Khamenei Death: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सनसनी फैल गई है। ईरान की सरकारी मीडिया ने पुष्टि की है कि अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले में 86 वर्षीय खामेनेई की जान चली गई। बताया जा रहा है कि यह हमला (US Israel Strike) उस समय हुआ जब वे अपने करीबी सुरक्षा सलाहकारों के साथ एक अहम बैठक कर रहे थे।
सूत्रों के मुताबिक, खामेनेई राजधानी तेहरान के एक सुरक्षित परिसर में ईरान की सर्वोच्च सुरक्षा परिषद के वरिष्ठ सदस्य अली शमखानी और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रमुख मोहम्मद पाकपूर के साथ रणनीतिक चर्चा कर रहे थे। इसी दौरान सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर एयर स्ट्राइक की गई।
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ट्रैकिंग के बाद हुआ हमला?
खाड़ी क्षेत्र के मीडिया सूत्रों का दावा है कि इजराइल और अमेरिका पिछले कई दिनों से अली शमखानी की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थे। जैसे ही यह जानकारी मिली कि वे खामेनेई से मिलने जा रहे हैं, कथित तौर पर ऑपरेशन को अंजाम दिया गया।
हमले की टाइमिंग और सटीकता को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना अंदरूनी जानकारी के इस तरह का निशाना साधना मुश्किल होता है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
पहले किसने किया Khamenei Death दावा?
Khamenei Death का दावा सबसे पहले बेंजामिन नेतन्याहू ने किया। उन्होंने एक संक्षिप्त बयान में कहा कि एक विशेष ऑपरेशन में खामेनेई को मार गिराया गया है। इसके तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी सामने आए और उन्होंने भी हमले की पुष्टि की।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप को आधिकारिक घोषणा से पहले खामेनेई का शव दिखाया गया। बताया जा रहा है कि ऑपरेशन की निगरानी एक सुरक्षित सैन्य ठिकाने से की गई थी।
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पहले भी बच चुके थे अली शमखानी
दिलचस्प बात यह है कि जून 2025 में इजराइल ने अली शमखानी पर भी हमले का दावा किया था। उस समय उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था, लेकिन बाद में वे जीवित पाए गए। अब माना जा रहा है कि शमखानी की गतिविधियों के जरिए ही खामेनेई की लोकेशन तक पहुंच संभव हो सकी।
US Israel Strike शुरू होने के बाद ईरान ने खामेनेई को कई बार सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया था। इसके बावजूद इस बार हमले से बचाव संभव नहीं हो सका।
ईरान का ऐलान, बदला लेकर रहेंगे
Khamenei Death के बाद तेहरान में गुस्से का माहौल है। ईरानी सरकार ने साफ कहा है कि यह हमला बिना जवाब के नहीं रहेगा। आधिकारिक बयान में कहा गया कि “हम चुप नहीं बैठेंगे, बदला लिया जाएगा।”
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सड़कों पर समर्थकों ने खामेनेई को शहीद करार दिया और अमेरिका-इजराइल के खिलाफ नारे लगाए। सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
इमाम हुसैन से तुलना
ईरान की फारस न्यूज एजेंसी ने खामेनेई की तुलना इमाम हुसैन से की है। एजेंसी ने लिखा कि उन्होंने जीवन हजरत अली की तरह जिया और शहादत इमाम हुसैन की तरह पाई।
इतिहास के अनुसार, 680 ईस्वी में कर्बला की जंग में इमाम हुसैन की हत्या कर दी गई थी। ईरान में इस घटना को अन्याय के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक माना जाता है। इसी संदर्भ में खामेनेई की मौत को भी प्रतीकात्मक रूप से पेश किया जा रहा है।
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परिवार के बारे में दावे
ईरानी सरकारी मीडिया ने यह भी आरोप लगाया है कि हमले में खामेनेई के परिवार के कुछ सदस्य भी मारे गए। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
आगे क्या?
Khamenei Death ने न केवल ईरान बल्कि पूरे पश्चिम एशिया को अस्थिर कर दिया है। नेतृत्व परिवर्तन, संभावित जवाबी कार्रवाई और वैश्विक कूटनीति तीनों मोर्चों पर स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है।
दुनिया की नजर अब इस बात पर है कि ईरान किस तरह जवाब देता है और क्या यह टकराव सीमित रहेगा या व्यापक युद्ध में बदल जाएगा। फिलहाल US Israel Strike हालात बेहद तनावपूर्ण हैं और हर बयान के दूरगामी असर की आशंका जताई जा रही है।
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