उत्तर प्रदेश के बरेली के आंवला लोकसभा क्षेत्र से सांसद नीरज मौर्य ने संसद में KCC Loan से जुड़ी उन समस्याओं को प्रमुखता से उठाया, जिनका सामना उत्तर प्रदेश के हजारों छोटे और सीमांत किसान कर रहे हैं। लोकसभा में उन्होंने वित्त मंत्रालय से सवाल किया कि किसानों को कम ब्याज दर पर मिलने वाले KCC Loan के लिए कई बैंकों द्वारा अतिरिक्त शर्तें लगाई जा रही हैं, जिससे पात्र किसानों को भी लाभ लेने में कठिनाई हो रही है।
सांसद ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में किसान Loan प्राप्त करने के दौरान CIBIL स्कोर, नो-ड्यूज सर्टिफिकेट, ऋण नवीनीकरण में देरी, किसान ऋण पोर्टल की तकनीकी दिक्कतों और फसल ऋण के साथ जबरन बीमा पॉलिसी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा।
KCC Loan पर सरकार ने दी बड़ी राहत
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में लिखित उत्तर देते हुए किसानों को राहत देने वाली कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि KCC Loan के लिए बैंकों द्वारा कुछ शर्तों को अनिवार्य बताना नियमों के अनुरूप नहीं है।
सरकार के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 28 जनवरी 2015 के दिशा-निर्देशों के तहत अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के ऋण के लिए नो-ड्यूज सर्टिफिकेट की मांग नहीं कर सकते। इसका सीधा लाभ KCC Loan लेने वाले किसानों को मिलेगा।
KCC Loan में CIBIL स्कोर अनिवार्य नहीं
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि KCC Loan सहित किसी भी कृषि ऋण के लिए RBI ने न्यूनतम CIBIL स्कोर निर्धारित नहीं किया है। ऋण स्वीकृति का निर्णय संबंधित बैंक की आंतरिक नीति और नियामकीय निर्देशों के आधार पर लिया जाता है।
इस स्पष्टीकरण के बाद उन किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें केवल CIBIL स्कोर के आधार पर KCC Loan देने में आनाकानी की जाती थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला कृषि क्षेत्र के लिए सकारात्मक साबित होगा।
KCC Loan नवीनीकरण और पोर्टल सुधार पर जोर
सरकार ने बताया कि KCC Loan की सीमा की समीक्षा बैंक की नीति और किसान के पुनर्भुगतान रिकॉर्ड के आधार पर की जाती है। उत्तर प्रदेश की स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी (SLBC) ने बैंकों को समय पर नवीनीकरण सुनिश्चित करने के निर्देश भी जारी किए हैं।
वहीं सितंबर 2023 में शुरू किए गए किसान ऋण पोर्टल (KRP) के माध्यम से KCC Loan प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया गया है। पोर्टल आधारित सत्यापन, ब्याज अनुदान और प्रॉम्प्ट रिपेमेंट इंसेंटिव के निपटान में तेजी आई है। इससे किसानों को योजनाओं का लाभ समय पर मिलने की संभावना बढ़ी है।
KCC Loan के साथ जबरन बीमा पर सख्त रुख
लोकसभा में सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि KCC Loan के साथ किसी भी प्रकार के वित्तीय उत्पाद या बीमा पॉलिसी की अनिवार्य बंडलिंग नहीं की जा सकती। RBI के नए दिशा-निर्देश 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे, जिनके तहत यदि किसी बैंक द्वारा गलत तरीके से बीमा बेचा जाना साबित होता है तो उसे ग्राहक को पूरी राशि वापस करनी होगी और नुकसान की भरपाई भी करनी पड़ेगी।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि KCC Loan को लेकर सरकार का यह स्पष्ट रुख किसानों के हित में बड़ा कदम है। इससे बैंकों की मनमानी पर अंकुश लगेगा और छोटे किसानों को कम ब्याज दर पर ऋण प्राप्त करने में आसानी होगी। आने वाले समय में इन निर्देशों का प्रभाव जमीनी स्तर पर दिखाई देने की उम्मीद है, जिससे कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी और किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकेगी।
बरेली | रिपोर्ट: सुमित श्रीवास्तव
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