2026 Rare Solar Eclipse: साल 2026 में 17 फरवरी को एक दुर्लभ सूर्यग्रहण होने वाला है। यह ग्रहण सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में दिखाई देगा। इस बार कुंभ राशि में सूर्य के साथ राहु, बुध, शुक्र और चंद्रमा भी एक साथ होंगे। ऐसा योग 37 साल बाद बन रहा है। ज्योतिष और खगोल विज्ञान दोनों के दृष्टिकोण से यह बहुत खास माना जा रहा है।
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ग्रहण का समय और स्थान
सूर्यग्रहण भारतीय समय अनुसार दोपहर 3:26 बजे शुरू होगा और शाम 7:57 बजे खत्म होगा। इसकी कुल अवधि लगभग 4 घंटे 32 मिनट की होगी। भारत में यह कंकण सूर्यग्रहण के रूप में दिखाई देगा। इसके अलावा, यह दक्षिण अफ्रीका, मॉरीशस, बोत्सवाना, मोजाम्बिक, जिम्बाब्वे, जाम्बिया, तंजानिया, नामीबिया और अमेरिका के दक्षिणी हिस्सों में भी दिखाई देगा। ग्रहण से ठीक 12 घंटे पहले यानी रात 3:26 बजे सूतक काल शुरू हो जाएगा। इस समय कोई नया काम या यात्रा न करना चाहिए।
ग्रहों का दुर्लभ संयोग
इस सूर्यग्रहण की सबसे खास बात है कुंभ राशि में पांच ग्रहों का एक साथ होना। सूर्य के साथ राहु, बुध, शुक्र और चंद्रमा भी उपस्थित रहेंगे। ऐसा योग आखिरी बार 7 मार्च 1989 को बना था। राहु और सूर्य एक साथ बैठकर ग्रहण योग बनाएंगे, जिसे ज्योतिष के अनुसार अशुभ माना जाता है। इस समय विशेष सावधानियां रखना जरूरी है।
सूर्यग्रहण का ज्योतिषीय प्रभाव
सूर्यग्रहण का प्रभाव हर व्यक्ति पर अलग-अलग हो सकता है। ज्योतिष के अनुसार इस बार के दुर्लभ योग से धन और कामकाज में अचानक बदलाव आ सकते हैं। कुछ लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां, जैसे पाचन संबंधी दिक्कत या आंखों में असुविधा महसूस हो सकती है। मानसिक स्थिति पर भी इसका असर पड़ सकता है और तनाव या बेचैनी महसूस हो सकती है। इसलिए इस समय अतिरिक्त सतर्कता और सावधानी रखना आवश्यक है।
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सावधानियां और उपाय
ग्रहण के समय खाना-पीना और कोई भारी काम करने से बचना चाहिए। इस दौरान बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। ज्योतिष अनुसार, पूजा और ध्यान ग्रहण से पहले या बाद में करना शुभ माना जाता है। घर में खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें, ताकि ठंडी हवा और ग्रहण के नकारात्मक प्रभावों से बचा जा सके। सावधानी अपनाकर यह समय सुरक्षित और शांतिपूर्ण तरीके से बीताया जा सकता है, जिससे परिवार और स्वास्थ्य दोनों सुरक्षित रहें।
वैज्ञानिक दृष्टि से सूर्यग्रहण
सूर्यग्रहण सिर्फ ज्योतिष में ही नहीं, बल्कि खगोल विज्ञान के लिए भी एक महत्वपूर्ण अवसर है। इस बार का कंकण सूर्यग्रहण होने के कारण सूर्य का केंद्र आंशिक रूप से छिप जाएगा और केवल बाहरी प्रकाश दिखाई देगा। वैज्ञानिक इस समय का उपयोग सूर्य के कोराना और उसकी सौर गतिविधियों का अध्ययन करने के लिए करेंगे। यह ग्रहण अनुसंधान और खगोलीय अवलोकन के लिए दुर्लभ अवसर प्रदान करता है। छात्रों और खगोलशास्त्रियों के लिए यह ज्ञान बढ़ाने का महत्वपूर्ण समय है।
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साल 2026 के अन्य ग्रहण
साल 2026 का दूसरा सूर्यग्रहण 12 अगस्त को लगेगा, जो भारत में दिखाई नहीं देगा। पहला चंद्रग्रहण 3 मार्च को होगा। इस बार 37 साल बाद बनने वाला यह दुर्लभ योग भविष्य के ग्रह परिवर्तन का संकेत देता है।
17 फरवरी 2026 का सूर्यग्रहण कुंभ राशि में धनिष्ठा नक्षत्र में होगा। सूर्य, राहु, बुध, शुक्र और चंद्रमा का दुर्लभ योग बन रहा है। भारत के अलावा यह दक्षिण अफ्रीका, मॉरीशस, बोत्सवाना और अमेरिका में भी दिखाई देगा। ग्रहण के दौरान सावधानी और धार्मिक उपाय करना जरूरी है। यह सूर्यग्रहण हर किसी के लिए जीवन में सजग रहने और तैयार रहने का संदेश लेकर आ रहा है।
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