Income Tax Act: केंद्र सरकार देश की कर प्रणाली में बड़ा बदलाव करने जा रही है। 1 अप्रैल 2026 से नया Income Tax Act 2025 लागू होगा, जिसका असर वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भरे जाने वाले आयकर रिटर्न पर दिखाई देगा। यानी अप्रैल 2027 से दाखिल होने वाले ITR नए Income Tax Act के तहत होंगे। सरकार का दावा है कि यह सुधार कर व्यवस्था को सरल, पारदर्शी और पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित होगा।
अब प्री-फिल्ड ITR से होगी शुरुआत
नए कानून का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि करदाताओं को आय और निवेश का पूरा ब्यौरा खुद से जोड़ने की झंझट काफी हद तक खत्म हो जाएगी। आयकर विभाग के पास पहले से उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर ITR फॉर्म पहले से भरे हुए मिलेंगे। सैलरी, टीडीएस, बैंक ब्याज और अन्य कई जानकारियां स्वतः शामिल होंगी।
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करदाता को केवल उपलब्ध डेटा का मिलान करना होगा। यदि सब कुछ सही पाया जाता है तो एक क्लिक में रिटर्न जमा किया जा सकेगा। हालांकि, यदि किसी जानकारी में त्रुटि हो या कोई आय छूट गई हो तो उसे संपादित करने का विकल्प भी रहेगा। इससे छोटे करदाताओं और वेतनभोगी वर्ग को खास राहत मिलने की उम्मीद है।
फॉर्म 16 और 26AS का बदलेगा नाम
नए Income Tax Act के तहत कई फॉर्मों के नाम और संरचना में बदलाव किया गया है। प्रचलित फॉर्म 16 को अब फॉर्म 130 के नाम से जाना जाएगा। इसी तरह वार्षिक सूचना विवरण के लिए इस्तेमाल होने वाला फॉर्म 26AS अब फॉर्म 168 कहलाएगा।
सरकार ने कर कानूनों को संक्षिप्त और स्पष्ट बनाने के लिए Income Tax Act की संख्या 511 से घटाकर 333 कर दी है। फॉर्मों की संख्या भी 399 से कम करके 190 कर दी गई है। इसका उद्देश्य जटिल प्रावधानों को हटाकर व्यवस्था को सरल बनाना है, ताकि आम नागरिक भी बिना विशेषज्ञ की मदद के रिटर्न भर सके।
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क्रिप्टो निवेश पर सख्त निगरानी
वर्ष 2027 से दाखिल होने वाले रिटर्न में क्रिप्टोकरेंसी और अन्य डिजिटल एसेट्स की जानकारी देना अनिवार्य होगा। भारत ने ओईसीडी के क्रिप्टो एसेट रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क (CARF) को अपनाया है, जिसके तहत विदेशी क्रिप्टो एक्सचेंज भी भारतीय निवेशकों का डेटा सीधे आयकर विभाग को उपलब्ध कराएंगे।
यदि कोई व्यक्ति डिजिटल संपत्तियों की जानकारी छिपाता है या गलत जानकारी देता है तो 50 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही देरी या गलत विवरण पर प्रतिदिन 200 रुपये की पेनल्टी भी लग सकती है। सरकार का उद्देश्य डिजिटल निवेश को पारदर्शी बनाना और टैक्स चोरी पर रोक लगाना है।
पैन से जुड़े नियमों में ढील और बदलाव
नए Income Tax Act के तहत पैन कार्ड से संबंधित कई प्रावधानों में संशोधन किया गया है। अब एक दिन में 50 हजार रुपये से अधिक नकद जमा करने पर पैन देना अनिवार्य नहीं होगा। हालांकि, एक वित्तीय वर्ष में 10 लाख रुपये से अधिक की नकद जमा या निकासी पर पैन देना जरूरी रहेगा।
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होटल, बैंक्वेट हॉल या रेस्टोरेंट में एक लाख रुपये से कम के बिल पर पैन की जरूरत नहीं होगी। लेकिन इससे अधिक की राशि पर पैन देना अनिवार्य होगा। इसी तरह पांच लाख रुपये से अधिक कीमत की कार खरीदने पर ही पैन देना पड़ेगा, जबकि अभी किसी भी कीमत की कार पर यह जरूरी है।
प्रॉपर्टी और भत्तों पर भी असर
रियल एस्टेट लेनदेन में भी सीमा बढ़ाई गई है। अब 20 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति खरीदने पर पैन अनिवार्य होगा। पहले यह सीमा 10 लाख रुपये थी। इससे छोटे शहरों और कस्बों में मध्यम वर्ग को कुछ राहत मिल सकती है।
मकान किराया भत्ता (HRA) के दावे के लिए हैदराबाद, बेंगलुरु, पुणे और अहमदाबाद को मेट्रो शहरों की श्रेणी में शामिल किया जाएगा। इससे इन शहरों में रहने वाले कर्मचारियों को अधिक कर छूट मिल सकती है।
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इसके अलावा मोटर भत्ते में भी संशोधन किया गया है। 1600 सीसी तक की गाड़ी के लिए प्रति माह 8,000 रुपये तक का भत्ता और इससे अधिक क्षमता वाली गाड़ियों के लिए 10,000 रुपये तक का भत्ता आयकर के दायरे से बाहर रहेगा।
कर प्रणाली में डिजिटल युग की शुरुआत
सरकार का मानना है कि Income Tax Act करदाताओं के अनुभव को आसान बनाएगा और विवादों में कमी लाएगा। डिजिटल निगरानी और डेटा इंटीग्रेशन से पारदर्शिता बढ़ेगी, जबकि नियमों की संख्या घटने से जटिलता कम होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह सुधार सफल तभी होगा जब विभाग की तकनीकी प्रणाली मजबूत और डेटा सटीक हो। कुल मिलाकर, 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाला नया Income Tax Act भारत की कर प्रणाली को आधुनिक और सरल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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