West Bengal Coal Scam: प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा IPAC (Indian Political Action Committee) के दफ्तर पर की गई रेड के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में उबाल आ गया है। लेकिन इस कार्रवाई के पीछे की असली वजह कोई राजनीतिक रणनीति नहीं, बल्कि एक 2742 करोड़ रुपये से ज्यादा का अवैध कोयला घोटाला है, जिसकी जड़ें सालों पुरानी हैं।
क्या है पश्चिम बंगाल का कोयला घोटाला?
यह घोटाला ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के लीज क्षेत्र से अवैध कोयला खनन और चोरी से जुड़ा है। जांच में सामने आया कि संगठित गिरोह ने सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से ECL क्षेत्रों से कोयला निकाला और उसे अवैध रूप से बाजार में बेचा। इस पूरे नेटवर्क में CISF, रेलवे और अन्य विभागों के कुछ अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई गई है।
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अनुप माजी- कोयला सिंडिकेट का मास्टरमाइंड
West Bengal Coal Scam: ED की जांच के मुताबिक इस पूरे घोटाले का मुख्य आरोपी अनुप माजी है, जिसे कोयला तस्करी सिंडिकेट का मास्टरमाइंड बताया गया है। आरोप है कि उसने सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से वर्षों तक ECL क्षेत्र में अवैध खनन और कोयला चोरी का नेटवर्क चलाया। चौंकाने वाली बात यह है कि साल 2000 से 2015 के बीच अनुप माजी पर 16 FIR दर्ज हुईं, जिनमें चार्जशीट भी दाखिल की गई, लेकिन प्रभाव और राजनीतिक संरक्षण के चलते कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
West Bengal Coal Scam: 2020 में CBI केस के बाद तेज हुई जांच
साल 2020 में CBI ने कोयला चोरी और तस्करी के मामले में नया केस दर्ज किया। इसके बाद ED ने PMLA, 2002 के तहत मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की। ED को जांच में ऐसे दस्तावेज मिले, जिनसे पता चला कि चोरी किए गए कोयले को अलग-अलग कंपनियों तक पहुंचाया गया और उसकी पूरी बही-खाता व्यवस्था बनाई गई थी।

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West Bengal Coal Scam: 2742 करोड़ रुपये से ज्यादा की हेराफेरी
ED की जांच में खुलासा हुआ कि अवैध खनन और कोयला चोरी के जरिए करीब 2,742.32 करोड़ रुपये (टैक्स और रॉयल्टी सहित) की हेराफेरी की गई। जनवरी से अप्रैल 2021 के बीच ED ने PMLA की धारा 17 के तहत 46 ठिकानों पर छापेमारी की। इन छापों में अनुप माजी के अकाउंटेंट से अवैध कमाई का पूरा रिकॉर्ड बरामद किया गया।
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POC ट्रांसफर का भी खुलासा
ED के अनुसार, गुरुपदा माजी ने 2017 से 2020 के बीच करीब 89.11 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित राशि (POC) ट्रांसफर की। जयदेव मंडल ने इसी अवधि में 58.05 करोड़ रुपये की POC पहुंचाई। यह पैसा कई माध्यमों से इधर-उधर किया गया ताकि उसकी असली पहचान छिपाई जा सके।
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IPAC दफ्तर जांच के दायरे में क्यों आया?
ED के मुताबिक IPAC दफ्तर जांच के दायरे में इसलिए आया क्योंकि कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क की फाइनेंशियल ट्रेल कई स्तरों पर फैली हुई है। एजेंसी का कहना है कि यह कार्रवाई किसी राजनीतिक संगठन को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि अवैध कोयला तस्करी से अर्जित पैसों, उनसे जुड़े दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों की जांच के लिए की गई है। ED हर उस कनेक्शन की पड़ताल कर रही है जहां से संदिग्ध लेन-देन या दस्तावेजों का सुराग मिलता है और इसी प्रक्रिया में जांच IPAC दफ्तर तक पहुंची।



