Gas Crisis Impact on Agra Industry: वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और अमेरिका-इजराइल-ईरान के बीच जारी संघर्ष का असर अब भारत के स्थानीय उद्योगों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। Gas Crisis Impact on Agra Industry के कारण ताज नगरी आगरा और फिरोजाबाद के सैकड़ों उद्योग गंभीर संकट से गुजर रहे हैं। खासतौर पर Taj Trapezium Zone (TTZ) में संचालित इकाइयां गैस आपूर्ति में कटौती के चलते उत्पादन ठप होने की कगार पर पहुंच गई हैं।
TTZ क्षेत्र में उद्योगों पर दोहरी मार
आगरा का TTZ क्षेत्र करीब 10,400 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है, जहां पर्यावरण संरक्षण के तहत कोयले और लकड़ी जैसे पारंपरिक ईंधनों के उपयोग पर प्रतिबंध है। यह प्रतिबंध Taj Mahal की सुरक्षा के लिए लागू किया गया था।
इस कारण यहां के उद्योग पूरी तरह PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) पर निर्भर हैं। लेकिन मौजूदा हालात में गैस की कमी ने Gas Crisis Impact on Agra Industry को और गंभीर बना दिया है। आगरा और फिरोजाबाद की करीब 350 से अधिक औद्योगिक इकाइयां इस संकट से सीधे प्रभावित हुई हैं।
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पेठा उद्योग पर सबसे बड़ा असर
आगरा का मशहूर पेठा उद्योग भी इस गैस संकट की चपेट में है। शहर में 500 से अधिक छोटी-बड़ी पेठा इकाइयां संचालित होती हैं, लेकिन अब इनमें से कई इकाइयों की भट्ठियां ठंडी पड़ चुकी हैं।
नूरी दरवाजा क्षेत्र में स्थित 50 से अधिक पेठा इकाइयां गैस की अनुपलब्धता के कारण बंद हो चुकी हैं। ये इकाइयां फिलहाल व्यावसायिक सिलेंडरों पर निर्भर हैं, लेकिन गैस संकट के चलते उनकी आपूर्ति भी प्रभावित हुई है।
उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि लंबे समय से PNG आपूर्ति की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक इस पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे Gas Crisis Impact on Agra Industry का असर और गहरा हो गया है।
कच्चे माल की खपत में भारी गिरावट
गैस संकट का असर केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव सप्लाई चेन पर भी पड़ रहा है। पेठा बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे पेठा की खपत में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
जहां पहले रोजाना 50 क्विंटल तक कच्चा पेठा बिकता था, वहीं अब यह घटकर 5-10 क्विंटल रह गया है। शहर की 20 से अधिक आढ़तों में कच्चा माल पड़ा-पड़ा खराब हो रहा है।
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इस स्थिति ने किसानों और व्यापारियों दोनों को आर्थिक नुकसान में डाल दिया है, जिससे Gas Crisis Impact on Agra Industry का दायरा और बढ़ गया है।
किसानों और मजदूरों पर भी असर
गैस संकट का सबसे बड़ा असर किसानों और मजदूरों पर देखने को मिल रहा है। मैनपुरी और आसपास के इलाकों से आने वाले किसान अब अपने उत्पाद का सही मूल्य नहीं पा रहे हैं।
पहले जहां कच्चे पेठा का दाम 15-20 रुपये प्रति किलो तक मिलता था, अब वह घटकर 5 रुपये प्रति किलो रह गया है। इससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। दूसरी ओर, उत्पादन ठप होने से हजारों मजदूर बेरोजगार हो गए हैं। काम की कमी के चलते कई परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
कांच और अन्य उद्योग भी प्रभावित
आगरा के साथ-साथ फिरोजाबाद का कांच उद्योग भी इस गैस संकट से अछूता नहीं है। कांच, प्लास्टिक, पैकेजिंग, ब्रश, बोतल और अन्य छोटे उद्योगों में उत्पादन घट गया है।
इन उद्योगों के लिए रोजाना बड़ी मात्रा में गैस की आवश्यकता होती है, लेकिन आपूर्ति में कटौती के चलते उत्पादन लागत बढ़ गई है और कामकाज प्रभावित हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही गैस आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो Gas Crisis Impact on Agra Industry और भी गंभीर रूप ले सकता है।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का असर
TTZ क्षेत्र में उद्योगों पर लागू नियमों की जड़ 1996 में Supreme Court of India के उस आदेश में है, जिसमें प्रदूषण नियंत्रण के लिए सख्त कदम उठाने को कहा गया था।
इन नियमों के चलते उद्योग पारंपरिक ईंधन का उपयोग नहीं कर सकते, जिससे वे पूरी तरह गैस आपूर्ति पर निर्भर हैं। मौजूदा संकट में यही निर्भरता उनकी सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।
समाधान की उम्मीद
उद्योग संगठनों ने GAIL India से मांग की है कि जल्द से जल्द गैस आपूर्ति बहाल की जाए और नूरी दरवाजा जैसे क्षेत्रों में PNG कनेक्शन उपलब्ध कराया जाए। सरकार से भी इस दिशा में ठोस कदम उठाने की अपील की जा रही है, ताकि उद्योगों को राहत मिल सके।
आगे क्या?
मौजूदा हालात को देखते हुए यह साफ है कि Gas Crisis Impact on Agra Industry केवल एक अस्थायी समस्या नहीं, बल्कि एक बड़ी आर्थिक चुनौती बनती जा रही है। अगर समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो इसका असर न केवल स्थानीय उद्योगों, बल्कि रोजगार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर रूप से पड़ेगा।
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