Ghaziabad Police Case: गाजियाबाद से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। दो मासूम बच्चों की मौत, एक सुसाइड नोट, और उसके बाद पुलिस की जांच लेकिन सवाल अब भी जिंदा हैं। बच्चों ने अपने सुसाइड नोट में जो लिखा, वह किसी भी संवेदनशील इंसान को अंदर तक हिला सकता है।
Ghaziabad Police Case: सुसाइड नोट में लिखी गई दिल दहला देने वाली बात
बच्चों द्वारा छोड़े गए सुसाइड नोट में साफ शब्दों में लिखा गया था, ‘मार खाने से अच्छा है हम मर जाएं।’ यह एक ऐसा वाक्य है जो सीधे यह सवाल उठाता है कि आखिर इन बच्चों की मानसिक स्थिति कैसी थी और वे किस दबाव में जी रहे थे।
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Ghaziabad Police Case: पोस्टमार्टम रिपोर्ट क्या कहती है?
पुलिस द्वारा साझा की गई पीएम (पोस्टमार्टम) रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों के शरीर पर मारपीट के कोई बाहरी निशान नहीं पाए गए। मौत का कारण अत्यधिक खून बहना बताया गया। खून बहना गिरने की वजह से हुआ, ऐसा रिपोर्ट में दर्ज है। इस रिपोर्ट के बाद मामला और भी पेचीदा हो जाता है, क्योंकि सुसाइड नोट और मेडिकल रिपोर्ट के बीच एक स्पष्ट विरोधाभास नजर आता है।
Ghaziabad Police Case: पिता द्वारा फोन बंद करने का मामला
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि बच्चों के पिता ने कुछ समय के लिए अपने फोन बंद कर दिए थे। जब बच्चों ने उनकी बात नहीं मानी, तो कथित तौर पर पिता ने कहा, ‘अगर नहीं मानोगे तो शादी कर देंगे।’ यह बयान बच्चों पर बनाए गए मानसिक दबाव की ओर इशारा करता है, जो किसी भी नाबालिग के लिए बेहद भयावह हो सकता है।
Ghaziabad Police Case: सात महीने तक दो मोबाइल फोन
पुलिस के अनुसार, बच्चों के पास लगभग 7 महीने तक दो मोबाइल फोन थे। दोनों मोबाइल फोन बेचे जा चुके हैं।वोदूसरा फोन करीब 15 दिन पहले बेचा गया था। फिलहाल पुलिस का कहना है कि दोनों मोबाइल फोन को रिकवर किया जाना बाकी है, क्योंकि उनमें कई अहम डिजिटल सबूत हो सकते हैं।
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Ghaziabad Police Case: फॉरेंसिक जांच के घेरे में मोबाइल
एक मोबाइल फोन जो कमरे से बरामद हुआ है, उसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। इस फोन से कॉल रिकॉर्ड, मैसेज, चैट और अन्य डिजिटल डेटा मिलने की उम्मीद है, जिससे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है।
Ghaziabad Police Case: परिवारिक पृष्ठभूमि और दूसरी शादी
पुलिस के मुताबिक, बच्चों के पिता ने बताया कि उनकी दूसरी पत्नी से तीन बेटियां हैं। इनमें से एक बेटी का नाम देवाशी उर्फ देवू है, जिसकी उम्र 3 से 4 साल बताई गई है। यह पारिवारिक संरचना भी जांच का एक अहम पहलू बन चुकी है, क्योंकि कई मामलों में घरेलू माहौल बच्चों की मानसिक स्थिति पर गहरा असर डालता है।
Ghaziabad Police Case: क्या यह आत्महत्या थी या मजबूरी?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि, क्या बच्चों ने सच में आत्महत्या की? या फिर वे ऐसे हालात में फंस चुके थे जहां उन्हें कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था? सुसाइड नोट में लिखा गया वाक्य इस बात की ओर इशारा करता है कि बच्चे खुद को लगातार हिंसा या डर के माहौल में महसूस कर रहे थे।
Ghaziabad Police Case: पुलिस जांच अभी जारी
गाजियाबाद पुलिस का कहना है कि, सभी पहलुओं से जांच की जा रही है। मोबाइल रिकवरी और फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद तस्वीर और साफ होगी। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले डिजिटल और मेडिकल सबूतों का मिलान किया जाएगा।
Ghaziabad Police Case: समाज के लिए बड़ा सवाल
यह मामला सिर्फ एक पुलिस केस नहीं है, बल्कि यह सवाल खड़ा करता है कि, क्या हम बच्चों की मानसिक स्थिति को गंभीरता से लेते हैं? क्या पारिवारिक दबाव बच्चों को अंदर ही अंदर तोड़ रहा है? जब बच्चे यह लिखने को मजबूर हो जाएं कि ‘मार खाने से अच्छा है मर जाना’, तो यह पूरे समाज के लिए चेतावनी है।
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