Kolkata Earthquake 5.9 Magnitude: कोलकाता में एक बार फिर धरती कांप उठी। सुबह के समय अचानक आए भूकंप के तेज झटकों ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया। लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही इमारतें, पंखे और फर्नीचर हिलने लगे। कई सेकंड तक धरती के कांपने का एहसास हुआ, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.9 आंकी गई है।
भूकंप के झटके इतने तेज थे कि कोलकाता के अलावा आसपास के कई इलाकों में भी लोगों ने इसे महसूस किया। कई जगहों पर लोग नींद से जागकर घबराए हुए घरों से बाहर निकल आए। ऊंची इमारतों में रहने वाले लोगों ने झटकों को ज्यादा तीव्रता से महसूस किया।
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सुबह-सुबह कांपी धरती, दहशत में लोग
भूकंप के समय कई लोग अपने घरों, दफ्तरों और दुकानों में मौजूद थे। अचानक कंपन महसूस होते ही अफरा-तफरी मच गई। लोग अपने बच्चों और बुजुर्गों को लेकर खुले स्थानों की ओर दौड़ पड़े। कुछ लोगों ने बताया कि उन्हें ऐसा लगा जैसे पूरा घर हिल रहा हो।
5.9 तीव्रता ने बढ़ाई चिंता
रिक्टर स्केल पर 5.9 की तीव्रता को मध्यम से तेज भूकंप की श्रेणी में रखा जाता है। अगर यह झटका लंबे समय तक रहता या सतह के ज्यादा करीब होता, तो बड़े नुकसान की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता था। हालांकि शुरुआती जानकारी के अनुसार किसी बड़े जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है।
भूकंप का केंद्र और गहराई
भूकंप का केंद्र जमीन के अंदर बताया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार जब भूकंप ज्यादा गहराई में आता है, तो उसका असर बड़े इलाके में महसूस होता है, लेकिन नुकसान अपेक्षाकृत कम होता है। इसी वजह से कोलकाता समेत आसपास के क्षेत्रों में झटके महसूस किए गए।
प्रशासन अलर्ट, राहत एजेंसियां सतर्क
भूकंप के बाद प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग को अलर्ट कर दिया गया है। फायर ब्रिगेड, पुलिस और राहत एजेंसियां किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और आधिकारिक सूचनाओं का ही पालन करें।
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क्या कोलकाता भूकंप के खतरे वाले इलाके में है?
भूवैज्ञानिकों के अनुसार कोलकाता भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों के पास स्थित है। पूर्वोत्तर भारत और हिमालयी क्षेत्र में होने वाली टेक्टोनिक हलचल का असर पश्चिम बंगाल तक महसूस किया जा सकता है। इसी वजह से समय-समय पर हल्के से मध्यम तीव्रता के भूकंप आते रहते हैं।
भूकंप क्यों आता है?
धरती की सतह के नीचे टेक्टोनिक प्लेट्स लगातार खिसकती रहती हैं। जब ये प्लेट्स आपस में टकराती हैं या अचानक खिसकती हैं, तो ऊर्जा निकलती है, जिसे हम भूकंप के रूप में महसूस करते हैं। यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसे पूरी तरह रोका नहीं जा सकता।
भूकंप के समय क्या करें, क्या न करें
• झटके महसूस होते ही घबराएं नहीं
• मजबूत मेज या बेड के नीचे बैठ जाएं
• खुले मैदान में चले जाएं
• लिफ्ट का इस्तेमाल न करें
• अफवाहों से बचें और प्रशासन के निर्देश मानें
कोलकाता में आया यह भूकंप भले ही ज्यादा नुकसान नहीं कर पाया हो, लेकिन यह एक चेतावनी जरूर है। विशेषज्ञों का कहना है कि भूकंप से बचाव के लिए सतर्कता और जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। आने वाले समय में प्रशासन और नागरिकों को मिलकर सुरक्षा उपायों पर ध्यान देना होगा।
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