Sandeep Pathak FIR Row: राजनीतिक गलियारों में इन दिनों राज्यसभा सांसद संदीप पाठक को लेकर चर्चाएं तेज हैं। पंजाब में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की खबरों के बीच अब उन्होंने खुद सामने आकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें अब तक किसी भी एफआईआर (Sandeep Pathak FIR Row) की आधिकारिक या अनौपचारिक जानकारी नहीं मिली है।
‘मुझे FIR की कोई जानकारी नहीं’
संदीप पाठक (Sandeep Pathak FIR Row) ने कहा कि टेलीविजन चैनलों पर उनके खिलाफ दो एफआईआर दर्ज होने की खबरें चल रही हैं, लेकिन उन्हें अभी तक इस बारे में कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि वे पूरे दिन इस उम्मीद में रहे कि उन्हें एफआईआर की कॉपी मिले ताकि वे तथ्यों के आधार पर प्रतिक्रिया दे सकें। उनका कहना था कि बिना आधिकारिक दस्तावेज के किसी भी आरोप पर टिप्पणी करना उचित नहीं है। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि संभव है इस पूरे मामले में सरकारी तंत्र का दुरुपयोग किया जा रहा हो, हालांकि उन्होंने इस पर कोई सीधा आरोप नहीं लगाया।
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AAP छोड़ने के फैसले पर दी सफाई
हाल ही में आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए संदीप पाठक (Sandeep Pathak FIR Row) ने अपने इस फैसले को लेकर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि उनका यह निर्णय किसी व्यक्तिगत कारण से नहीं बल्कि लंबे समय से चले आ रहे वैचारिक मतभेदों के कारण लिया गया है। उन्होंने बताया कि पार्टी के भीतर कार्यशैली और सिद्धांतों को लेकर उनका दृष्टिकोण अलग था, जिसके चलते उन्होंने अलग रास्ता चुनना उचित समझा। उनके अनुसार, राजनीति में बने रहने के लिए केवल पद या सफलता महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि सिद्धांतों पर टिके रहना ज्यादा जरूरी होता है।
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‘नीति और धर्म मेरे लिए सर्वोपरि’
संदीप पाठक ने अपने राजनीतिक जीवन के मूल सिद्धांतों पर जोर देते हुए कहा कि जो लोग उन्हें जानते हैं, वे यह भली-भांति समझते हैं कि वे हमेशा नीति और धर्म के मार्ग पर चलने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी में रहते हुए भी उन्होंने इन्हीं मूल्यों के आधार पर काम किया और अब भारतीय जनता पार्टी में रहते हुए भी वे इन्हीं सिद्धांतों का पालन करेंगे। उनके अनुसार, राजनीति में सफलता या असफलता से अधिक महत्वपूर्ण यह है कि व्यक्ति अपने नैतिक मूल्यों से समझौता न करे।
राजनीति को बताया कठिन रास्ता
अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि राजनीति में आना कोई आसान निर्णय नहीं होता। यही कारण है कि बहुत से लोग इस क्षेत्र में आने से बचते हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि यह रास्ता चुनौतियों से भरा हुआ है, लेकिन अब जब वे इस क्षेत्र में आ चुके हैं, तो वे पूरी निष्ठा के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे। संदीप पाठक ने यह भी कहा कि उन्हें विश्वास है कि ईश्वर उनका साथ देगा और वे अपने सिद्धांतों के साथ आगे बढ़ते रहेंगे, चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों।
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विवाद के बीच सियासी संदेश
एफआईआर (Sandeep Pathak FIR Row) की खबरों के बीच संदीप पाठक का यह बयान केवल सफाई भर नहीं बल्कि एक सियासी संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है। उन्होंने अपने बयान के जरिए यह स्पष्ट करने की कोशिश की है कि उनका राजनीतिक सफर किसी दबाव या निजी स्वार्थ का परिणाम नहीं है, बल्कि एक सोच और सिद्धांतों पर आधारित निर्णय है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मामले में आगे क्या स्थिति सामने आती है और क्या वाकई एफआईआर से जुड़ी कोई आधिकारिक जानकारी सामने आती है या नहीं। फिलहाल, संदीप पाठक ने अपने रुख को साफ रखते हुए यह जता दिया है कि वे किसी भी परिस्थिति में अपने सिद्धांतों से पीछे हटने वाले नहीं हैं।
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