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Lokhitkranti > Blog > लाइफस्टाइल > Pterygium Eye Disease: धीरे-धीरे पुतली को ढक सकती है यह आंखों की बीमारी! इन लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
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Pterygium Eye Disease: धीरे-धीरे पुतली को ढक सकती है यह आंखों की बीमारी! इन लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

Tej
Last updated: 2026-01-09 11:18 अपराह्न
Tej Published 2026-01-09
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Pterygium eye disease symptoms
Pterygium eye disease
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Pterygium Eye Disease: अक्सर लोग छोटी-छोटी समस्याओं को नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसी ही एक बीमारी है टेरिजियम (Pterygium Eye Disease) , जिसे आम भाषा में नाखूना या सर्फर आई भी कहा जाता है। यह बीमारी धीरे-धीरे आंख के सफेद हिस्से पर पतले टिशूज की असामान्य ग्रोथ के रूप में शुरू होती है और समय के साथ कॉर्निया व पुतली तक फैल सकती है। अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए, तो यह आंखों की रोशनी पर गंभीर असर डाल सकती है।

Contents
क्या है टेरिजियम (नाखूना)?टेरिजियम होने के मुख्य कारण (Pterygium Eye Disease)इन लोगों को ज्यादा खतरानाखूना के शुरुआती और गंभीर लक्षणकैसे होती है टेरिजियम की पहचान?इलाज – कब दवा और कब सर्जरी जरूरी?शुरुआती स्टेज मेंगंभीर मामलों मेंक्या सर्जरी के बाद दोबारा लौट सकती है बीमारी?टेरिजियम से बचाव के असरदार तरीके

क्या है टेरिजियम (नाखूना)?

टेरिजियम (Pterygium Eye Disease) एक नॉन-कैंसरस आंखों की बीमारी है, जिसमें कंजंक्टिवा (आंखों का सफेद हिस्सा) पर मांस जैसी पतली झिल्ली उगने लगती है। यह ग्रोथ धीरे-धीरे आंख के अंदर की ओर बढ़ती है और कई मामलों में कॉर्निया तक पहुंच जाती है। यह समस्या एक या दोनों आंखों में हो सकती है और आमतौर पर बच्चों की तुलना में वयस्कों में ज्यादा देखने को मिलती है।

टेरिजियम होने के मुख्य कारण (Pterygium Eye Disease)

टेरिजियम का कोई एक सटीक कारण नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार कुछ बाहरी कारक इसके जोखिम को काफी बढ़ा देते हैं-

  • तेज धूप और अल्ट्रावायलेट (UV) किरणों के संपर्क में रहना
  • धूल, मिट्टी और प्रदूषण
  • हवा और सूखे मौसम में लगातार काम करना
  • आंखों की नमी का कम होना
Pterygium eye disease can affect vision.
Pterygium eye disease

इन लोगों को ज्यादा खतरा

  • किसान
  • मछुआरे
  • कंस्ट्रक्शन साइट पर काम करने वाले
  • ट्रैफिक पुलिस और आउटडोर वर्कर्स

नाखूना के शुरुआती और गंभीर लक्षण

शुरुआत में इसके लक्षण हल्के हो सकते हैं, लेकिन धीरे-धीरे समस्या बढ़ने लगती है—

  • आंखों में सफेद या हल्की गुलाबी टिशूज का उभरना
  • आंखों में जलन, खुजली और लालिमा
  • आंख के अंदर कुछ फंसा होने जैसा एहसास
  • आंखों से पानी आना या सूखापन
  • ग्रोथ कॉर्निया तक पहुंचने पर धुंधला दिखना
  • रोशनी में आंखों में चुभन

अगर ये लक्षण लगातार बने रहें, तो इन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है।

कैसे होती है टेरिजियम की पहचान?

अधिकतर मामलों में टेरिजियम की पहचान सामान्य आंखों की जांच से ही हो जाती है। इसके लिए किसी खास ब्लड टेस्ट या स्कैन की जरूरत नहीं पड़ती। आई स्पेशलिस्ट स्लिट लैम्प एग्जामिनेशन के जरिए इसकी स्थिति और आकार का आकलन करते हैं।

Also Read: Eye Health Vitamins: आंखों का फड़कना अंधविश्वास नहीं, इन 2 विटामिन की कमी हो सकती है वजह, जानिए वैज्ञानिक कारण

इलाज – कब दवा और कब सर्जरी जरूरी?

टेरिजियम का इलाज उसकी गंभीरता पर निर्भर करता है:

शुरुआती स्टेज में

  • आर्टिफिशियल टियर्स (Eye Drops)
  • एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रॉप्स
  • UV प्रोटेक्टिव सनग्लास

इनसे आंखों की नमी बनी रहती है और ग्रोथ के बढ़ने की गति धीमी हो जाती है।

गंभीर मामलों में

अगर टिशूज कॉर्निया या पुतली तक पहुंच जाए और विजन पर असर डालने लगे, तो सर्जरी ही सबसे प्रभावी उपाय होता है। कई लोग कॉस्मेटिक कारणों से भी सर्जरी का विकल्प चुनते हैं।

क्या सर्जरी के बाद दोबारा लौट सकती है बीमारी?

हां, कुछ मामलों में टेरिजियम सर्जरी के बाद दोबारा उभर सकता है। यही वजह है कि इलाज के बाद भी आंखों की नियमित जांच और सावधानी बेहद जरूरी है। डॉक्टर आमतौर पर साल में एक बार आंखों की जांच कराने की सलाह देते हैं।

टेरिजियम से बचाव के असरदार तरीके

  • बाहर निकलते समय UVA और UVB प्रोटेक्शन वाले सनग्लास पहनें
  • धूप में हैट या कैप का इस्तेमाल करें
  • आंखों को धूल और हवा से बचाएं
  • स्क्रीन टाइम के दौरान आंखों को आराम दें
  • आंखों में ड्राइनेस महसूस हो तो आर्टिफिशियल टियर्स का इस्तेमाल करें

समय पर पहचान और सही देखभाल से टेरिजियम को बढ़ने से रोका जा सकता है। आंखों की छोटी परेशानी को भी हल्के में न लें और नियमित नेत्र जांच को आदत बनाएं।

ये भी पढ़ें-  भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन ट्रायल के लिए तैयार, चीन-जर्मनी से भी ज्यादा ताकतवर तकनीक, जानिए हर डिटेल 

 

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