Ravneet Bittu Court Notice: पंजाब में नगर निगम कार्यालय से जुड़े एक पुराने आपराधिक मामले में अब कानूनी कार्रवाई तेज हो गई है। इस मामले में केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू समेत कई अन्य आरोपियों को अदालत में पेश होने के निर्देश (Ravneet Bittu Court Notice) दिए गए हैं। चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (CJM) पवलीन सिंह की अदालत ने बिना पूर्व अनुमति सुनवाई से अनुपस्थित रहने को गंभीरता से लेते हुए नोटिस जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सभी संबंधित आरोपियों को आगामी 8 जून 2026 को व्यक्तिगत रूप से पेश होना अनिवार्य होगा।
कोर्ट ने अनुपस्थिति पर जताई सख्ती
मामले की सुनवाई (Ravneet Bittu Court Notice) के दौरान अदालत ने पाया कि केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर शाम सुंदर मल्होत्रा बिना पूर्व अनुमति अदालत में उपस्थित नहीं हुए थे। इस पर संज्ञान लेते हुए अदालत ने दोनों को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई पर पेश होने के आदेश दिए हैं। कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायिक कार्यवाही में अनुपस्थिति को गंभीरता से लिया जाता है और सभी पक्षों को निर्धारित तिथि पर उपस्थित रहना होगा।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला (Ravneet Bittu Court Notice) नगर निगम कार्यालय के मुख्य गेट पर कथित तौर पर ताला लगाए जाने और सरकारी कार्य में बाधा डालने से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने नगर निगम परिसर के भीतर प्रवेश कर प्रशासनिक कार्यों को प्रभावित किया। पुलिस के अनुसार, इस घटना के चलते सरकारी कर्मचारियों और आम नागरिकों को कार्यालय में आने-जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
मार्च 2024 की एफआईआर से शुरू हुई जांच
यह मामला (Ravneet Bittu Court Notice) मार्च 2024 में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है, जिसे थाना डिवीजन नंबर-1 पुलिस ने गेटमैन अमित कुमार की शिकायत के आधार पर दर्ज किया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने धक्का-मुक्की कर नगर निगम परिसर में प्रवेश किया और बाद में मुख्य गेट को बंद कर दिया, जिससे सरकारी कार्य बाधित हुआ। इस मामले में कुल लगभग 60 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था, जिनमें कई राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन से जुड़े नाम शामिल हैं।
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किन-किन पर लगे हैं आरोप?
इस मामले में केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के अलावा पूर्व कैबिनेट मंत्री भारत भूषण आशु, जिला कांग्रेस कमेटी (शहरी) के तत्कालीन प्रधान संजय तलवाड़ और पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर शाम सुंदर मल्होत्रा को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस जांच के अनुसार, सभी आरोपियों पर सरकारी कार्य में बाधा डालने और सार्वजनिक संपत्ति से जुड़े नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं।
प्रदर्शन और विवाद की पृष्ठभूमि
जानकारी के अनुसार यह घटना उस समय हुई थी जब नगर निगम परिसर के बाहर प्रदर्शन चल रहा था। प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई और कुछ लोगों के परिसर में प्रवेश करने की बात सामने आई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस दौरान कर्मचारियों के साथ धक्का-मुक्की भी हुई और मुख्य गेट पर ताला लगाकर कामकाज बाधित किया गया। हालांकि मामले में आरोपियों की ओर से पहले भी विभिन्न स्तरों पर अपना पक्ष रखा जाता रहा है, लेकिन अदालत में चल रही सुनवाई में अब उपस्थिति को अनिवार्य किया गया है।
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अदालत ने 8 जून 2026 की तारीख तय की
सीजेएम अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 8 जून 2026 को निर्धारित की है। इस दिन सभी आरोपियों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। अदालत का कहना है कि आगे की सुनवाई में अनुपस्थिति को गंभीरता से लिया जाएगा और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा तेज
इस मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा तेज हो गई है। एक ओर जहां मामला सरकारी कार्य में बाधा से जुड़ा बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसमें कई प्रमुख राजनीतिक नामों की मौजूदगी इसे और संवेदनशील बना रही है। आने वाली सुनवाई इस मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। फिलहाल सभी की नजर 8 जून की अगली सुनवाई पर टिकी हुई है, जहां अदालत में आरोपियों की उपस्थिति और आगे की कानूनी प्रक्रिया स्पष्ट हो सकेगी।
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