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उत्तराखंड

Uttarkashi Jal Jeevan Mission: उत्तरकाशी में जल जीवन मिशन की हकीकत, 5 साल बाद भी 51 गांव ‘हर घर नल’ से दूर

Manisha
Last updated: 2026-01-14 9:18 पूर्वाह्न
Manisha Published 2026-01-14
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Uttarkashi Jal Jeevan Mission
Uttarkashi Jal Jeevan Mission: उत्तरकाशी में जल जीवन मिशन की हकीकत, 5 साल बाद भी 51 गांव ‘हर घर नल’ से दूर
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Uttarkashi Jal Jeevan Mission: केंद्र सरकार की बहुप्रचारित और महत्वाकांक्षी Uttarkashi Jal Jeevan Mission  को शुरू हुए पांच साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन सीमांत पर्वतीय जिला उत्तरकाशी में आज भी इस योजना की जमीनी तस्वीर चिंताजनक बनी हुई है। अगस्त 2019 में शुरू हुई इस योजना का लक्ष्य वर्ष 2024 तक ‘हर घर नल, हर घर जल’ सुनिश्चित करना था, लेकिन तय समय सीमा समाप्त होने के बाद भी जिले के 51 गांव ऐसे हैं, जहां नल से शुद्ध पेयजल पहुंचना अब भी सपना बना हुआ है।

Contents
51 गांवों में अब भी नहीं पहुंचा Uttarkashi Jal Jeevan Missionगर्मी और सर्दी दोनों में बढ़ती है परेशानीइन विकासखंडों में Uttarkashi Jal Jeevan Mission अधूरा121 करोड़ से ज्यादा की योजनाएं अटकींवन स्वीकृति बनी सबसे बड़ी बाधाराजनीतिक और सामाजिक दबाव बढ़ाग्रामीणों की एक ही मांग!

51 गांवों में अब भी नहीं पहुंचा Uttarkashi Jal Jeevan Mission

उत्तरकाशी जिले के डुंडा, चिन्यालीसौड़, नौगांव, बड़कोट, पुरोला और मोरी विकासखंड के कुल 51 गांव आज भी पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। इन गांवों में रहने वाले ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पुराने प्राकृतिक जल स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। कई गांवों में लोगों को पानी लाने के लिए पैदल लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिसका सबसे ज्यादा असर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों पर पड़ रहा है।

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गर्मी और सर्दी दोनों में बढ़ती है परेशानी

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार गर्मियों में कई प्राकृतिक स्रोत सूख जाते हैं, जिससे पानी की समस्या और गंभीर हो जाती है। वहीं सर्दियों में पहाड़ी क्षेत्रों में पानी जम जाने से हालात और बिगड़ जाते हैं। कई गांवों में सुबह से शाम तक पानी जुटाने में ही लोगों का समय निकल जाता है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

इन विकासखंडों में Uttarkashi Jal Jeevan Mission अधूरा

डुंडा विकासखंड के हिटाणू, कुमराडू, मंजगांव, ग्योनोटी और खटूखाल गांवों में योजना पूरी नहीं हो पाई है। चिन्यालीसौड़ ब्लॉक के खालसी, चिलोट, जोगत तल्ला और जोगत मल्ला गांव भी अब तक नल से पानी से वंचित हैं। नौगांव ब्लॉक के खांसी पोंटी, कंडारी और देवराना गांवों में भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। बड़कोट तहसील के क्वाडी, सापेटा, कफनोल, धख्याड और पाली गांवों में भी जल जीवन मिशन अधूरा है। इसके अलावा पुरोला ब्लॉक के रामा, सौन्दरी, गुंदियाडगांव और मोरी ब्लॉक के खन्यासी, हलताडी, सुंचनगांव, डाटमीर, डांगनगांव, सिरगा, मसारी, कलाप, सौर, पंव मल्ला, पासा, नानाई, पेटडी, लुदरला, गुराडी, कामरा, देवती, झोटाड़ी, धारा, अदासु, गोकुल, कलीच, बरनाली, मैंजाणी, किरोली, मौंड़ा, चिंवा, बामसू, देवरा और गैंचवान गांव शामिल हैं।

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121 करोड़ से ज्यादा की योजनाएं अटकीं

इन 51 गांवों में Uttarkashi Jal Jeevan Mission  के तहत स्वीकृत योजनाओं की कुल लागत करीब 121 करोड़ 77 लाख रुपये है। हालांकि, अधिकांश योजनाएं वन भूमि से जुड़ी स्वीकृतियों में फंसी हुई हैं। कहीं काम शुरू ही नहीं हो पाया है, तो कहीं 80 से 90 प्रतिशत कार्य पूरा होने के बाद अंतिम चरण में वन भूमि की बाधा आ गई है, जिससे योजनाएं अधर में लटक गई हैं।

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वन स्वीकृति बनी सबसे बड़ी बाधा

उत्तरकाशी जल निगम के अधिशासी अभियंता मधुकांत कोटियाल का कहना है कि जिले में Uttarkashi Jal Jeevan Mission के अधूरे रहने का सबसे बड़ा कारण वन भूमि से संबंधित आपत्तियां हैं। पाइपलाइन बिछाने और अन्य निर्माण कार्यों के लिए वन विभाग की अनुमति जरूरी होती है। संबंधित प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं और स्वीकृति मिलते ही कार्य शुरू या पूरा कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि करीब 26 गांव ऐसे हैं, जहां अभी तक योजना का काम शुरू भी नहीं हो पाया है, जबकि कई गांवों में कार्य आंशिक रूप से पूरा हुआ है।

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राजनीतिक और सामाजिक दबाव बढ़ा

कांग्रेस जिला अध्यक्ष प्रदीप रावत ने कहा कि यदि Uttarkashi Jal Jeevan Mission  के कार्यों में जल्द तेजी नहीं लाई गई, तो ग्रामीणों को और अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने प्रशासन से वन स्वीकृति प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग की है, ताकि लोगों को रोजाना पानी ढोने की मजबूरी से राहत मिल सके।

ग्रामीणों की एक ही मांग!

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की योजनाएं कागजों में पूरी दिख रही हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है। लोगों की मांग है कि प्रशासन और सरकार मिलकर वन स्वीकृति जैसी प्रक्रियाओं को प्राथमिकता दें, ताकि जल जीवन मिशन का असली लाभ पहाड़ के अंतिम गांव तक पहुंच सके।

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