Women’s Day : 8 मार्च का दिन पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन महिलाओं की उपलब्धियों और उनके योगदान को सराहने का है। आज की दुनिया में महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं, और खेल की दुनिया में भी उनकी छाप हर मोर्चे पर देखी जा सकती है। इसी कड़ी में एक भारतीय महिला खिलाड़ी का प्रदर्शन विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जो न केवल महिला क्रिकेट बल्कि पूरे भारतीय क्रिकेट पर अपनी छाप छोड़ चुकी हैं। ये खिलाड़ी हैं भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर।
Women’s Day : आज है हरमनप्रीत कौर का जन्मदिन
आपको बता दें कि हरमनप्रीत कौर ने विश्व क्रिकेट में अपना और भारतीय क्रिकेट का नाम रोशन करते हुए इसे नई ऊंचाईयों कर पहुंचाया है। जो अपने लंबे करियर में भारतीय महिलाओं के लिए एक प्रेरणा बनकर उभरी हैं। ऐसे में महिला दिवस के दिन ऐसी खिलाड़ी की चर्चा करने से बेहतर क्या हो सकता है। खास तौर पर तब, जबकि सिर्फ महिला दिवस ही नहीं, बल्कि 8 मार्च का दिन हरमनप्रीत कौर के लिए और भी खास है क्योंकि ये उनका जन्मदिन भी है। जो अब 36 साल की हो गई है। इस विस्फोटक बल्लेबाज ने एक ऐसी पारी खेली है, जो उनसे पहले और उनके बाद भी आज तक कोई अन्य बल्लेबाज नहीं खेल पाया है। फिर वो चाहें वो वनडे क्रिकेट में सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले विराट कोहली और सचिन तेंदुलकर जैसे महानतम बल्लेबाज हों या फिर रोहित शर्मा, एमएस धोनी, सौरव गांगुली जैसे दिग्गज कप्तान-बल्लेबाज।
दरअसल, हरमनप्रीत कौर की जिस पारी की बात हम आज कर रहे है वह आज से लगभग 8 साल पहले आई थी। ये पारी खेली गई थी महिला वर्ल्ड कप 2017 के सेमीफाइनल में, वो भी उस वक्त की डिफेंडिंग चैंपियन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ। भारत ने सिर्फ 35 रन पर 2 विकेट गंवा दिए थे, जब हरमनप्रीत ने क्रीज पर कदम रखा। जिसके बाद उन्होंने छक्के-चौकों की अंधाधुंध बारिश कर दी और रिकॉर्ड 171 रन (नॉट आउट) बना दिए। भारतीय टीम ने 281 रन बनाए थे, जिसमें 171 कौर के ही थे। भारत ने वो मैच जीत लिया था।
Women’s Day : मील का पत्थर साबित हुई ये पारी
हरमनप्रीत कौर ने अपनी इस एक पारी में वह कारनामा किया था, जो भारतीय क्रिकेट के इतिहास में पुरुष और महिला दोनों के लिए ही अद्वितीय था। उनकी 171 रन की पारी आज भी भारतीय क्रिकेट के सबसे यादगार लम्हों में शामिल है। यह पारी न केवल महिला क्रिकेट के लिए बल्कि भारतीय क्रिकेट के लिए भी एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुई थी।



