Lung Cancer Symtoms: हर साल 1 अगस्त को पुरे विश्व में फेफड़ा कैंसर दिवस (Lung Cancer Day) मनाया जाता है.फेफड़े हमारे शरीर के महतवपूर्ण अंगो में से एक है। फेफड़ों का स्वास्थ्य अच्छा है या बूरा ये सीधे हमारे शरीर के ऑक्सीजन लेवल सहित पुरे शरीर पर असर डालता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि फेफड़े स्वस्थ हैं, तो व्यक्ति को सामान्य तौर पर सांस लेने में किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होती है। लेकिन अगर ये हल्के से भी कमजोर हो जाएं तो सांस लेने में दिक्क्त, भारीपन और बार-बार संक्रमण जैसी मुश्किलें सामने आने लगती हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का ये कहना है कि लंग कैंसर का स्टेज 1 सबसे पहला व शुरुआती चरण होता है, जहां रोग के लक्षण अक्सर बेहद हल्के या सामान्य होते हैं। यही कारण है कि बहुत बार यह बीमारी शुरुआती दौर में बिलकुल भी पकड़ में नहीं आती है, लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं जिसकी वजह से इलाज करने में देरी हो जाती है और ये आगे चलकर दिक्क्त देती है।
लंग कैंसर के शुरूआती लक्षण (Lung Cancer Symtoms)
मरीजों में अक्सर सूखी खांसी की शिकायत सामने आती है, जो लगातार कई दिनों, हफ्तों, और महीनो तक बनी रहती है। हालांकि कुछ लोग इसे सामान्य एलर्जी या बदलते मौसम का असर मानकर पहले नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन बाद में जब देर हो जाती है तो उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा सीने में कभी-कभी भारीपन, हल्का दर्द या थोड़ा दबाव महसूस आता है जो इस बीमारी के शुरुआती लक्षणों में शामिल हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का यह मानना है कि इन सभी लक्षणों को गैस या फिर कोई मामूली सीने की तकलीफ बिलकुल भी न समझें और तुरंत इसका इलाज करवाएं।

स्वास्थ्य रिपोर्ट्स के मुताबिक, आवाज में बदलाव होना, थोड़ी-थोड़ी देर में सांस का फूलना और बार-बार ब्रोंकाइटिस या निमोनिया हो जाना भी ऐसे संकेत हैं जो फेफड़ों में कैंसर की उपस्थिति की तरफ इशारा करते हैं। कुछ मामलों में तो यह बीमारी वॉइस बॉक्स (स्वर यंत्र) को भी बहुत ज्यादा प्रभावित कर सकती है, जिसकी वजह से व्यक्ति की आवाज भारी या बैठी-बैठी हुई महसूस होने लगती है।

इलाज में देरी न करें (Lung Cancer Symtoms)
स्वास्थ्य रिपोर्ट्स के मुताबिक, आवाज में बदलाव होना, थोड़ी-थोड़ी देर में सांस का फूलना और बार-बार ब्रोंकाइटिस या निमोनिया हो जाना भी ऐसे संकेत हैं जो फेफड़ों में कैंसर की उपस्थिति की तरफ इशारा करते हैं। कुछ मामलों में तो यह बीमारी वॉइस बॉक्स (स्वर यंत्र) को भी बहुत ज्यादा प्रभावित कर सकती है, जिसकी वजह से व्यक्ति की आवाज भारी या बैठी-बैठी हुई महसूस होने लगती है। यदि लंबे समय से ऐसे लक्षण नजर आ रहे हैं, तो देर बिलकुल भी न करें और तुरंत डॉक्टर से इसका इलाज करवाएं।




