Wildlife Conservation: मध्य प्रदेश में भारतीय वन सेवा (IFS) के अधिकारियों का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। राज्य सरकार की ओर से जारी तबादला आदेश में कुल 28 आईएफएस अधिकारियों को इधर से उधर किया गया है। इन तबादलों को जंगलों की कटाई, Wildlife Conservation में लापरवाही और टाइगर रिजर्व में लगातार सामने आ रही बाघों व तेंदुओं की मौत की घटनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि सरकार अब वन प्रबंधन को लेकर सख्त रुख अपनाने के मूड में है।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर पर बदलाव
इस फेरबदल में प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर के अधिकारियों की जिम्मेदारियों में भी बदलाव किया गया है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक विभाष कुमार ठाकुर को अनुसंधान एवं विस्तार विभाग की नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं सीधी स्थित संजय टाइगर रिजर्व के संचालक रहे अमित कुमार दुबे को वहां से हटाकर अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (संरक्षण) वन मुख्यालय भोपाल में पदस्थ किया गया है। सूत्रों के अनुसार, संजय टाइगर रिजर्व सहित अन्य संरक्षित क्षेत्रों में वन्यजीवों की मौत और अवैध गतिविधियों की शिकायतों के बाद यह निर्णय लिया गया है।
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कौन अधिकारी कहां हुआ पदस्थ?
जारी आदेश के अनुसार, प्रफुल्लनीरज गुलाबराव फुलझेले को मुख्य वन संरक्षक, मध्य प्रदेश राज्य वन विकास निगम भोपाल में प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया है। इससे पहले वे मध्य प्रदेश राज्य लघु वनोपज संघ भोपाल में कार्यरत थे। मुख्य वन संरक्षक उज्जैन वृत्त मस्तराम बघेल को अब मुख्य वन संरक्षक जबलपुर वृत्त की जिम्मेदारी दी गई है। इसी तरह Wildlife Conservation जबलपुर कमल अरोरा को छिंदवाड़ा वन संरक्षक बनाया गया है, जबकि छिंदवाड़ा की वन संरक्षक मधुव्ही राज को बैतूल भेजा गया है। बैतूल से बासु कन्नोजिया को खंडवा वन संरक्षक की नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।
राज्य वन सेवा के अफसरों के भी तबादले
केवल आईएफएस ही नहीं, बल्कि राज्य वन सेवा के 20 अधिकारियों के भी तबादले किए गए हैं। खासतौर पर नर्मदापुरम में सागौन और साल के पेड़ों की अवैध कटाई का मामला विधानसभा तक पहुंचने के बाद प्रशासन हरकत में आया। जांच के बाद नर्मदापुरम वन मंडलाधिकारी मजयं गुर्जर को उनके पद से हटाकर भोपाल में उप वन संरक्षक, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन प्रमुख कार्यालय में पदस्थ किया गया है। इस कार्रवाई को सरकार की सख्ती के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
Wildlife Conservation की मिली-जुली प्रतिक्रिया
पर्यावरणविद और आरटीआई कार्यकर्ता अजय दुबे का कहना है कि नर्मदापुरम में अवैध कटाई के मामले में जिम्मेदार अधिकारियों को हटाना सही कदम है। हालांकि उन्होंने यह भी चिंता जताई कि कुछ टाइगर रिजर्व में ऐसे अधिकारियों की पदस्थापना की गई है, जिनका Wildlife Conservation का अनुभव सीमित रहा है। उनके मुताबिक, यदि सही और अनुभवी अधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात नहीं किया गया तो संरक्षण के प्रयास कमजोर पड़ सकते हैं।
2025 में बाघों की मौत ने बढ़ाई चिंता
मध्य प्रदेश में वर्ष 2025 के दौरान बाघों की मौत का आंकड़ा बेहद चिंताजनक रहा है। पूरे साल में प्रदेश में कुल 54 बाघों की मौत दर्ज की गई, जो देश में सबसे अधिक मानी जा रही है। इनमें से 8 बाघों की मौत करंट लगने से, 5 की मौत बीमारी या सीजर के कारण और एक बाघ की मौत शिकार में हुई। बांधवगढ़ और कान्हा टाइगर रिजर्व में सबसे ज्यादा बाघों की मौत सामने आई है।
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मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद सख्ती
लगातार हो रही बाघों की मौतों को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी सार्वजनिक रूप से नाराजगी जता चुके हैं। इसके बाद वन मुख्यालय ने प्रदेश के सभी नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व में विशेष अभियान शुरू किया है। बिजली के तार बिछाकर शिकार करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। टाइगर रिजर्व से सटे गांवों में लगातार चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है और जंगलों में गश्त भी बढ़ाई गई है।
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सरकार का संदेश साफ
वन सेवा में हुए इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल को सरकार का स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि अब Wildlife Conservation और वन्यजीव सुरक्षा में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आने वाले समय में इन तबादलों का असर जमीनी स्तर पर कितना दिखता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।



