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Lokhitkranti > उत्तराखंड > Ghasiyari Welfare Scheme: घसियारी कल्याण योजना फिर से शुरू, पर्वतीय महिलाओं को मिलेगा चारे का लाभ
उत्तराखंड

Ghasiyari Welfare Scheme: घसियारी कल्याण योजना फिर से शुरू, पर्वतीय महिलाओं को मिलेगा चारे का लाभ

Lokhit Kranti
Last updated: 2026-01-08 12:09 pm
Lokhit Kranti Published 2026-01-08
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Ghasiyari Welfare Scheme
Ghasiyari Welfare Scheme: घसियारी कल्याण योजना फिर से शुरू, पर्वतीय महिलाओं को मिलेगा चारे का लाभ
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Ghasiyari Welfare Scheme:  उत्तराखंड सरकार पशुपालकों के हित में विभिन्न योजनाओं को लागू कर रही है, जिनमें Ghasiyari Welfare Scheme  प्रमुख है। यह योजना विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों की महिलाओं को ध्यान में रखकर बनाई गई है। इसका उद्देश्य महिलाओं को पशुओं के चारे के बोझ से मुक्ति दिलाना और उन्हें जंगलों या दूरस्थ क्षेत्रों में घास काटने के लिए नहीं जाना पड़ना सुनिश्चित करना है। Ghasiyari Welfare Scheme के तहत लाभार्थियों को घर पर ही पशुओं के लिए पर्याप्त चारा और साइलेज उपलब्ध कराया जाता है।

Contents
पर्वतीय क्षेत्रों में चारे की समस्या बढ़ीबजट और आपूर्ति में रुकावटेंसहकारिता विभाग का आश्वासनGhasiyari Welfare Scheme का सामाजिक और आर्थिक महत्व

Ghasiyari Welfare Scheme की शुरुआत 2023 में हुई थी। शुरुआत के समय से ही योजना को विभिन्न चुनौतियों का सामना करना पड़ा। बजट में देरी, निजी वेंडरों की आपूर्ति बाधाएं और प्रशासनिक प्रक्रिया में असंगति जैसी समस्याओं ने योजना के सुचारू कार्यान्वयन में बाधा डाली। इन कारणों से पर्वतीय क्षेत्रों के पशुपालकों को समय पर चारा नहीं मिल पा रहा था, जिससे उनकी मुश्किलें बढ़ गई थीं।

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पर्वतीय क्षेत्रों में चारे की समस्या बढ़ी

पर्वतीय इलाकों में चारे की कमी ने पशुपालकों की परेशानियां और बढ़ा दी हैं। वन विभाग द्वारा लगातार यह निर्देश जारी किया जा रहा है कि मवेशियों को जंगल में चरने के लिए न भेजा जाए। इसका मुख्य कारण यह है कि जंगलों में वन्यजीवों की संख्या बढ़ी है और इसके चलते महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को खतरा है। हाल के कुछ समय में महिलाओं पर वन्यजीवों के हमले के कई मामले भी सामने आए हैं। ऐसे में पशुपालक यह तय नहीं कर पा रहे कि अपने पशुओं के लिए सुरक्षित चारे की व्यवस्था कहां से करें।

पशुपालक क्षेत्र के लोग बता रहे हैं कि जंगलों में चारा खोजने की बजाय यदि घर पर ही पर्याप्त चारा उपलब्ध हो, तो उनकी मेहनत और समय दोनों की बचत होगी। साथ ही यह महिलाओं की सुरक्षा के लिए भी जरूरी है, क्योंकि उन्हें दूर-दराज के जंगलों में जोखिम भरी परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।

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बजट और आपूर्ति में रुकावटें

Ghasiyari Welfare Scheme के अंतर्गत चारे और साइलेज की आपूर्ति में रुकावट का मुख्य कारण बजट का समय पर जारी न होना रहा है। Ghasiyari Welfare Scheme के तहत साइलेज वितरण की जिम्मेदारी एक निजी संस्था को दी गई थी, लेकिन लंबे समय तक भुगतान न होने के कारण वेंडर ने चारा आपूर्ति बंद कर दी। इसका सीधा असर पर्वतीय जिलों के पशुपालकों पर पड़ा।

उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में हर महीने लगभग 3 हजार टन साइलेज वितरण किया जाता है। वहीं बड़े पैमाने पर व्यावसायिक पशुपालन करने वाले डेयरी फार्मरों के लिए नई शर्तें लागू की गई हैं। इसके तहत पांच पशुओं तक के पशुपालकों को सब्सिडी के तहत चारा मिलेगा, जबकि निर्धारित सीमा से अधिक पशुओं के लिए उन्हें व्यावसायिक दरों पर चारा लेना होगा।

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सहकारिता विभाग का आश्वासन

सहकारिता विभाग ने स्पष्ट किया है कि अब बजट जारी कर दिया गया है और Ghasiyari Welfare Scheme को फिर से सुचारू किया जा रहा है। डिप्टी रजिस्ट्रार आनंद शुक्ला ने बताया कि भुगतान की देरी के कारण वेंडर ने चारा आपूर्ति रोक दी थी, लेकिन अब सभी व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जा रहा है। विभाग का दावा है कि जल्द ही पर्वतीय क्षेत्रों के पशुपालकों को चारा नियमित रूप से उपलब्ध होगा।

Ghasiyari Welfare Scheme के अलावा विभाग यह सुनिश्चित कर रहा है कि चारा वितरण में किसी भी प्रकार की देरी न हो और महिलाओं को आसानी से लाभ मिल सके। इससे न केवल उनके पशुओं का पालन आसान होगा, बल्कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

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Ghasiyari Welfare Scheme का सामाजिक और आर्थिक महत्व

Ghasiyari Welfare Scheme से न केवल पशुपालकों की मेहनत कम होगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा। सुरक्षित और नियमित चारे की उपलब्धता से पशुओं की उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, जिससे डेयरी फार्मिंग और पशुपालन क्षेत्र में स्थिरता आएगी। पर्वतीय महिलाओं के लिए यह योजना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उन्हें जोखिम भरे जंगलों में जाने से बचाती है और उनके स्वास्थ्य व सुरक्षा को प्राथमिकता देती है।

Ghasiyari Welfare Scheme के सुचारू होने से उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पशुपालकों की जिंदगी में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद की जा रही है। राज्य सरकार के अनुसार, आने वाले महीनों में योजना के तहत चारा वितरण नियमित किया जाएगा और पशुपालकों को स्थायी राहत मिलेगी।

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