UP Smart Meter Policy: उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। UP Smart Meter Policy के तहत राज्य में पुराने बिजली मीटरों को स्मार्ट प्रीपेड मीटर से बदलने की प्रक्रिया को फिलहाल रोक दिया गया है। यह फैसला तब लिया गया जब प्रदेशभर से स्मार्ट मीटर को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं।
उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल ने सभी डिस्कॉम को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि तकनीकी कमेटी की रिपोर्ट आने तक किसी भी उपभोक्ता के मीटर को बदला नहीं जाएगा। इस निर्णय से लाखों उपभोक्ताओं को तत्काल राहत मिली है, जो पिछले कुछ महीनों से इस मुद्दे को लेकर परेशान थे।
क्यों रोकी गई UP Smart Meter Policy की प्रक्रिया?
UP Smart Meter Policy के तहत राज्य में तेजी से स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे थे। लेकिन कई उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि बिना उनकी अनुमति के पुराने मीटर हटाकर नए मीटर लगाए गए।
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इसके अलावा सबसे बड़ी शिकायत यह थी कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिल में अचानक बढ़ोतरी देखी गई। कई लोगों ने यह भी कहा कि प्रीपेड सिस्टम में बैलेंस खत्म होते ही बिजली सप्लाई तुरंत बंद हो जाती है, जिससे उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ता है।
इन बढ़ती शिकायतों और जनआक्रोश को देखते हुए सरकार को UP Smart Meter Policy पर पुनर्विचार करना पड़ा। यही कारण है कि फिलहाल इस प्रक्रिया को रोक दिया गया है ताकि तकनीकी खामियों की जांच की जा सके।
मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद बनी तकनीकी कमेटी
बढ़ते विरोध को देखते हुए मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने इस मुद्दे पर गंभीरता दिखाई। उन्होंने ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की और स्थिति का जायजा लिया।
इसके बाद 12 अप्रैल को एक उच्चस्तरीय तकनीकी कमेटी का गठन किया गया, जिसका उद्देश्य UP Smart Meter Policy के तहत लगाए गए मीटरों की सटीकता, बिलिंग सिस्टम और उपभोक्ता शिकायतों की जांच करना है।
यह कमेटी अपनी रिपोर्ट में यह तय करेगी कि स्मार्ट मीटर सिस्टम में क्या सुधार किए जाने चाहिए और भविष्य में इसे किस तरह लागू किया जाए।
नए कनेक्शन पर नहीं पड़ेगा असर
हालांकि UP Smart Meter Policy के तहत पुराने मीटर बदलने पर रोक लगाई गई है, लेकिन नए बिजली कनेक्शन जारी रहेंगे। पावर कॉरपोरेशन ने साफ किया है कि नए कनेक्शन केवल स्मार्ट प्रीपेड मीटर के जरिए ही दिए जाएंगे।
इसका मकसद यह है कि सिस्टम की नई तकनीक को पूरी तरह बंद न किया जाए, बल्कि सुधार के साथ आगे बढ़ाया जाए। इससे बिजली विभाग की कार्यप्रणाली भी आधुनिक बनी रहेगी और उपभोक्ताओं को भी बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
अब तक कितने लगे स्मार्ट मीटर?
आंकड़ों के अनुसार, UP Smart Meter Policy के तहत अब तक राज्य में करीब 78 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। इनमें से लगभग 70.50 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटर हैं।
सरकार का लक्ष्य पूरे प्रदेश में स्मार्ट मीटर सिस्टम लागू करना था, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए इस प्रक्रिया की गति धीमी हो गई है। अब आगे की दिशा तकनीकी कमेटी की रिपोर्ट पर निर्भर करेगी।
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उपभोक्ताओं के हित पर सरकार का जोर
पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि UP Smart Meter Policy में किसी भी तरह का निर्णय लेते समय उपभोक्ताओं के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि यदि तकनीकी कमेटी की रिपोर्ट में कोई खामियां सामने आती हैं, तो उन्हें दूर करने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसका मतलब यह है कि सरकार जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाना चाहती।
आगे क्या होगा?
अब सभी की नजर तकनीकी कमेटी की रिपोर्ट पर टिकी हुई है। यह रिपोर्ट तय करेगी कि UP Smart Meter Policy को किस रूप में आगे बढ़ाया जाएगा।
अगर रिपोर्ट में सिस्टम को सही पाया जाता है, तो कुछ सुधारों के साथ इसे फिर से लागू किया जा सकता है। वहीं, अगर बड़ी खामियां सामने आती हैं, तो पूरी नीति में बदलाव भी संभव है।
UP Smart Meter Policy पर लगी यह रोक फिलहाल उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। इससे न केवल लोगों की चिंताएं कम हुई हैं, बल्कि सरकार को भी सिस्टम को बेहतर बनाने का मौका मिला है।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि तकनीकी कमेटी की रिपोर्ट क्या निष्कर्ष देती है और क्या उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर का सपना नए रूप में साकार हो पाता है या नहीं।
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