JNU News : अब ‘कुलपति’ नहीं, ‘कुलगुरु’ कहलाएंगे वाइस चांसलर, JNU की वर्किंग काउंसिल का ऐतिहासिक फैसला
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) ने एक ऐतिहासिक और अनोखा कदम उठाते हुए अब ‘कुलपति’ शब्द की जगह ‘कुलगुरु’ शब्द को अपनाने का फैसला किया है। विश्वविद्यालय की वर्किंग काउंसिल की बैठक में यह निर्णय लिया गया, जिसे कुलपति शांतिश्री धुलीपुडी पंडित के सुझाव पर स्वीकार किया गया है। इस बदलाव का उद्देश्य प्रशासनिक पदनामों को अधिक जेंडर न्यूट्रल और समावेशी बनाना है। यह पहली बार है जब देश के किसी प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालय ने पदनाम में ऐसा बदलाव करने का साहसिक कदम उठाया है।
JNU News : क्योंं किया गया बदलाव ?
जेएनयू प्रशासन ने साफ किया है कि अब से विश्वविद्यालय में वाइस चांसलर का हिंदी अनुवाद ‘कुलपति’ नहीं, बल्कि ‘कुलगुरु’ होगा। यह शब्दावली अब डिग्री प्रमाण पत्रों, आधिकारिक पत्राचार, विश्वविद्यालय की वेबसाइट और अन्य दस्तावेजों में उपयोग की जाएगी। कुलपति शांतिश्री पंडित का कहना है कि ‘कुलपति’ शब्द ऐतिहासिक रूप से पितृसत्तात्मक प्रणाली से जुड़ा है, जबकि ‘कुलगुरु’ एक अधिक तटस्थ और शिक्षकवत् शब्द है, जो शिक्षा के मूल भाव को बेहतर ढंग से दर्शाता है। उनके अनुसार, “शिक्षा जगत में पदनाम केवल प्रशासनिक नहीं, सांस्कृतिक और वैचारिक पहचान भी होते हैं।”
इस फैसले पर JNU के शैक्षणिक समुदाय में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। जहां कुछ शिक्षकों और छात्रों ने इस पहल को लिंग-संवेदनशीलता की दिशा में जरूरी कदम बताया है, वहीं कुछ लोगों ने इसे प्रतीकात्मक बदलाव तक सीमित माना है। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि यह केवल शब्दों का खेल नहीं, बल्कि एक व्यापक वैचारिक बदलाव की शुरुआत है, जो विश्वविद्यालयों की भाषा, संस्कृति और समावेशिता को लेकर सोच में परिवर्तन लाने का प्रयास है। भविष्य में अन्य विश्वविद्यालयों पर भी इस निर्णय का प्रभाव पड़ सकता है।
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