Sambhal Mosque Demolition: उत्तर प्रदेश के संभल जिले के नखासा क्षेत्र के कसेरुआ गांव में रविवार को लगातार दूसरे दिन भी भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच अवैध अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन का कड़ा पीला पंजा (बुलडोजर) गरजा। राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सरकारी जमीन पर अवैध रूप से निर्मित ‘मज्जिद मुस्तफा कादरी’ को ध्वस्त करने का काम जारी रखा। दूसरे दिन की कार्रवाई के दौरान मस्जिद (Sambhal Mosque Demolition) के मुख्य अग्रभाग (आगे के हिस्से) और कंक्रीट के मजबूत पिलरों को पूरी तरह जमींदोज कर दिया गया है। इसके साथ ही, मस्जिद की पहचान मानी जाने वाली 55 फीट ऊंची विशाल मीनार को भी क्रेन और लोहे की रस्सियों के सहारे खींचकर नीचे गिरा दिया गया। पिछले दो दिनों की ताबड़तोड़ कार्रवाई में अब तक मस्जिद का करीब 70 फीसदी ढांचा पूरी तरह मलबे में तब्दील हो चुका है।
प्रशासनिक अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि शाम ढलने से पहले पूरी अवैध इमारत को जमींदोज कर दिया जाएगा और जमीन को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त करा लिया जाएगा। इस संवेदनशील कार्रवाई को देखते हुए पूरे कसेरुआ गांव और आसपास के इलाकों (Sambhal Mosque Demolition) को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। मौके पर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पांच थानों की भारी पुलिस फोर्स और प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी (PAC) के 60 से अधिक सशस्त्र जवान चप्पे-चप्पे पर मुस्तैद हैं। इस बड़ी कार्रवाई के बीच सोशल मीडिया पर गांव की मुस्लिम महिलाओं और मासूम बच्चियों के फूट-फूटकर रोने और प्रशासन के सामने गुहार लगाने का एक बेहद भावुक वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने इस पूरे मामले को लेकर इलाके में भारी चर्चा और तनाव का माहौल पैदा कर दिया है।
पीड़ित महिलाओं की भावुक गुहार
बुलडोजर की गड़गड़ाहट और ढहती दीवारों को देखकर गांव की महिलाएं खुद को रोक नहीं पाईं और उन्होंने रोते-बिलखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों के सामने हाथ जोड़कर कार्रवाई रोकने की मिन्नतें कीं। वायरल वीडियो में एक स्थानीय महिला बेहद लाचार (Sambhal Mosque Demolition) और भावुक नजर आ रही है। महिला ने हाथ जोड़कर रोते हुए कहा- ‘हमारे गांव में एक ही मस्जिद है। हम हाथ जोड़कर निवेदन करते हैं कि हमारी कोई गलती नहीं है। हमें न मंदिर से कोई आपत्ति है, न ही किसी अन्य धार्मिक स्थल से। हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं। बस यही प्रार्थना है कि हमारी मस्जिद को ऐसे ही रहने दिया जाए। इसे न तोड़ा जाए। हम हाथ जोड़कर माफी मांगते हैं।’
कब्रिस्तान की 120 वर्गमीटर सरकारी जमीन पर बनी थी मस्जिद
प्रशासनिक रिकॉर्ड और राजस्व विभाग की जांच के मुताबिक, यह पूरा विवाद भूमि के अवैध कब्जे से जुड़ा हुआ है। मज्जिद मुस्तफा कादरी का निर्माण नखासा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कसेरुआ गांव में सरकारी कब्रिस्तान की सुरक्षित भूमि (Sambhal Mosque Demolition) पर किया गया था। यह मामला लंबे समय से तहसीलदार न्यायालय में विचाराधीन था।तहसीलदार कोर्ट द्वारा मामले की गहन सुनवाई और दस्तावेजों की जांच के बाद इस निर्माण को पूरी तरह अवैध घोषित किया गया और इसे हटाने का अंतिम आदेश जारी किया गया। इसी अदालती आदेश के अनुपालन में प्रशासन करीब 120 वर्गमीटर सरकारी जमीन को भू-माफियाओं और अवैध कब्जे से मुक्त कराने के लिए यह बड़ी कार्रवाई कर रहा है।
पहली मंजिल से मिले ‘आई लव मोहम्मद’ के पोस्टर
रविवार को जब ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अपने अंतिम चरण में थी, तब स्थिति का जायजा लेने और सुरक्षा व्यवस्था को परखने के लिए संभल के जिलाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) केके बिश्नोई भी भारी लाव-लश्कर (Sambhal Mosque Demolition) के साथ मौके पर पहुंचे। सर्च ऑपरेशन और ध्वस्तीकरण के दौरान मस्जिद की पहली मंजिल के कमरों से हरे रंग के धार्मिक झंडे और उन पर ‘आई लव मोहम्मद’ लिखे हुए कई पोस्टर और बैनर बरामद हुए। इन पोस्टरों के मिलने के बाद पुलिस प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है।
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पोस्टर छापने वालों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई
धार्मिक प्रतीकों और पोस्टरों की बरामदगी पर संभल के पुलिस अधीक्षक (SP) केके बिश्नोई ने कड़ा रुख अपनाते हुए असामाजिक तत्वों को कड़ी चेतावनी जारी की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संवेदनशील मामले की आड़ में किसी को भी माहौल (Sambhal Mosque Demolition) बिगाड़ने की इजाजत नहीं दी जाएगी। एसपी केके बिश्नोई ने सख्त लहजे में कहा- ‘ऐसे पोस्टर छपवाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।’
पुलिस प्रशासन अब स्थानीय (Sambhal Mosque Demolition) प्रिंटिंग प्रेसों और इन पोस्टरों को दीवार पर लगाने वाले सिंडिकेट की पहचान करने के लिए खुफिया तंत्र और स्थानीय मुखबिरों की मदद ले रहा है, ताकि क्षेत्र में सांप्रदायिक सौहार्द को पूरी तरह अक्षुण्ण रखा जा सके।
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