Natural Farming Workshop Ghaziabad: गाजियाबाद में आयोजित Natural Farming Workshop Ghaziabad ने किसानों को खेती के नए और टिकाऊ मॉडल से जोड़ने का बड़ा संदेश दिया है। केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में 500 से अधिक किसानों ने भाग लिया। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने किसानों से प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाने की अपील करते हुए कहा कि यही भविष्य की खेती है, जो कम लागत में अधिक लाभ देने में सक्षम है।
Natural Farming Workshop Ghaziabad में किसानों को मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण
विकास भवन परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में किसानों को केवल भाषण ही नहीं सुनाए गए, बल्कि प्राकृतिक खेती की तकनीकों का लाइव प्रदर्शन भी कराया गया। कृषि वैज्ञानिकों ने जीवामृत और बीजामृत तैयार करने की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। किसानों को बताया गया कि किस प्रकार बिना अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों के उपयोग के भी बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
कार्यक्रम में मौजूद विशेषज्ञों ने कहा कि प्राकृतिक खेती मिट्टी की उर्वरता को लंबे समय तक बनाए रखने का सबसे प्रभावी माध्यम है। यही कारण है कि Natural Farming Workshop Ghaziabad किसानों के लिए सीखने का महत्वपूर्ण मंच बनकर सामने आया।
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ब्रजेश पाठक ने किसानों से की बड़ी अपील
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अपने संबोधन में कहा कि खेती की बढ़ती लागत किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। यदि किसान प्राकृतिक और जैविक खेती को अपनाते हैं तो खाद, कीटनाशक और अन्य इनपुट पर होने वाला खर्च काफी हद तक कम हो सकता है।
उन्होंने किसानों से “खेत बचाओ अभियान” और “ग्रो सेफ फूड 2.0” अभियान से जुड़ने का भी आह्वान किया। उनका कहना था कि सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उत्पादन न केवल किसानों की आय बढ़ाएगा बल्कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की भी रक्षा करेगा।
कृषि वैज्ञानिकों ने बताए प्राकृतिक खेती के फायदे
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने प्राकृतिक खेती के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है, जबकि प्राकृतिक खेती मिट्टी को पुनर्जीवित करने में मदद करती है।
Natural Farming Workshop Ghaziabad के दौरान जल संरक्षण, जैविक कीटनाशकों के उपयोग और कम लागत में अधिक उत्पादन जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई। किसानों ने विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त किया।
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किसानों को मिला बाजरा बीज मिनीकिट का लाभ
कार्यक्रम के दौरान सरकार की ओर से किसानों को मिलेट्स उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बाजरा बीज की निःशुल्क मिनीकिट वितरित की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि मोटे अनाज न केवल पोषण के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं बल्कि कम पानी में भी बेहतर उत्पादन देते हैं।
इस पहल से किसानों को नई फसलों की ओर आकर्षित करने और उनकी आय बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। Natural Farming Workshop Ghaziabad में इस वितरण कार्यक्रम को किसानों ने काफी सराहा।
किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
गाजियाबाद में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक कार्यशाला नहीं, बल्कि कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। प्राकृतिक खेती, जैविक तकनीकों और आधुनिक कृषि नवाचारों की जानकारी देकर किसानों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अधिक से अधिक किसान प्राकृतिक खेती अपनाते हैं तो उत्पादन लागत घटेगी, मिट्टी की गुणवत्ता सुधरेगी और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यही संदेश Natural Farming Workshop Ghaziabad के माध्यम से पूरे क्षेत्र के किसानों तक पहुंचाया गया है।
भविष्य की खेती का मॉडल बन रही प्राकृतिक कृषि
गाजियाबाद में आयोजित Natural Farming Workshop Ghaziabad ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्राकृतिक खेती केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि भविष्य की आवश्यकता है। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक की अपील, वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन और किसानों की सक्रिय भागीदारी इस अभियान को नई गति देने वाली है। आने वाले समय में ऐसी पहलें किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
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