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Lokhitkranti > उत्तराखंड > Green Cess Uttarakhand: उत्तराखंड की सीमाओं पर 15 चेकपोस्ट से ग्रीन सेस वसूली, 15 फरवरी से ऑटोमेटेड सिस्टम होगा लागू
उत्तराखंड

Green Cess Uttarakhand: उत्तराखंड की सीमाओं पर 15 चेकपोस्ट से ग्रीन सेस वसूली, 15 फरवरी से ऑटोमेटेड सिस्टम होगा लागू

Lokhit Kranti
Last updated: 2026-02-09 8:45 पूर्वाह्न
By Lokhit Kranti 6 महीना ago
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Green Cess Uttarakhand
Green Cess Uttarakhand: उत्तराखंड की सीमाओं पर 15 चेकपोस्ट से ग्रीन सेस वसूली, 15 फरवरी से ऑटोमेटेड सिस्टम होगा लागू
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Green Cess Uttarakhand: सरकार लंबे समय से Green Cess Uttarakhand को लेकर मंथन कर रही थी, अब उसे अमलीजामा पहनाने की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। राज्य की सीमाओं से होने वाले आवागमन को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 15 सीमावर्ती स्थानों की पहचान कर ली है, जहां से ग्रीन सेस वसूला जाएगा। इस पूरी व्यवस्था के जरिए राज्य हर साल करीब 100 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय जुटाने की योजना बना रहा है।

Contents
पर्यटन के साथ स्थायी राजस्व पर सरकार का फोकस15 फरवरी से 15 स्थानों पर लागू होगी व्यवस्थाऑटोमेटेड सिस्टम से बढ़ेगी पारदर्शिताबाहरी वाहनों से होगी बड़ी कमाईअभी कितनी हो रही है कमाई?पर्यावरण संरक्षण भी है प्रमुख उद्देश्यजानिए सेस की दरेंइन वाहनों को मिलेगी छूटरियल टाइम डेटा से मिलेगी बेहतर प्लानिंगदोहरे फायदे की उम्मीद

पर्यटन के साथ स्थायी राजस्व पर सरकार का फोकस

उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की अहम भूमिका है, लेकिन सरकार अब केवल पर्यटन पर निर्भर नहीं रहना चाहती। लगातार बढ़ते खर्च और विकास कार्यों को देखते हुए सरकार नए राजस्व स्रोत विकसित करने पर जोर दे रही है। ग्रीन सेस को इसी सोच के तहत एक संगठित और स्थायी आय स्रोत के रूप में देखा जा रहा है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सरकारी खजाने को भी मजबूती मिलेगी।

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15 फरवरी से 15 स्थानों पर लागू होगी व्यवस्था

परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि 15 फरवरी से राज्य की सीमाओं पर चिन्हित सभी 15 स्थानों पर Green Cess Uttarakhand की वसूली शुरू कर दी जाएगी। इसके लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। सभी चेक पोस्ट पर ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए जाएंगे, जो वाहनों की नंबर प्लेट स्कैन कर स्वतः ही सेस की गणना और वसूली सुनिश्चित करेंगे।

ऑटोमेटेड सिस्टम से बढ़ेगी पारदर्शिता

सरकार का मानना है कि ऑटोमेटेड व्यवस्था से वसूली में पारदर्शिता आएगी और मानवीय हस्तक्षेप लगभग खत्म हो जाएगा। इससे न केवल भ्रष्टाचार की संभावनाएं कम होंगी, बल्कि यात्रियों को भी सुविधा मिलेगी। वाहन चालकों को अलग से रुककर भुगतान नहीं करना पड़ेगा और पूरा सिस्टम डिजिटल तरीके से संचालित होगा।

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बाहरी वाहनों से होगी बड़ी कमाई

उत्तराखंड हर साल करोड़ों श्रद्धालुओं और पर्यटकों की मेजबानी करता है। चारधाम यात्रा, कांवड़ यात्रा, हेमकुंड साहिब और हरिद्वार-ऋषिकेश जैसे प्रमुख केंद्रों पर देशभर से वाहन पहुंचते हैं। सरकार का आकलन है कि इन्हीं बाहरी वाहनों से Green Cess Uttarakhand वसूली कर सालाना करीब 100 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल किया जा सकता है।

अभी कितनी हो रही है कमाई?

वर्तमान में राज्य को व्यावसायिक वाहनों से प्रतिदिन लगभग 25 से 30 लाख रुपये की Green Cess Uttarakhand आय हो रही है। इसके अलावा निजी वाहनों से पंजीकरण के समय एकमुश्त ग्रीन सेस पहले से लिया जाता है। नई व्यवस्था खासतौर पर दूसरे राज्यों से आने वाले निजी वाहनों पर केंद्रित होगी, जिससे ट्रैफिक और प्रदूषण के दबाव को संतुलित किया जा सके।

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पर्यावरण संरक्षण भी है प्रमुख उद्देश्य

Green Cess Uttarakhand का मकसद केवल आय बढ़ाना नहीं है। उत्तराखंड एक संवेदनशील हिमालयी राज्य है, जहां वाहनों की बढ़ती संख्या और प्रदूषण पर्यावरण के लिए खतरा बन सकता है। सरकार का कहना है कि इस सेस के जरिए लोगों में यह संदेश जाएगा कि राज्य में प्रवेश करने वाले हर वाहन को पर्यावरण संरक्षण में अपनी भूमिका निभानी होगी।

जानिए सेस की दरें

Green Cess Uttarakhand की दरें वाहन की श्रेणी के अनुसार तय की गई हैं। हल्के निजी वाहनों से 80 रुपये, 12 सीट से अधिक क्षमता वाली बसों से 140 रुपये और सात एक्सल वाले भारी वाहनों से 700 रुपये सेस लिया जाएगा। दरें इस तरह रखी गई हैं कि आम यात्रियों पर ज्यादा आर्थिक बोझ न पड़े, लेकिन राज्य को स्थायी आमदनी मिलती रहे।

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इन वाहनों को मिलेगी छूट

सरकार ने कुछ वाहनों को Green Cess Uttarakhand से पूरी तरह मुक्त रखा है। सरकारी वाहन, एंबुलेंस और अग्निशमन सेवा के वाहनों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। इसके अलावा दोपहिया, तिपहिया, सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहन भी सेस के दायरे से बाहर रहेंगे, ताकि पर्यावरण के अनुकूल वाहनों को बढ़ावा मिल सके।

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रियल टाइम डेटा से मिलेगी बेहतर प्लानिंग

परिवहन विभाग के अनुसार ANPR सिस्टम से सरकार को रियल टाइम डेटा भी मिलेगा, जिससे यह पता चलेगा कि किस सीमा से रोजाना कितने वाहन राज्य में प्रवेश कर रहे हैं। इससे भविष्य की ट्रैफिक प्लानिंग और पर्यावरण नीति बनाने में भी मदद मिलेगी।

दोहरे फायदे की उम्मीद

परिवहन विभाग के अधिकारी एसके सिंह के अनुसार, 15 फरवरी तक सभी तकनीकी तैयारियां पूरी कर ली जाएंगी और कर्मचारियों को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सरकार को उम्मीद है कि Green Cess Uttarakhand की यह नई व्यवस्था दोहरे लाभ लेकर आएगी- एक ओर राजस्व में वृद्धि होगी, तो दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण और ट्रैफिक नियंत्रण को लेकर एक सकारात्मक पहल साबित होगी।

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