कि वह खुद को क्षेत्रीय स्थिरता का समर्थक दिखाए, लेकिन घरेलू राजनीति और जनभावनाएं उसके लिए चुनौती बन सकती हैं। अगर सड़कों पर गुस्सा बढ़ता है, तो यह सरकार की विदेश नीति पर दबाव डाल सकता है।
पढ़े ताजा अपडेट : Hindi News, Today Hindi News, Breaking
पाकिस्तान के लिए आगे की राह
पश्चिम एशिया में जारी तनाव (Israel Attack on Iran) ने पाकिस्तान को मुश्किल मोड़ पर ला खड़ा किया है। उसे तय करना होगा कि वह केवल बयानबाजी के जरिए संतुलन बनाए रख सकता है या फिर स्पष्ट नीति अपनाने की जरूरत होगी। फिलहाल जो तस्वीर सामने आई है, वह यह दर्शाती है कि सरकार और जनता के रुख में स्पष्ट अंतर है। आने वाले दिनों में यह अंतर पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति और विदेश नीति दोनों पर असर डाल सकता है।
Also Read: मोदी-नेतन्याहू की दोस्ती का नया रंग, भारतीय परिधान में दिखे इजरायल के प्रधानमंत्री, नेसेट में गूंजा भारत-इजरायल साझेदारी का संदेश



