UPI global expansion: डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भारत ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली है। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिए वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक भारतीयों ने ₹230 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड लेनदेन (UPI global expansion) कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। सरकार ने मंगलवार को संसद में यह जानकारी देते हुए बताया कि UPI न केवल देश के भीतर तेज़ी से बढ़ रहा है, बल्कि अब भारत से बाहर भी 8 देशों में करेंसी कन्वर्ज़न के साथ सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया जा रहा है।
संसद में सरकार ने साझा किए आंकड़े
राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक सवालों का जवाब देते हुए वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि चालू वित्त वर्ष 2025-26 में दिसंबर तक UPI के माध्यम से कुल लेनदेन मूल्य ₹230 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान को लेकर आम जनता का भरोसा लगातार बढ़ रहा है, जिसका सीधा प्रमाण UPI ट्रांजैक्शन में यह अभूतपूर्व वृद्धि है।
मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2022-23 में जहां UPI ट्रांजैक्शन का कुल मूल्य ₹139 लाख करोड़ था, वहीं महज कुछ वर्षों में यह आंकड़ा 230 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है। यह बढ़ोतरी भारत में डिजिटल इकोनॉमी की मजबूती और टेक्नोलॉजी को तेजी से अपनाने की क्षमता को दर्शाती है।
भारत से बाहर भी तेजी से फैल रहा UPI
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि UPI अब केवल भारत तक सीमित नहीं है। करेंसी कन्वर्ज़न की सुविधा के साथ इसे आठ देशों में लागू किया जा चुका है, जहां स्थानीय कानूनों और नियमों का पूरी तरह पालन किया जा रहा है। इससे विदेश यात्रा (UPI global expansion) करने वाले भारतीयों और अंतरराष्ट्रीय लेनदेन करने वाले उपभोक्ताओं को बड़ी सुविधा मिल रही है। इससे पहले संसद में दिए गए एक लिखित उत्तर में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जानकारी दी थी कि वर्तमान में UPI भूटान, फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, कतर, सिंगापुर, श्रीलंका और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
सरकार, RBI और NPCI की साझा पहल
वित्त राज्य मंत्री ने बताया कि UPI के अंतरराष्ट्रीय (UPI global expansion) विस्तार के लिए भारत सरकार, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और NPCI इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (NIPL) मिलकर लगातार प्रयास कर रहे हैं। इन प्रयासों में साझेदार देशों की फास्ट पेमेंट सिस्टम्स के साथ UPI को जोड़ना शामिल है, ताकि सीमा-पार व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) रेमिटेंस और यात्रा आधारित व्यक्ति-से-व्यापारी (P2M) भुगतान को आसान बनाया जा सके। इस पहल से न केवल भारतीय प्रवासियों को फायदा मिल रहा है, बल्कि विदेशी नागरिकों के बीच भी UPI की स्वीकार्यता बढ़ रही है।
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दुनिया की सबसे बड़ी रिटेल फास्ट-पेमेंट प्रणाली
UPI की वैश्विक सफलता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता मिल चुकी है। मंत्री ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की जून 2025 की रिपोर्ट ‘Growing Retail Digital Payments: The Value of Interoperability’ में UPI को लेनदेन के लिहाज से दुनिया की सबसे बड़ी रिटेल फास्ट-पेमेंट प्रणाली के रूप में स्वीकार किया गया है। इसके अलावा, ACI Worldwide की 2024 रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक रियल-टाइम रिटेल पेमेंट्स में लगभग 49 प्रतिशत हिस्सेदारी UPI की है, जो इसकी तकनीकी मजबूती और वैश्विक प्रभाव को दर्शाती है।
डिजिटल इंडिया की मजबूत पहचान
विशेषज्ञों का मानना है कि UPI की यह सफलता डिजिटल इंडिया अभियान, मजबूत नियामक ढांचे और आम नागरिकों की डिजिटल साक्षरता का परिणाम है। UPI ने न केवल कैशलेस इकोनॉमी (UPI global expansion) को बढ़ावा दिया है, बल्कि छोटे व्यापारियों, स्टार्टअप्स और आम उपभोक्ताओं को भी सशक्त बनाया है। UPI की बढ़ती वैश्विक मौजूदगी भारत को डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में विश्व गुरु के रूप में स्थापित कर रही है और आने वाले वर्षों में इसके और अधिक देशों में विस्तार की संभावनाएं भी प्रबल हैं।क-अनुकूल फॉर्मेट में भी तैयार कर सकता हूं।
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