Mohan Bhagwat : RSS चीफ मोहन भागवत ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि भारत के पास अपनी ‘प्राण शक्ति’ है, लेकिन 500 साल के ‘संस्कार’ उनकी चेतना में गहराई से समाहित होने के कारण यह कई लोगों को दिखाई नहीं देती है। दिल्ली विश्वविद्यालय के परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि यह भारत की ‘प्राण शक्ति’ (जीवन शक्ति) है, जो दुनिया के किसी भी हिस्से में कोई संकट आने पर उसे मदद के लिए दौड़ने पर मजबूर कर देती है। बिना इस बात पर विचार किए कि देश किस संकट का सामना कर रहा है। स्थिति चाहे कोई भी हो चाहे वो शत्रुतापूर्ण हो या मैत्रीपूर्ण रहे।
Mohan Bhagwat : भारत में भी एक ‘प्राण शक्ति’
RSS चीफ ने कहा कि भारत में भी एक ‘प्राण शक्ति’ है, जो हमारी आंखों के सामने है लेकिन दिखाई नहीं देती क्योंकि 500 साल का ‘संस्कार’ हमारे अंदर गहराई से समाया हुआ है। अयोध्या में हुए राम मंदिर प्रतिष्ठापन के परोक्ष संदर्भ में कहा कि ”भारत की ‘प्राण शक्ति’ आम आदमी और छोटी-छोटी चीजों में दिखाई देती है। यह आश्चर्यजनक रूप से 22 जनवरी को दिखाई दी।”
Mohan Bhagwat : जब RSS चीफ ने पूछा था…
दरअसल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने साल 2022 में कहा था कि ज्ञानवापी विवाद में आस्था के कुछ मुद्दे शामिल हैं और इस पर अदालत का फैसला सभी को स्वीकार करना चाहिए, लेकिन हर मस्जिद में ‘शिवलिंग’ खोजने और हर दिन एक नया विवाद शुरू करने की कोई जरूरत नहीं है। ये बयान उन्होंने नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तृतीय वर्ष के अधिकारी प्रशिक्षण शिविर के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कही थी।
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