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Lokhitkranti > राष्ट्रीय > Sayani Ghosh TMC Rebellion: चड्ढा नहीं कि चड्डी बन जाऊंगी कहने वाली सयानी घोष अब खुद बगावत की राह पर? TMC में सबसे बड़ा सियासी विस्फोट
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Sayani Ghosh TMC Rebellion: चड्ढा नहीं कि चड्डी बन जाऊंगी कहने वाली सयानी घोष अब खुद बगावत की राह पर? TMC में सबसे बड़ा सियासी विस्फोट

Lokhit Kranti
Last updated: 2026-06-15 3:56 pm
Lokhit Kranti Published 2026-06-15
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Sayani Ghosh TMC Rebellion के बीच दिल्ली पहुंचीं सांसद सयानी घोष और ममता बनर्जी की तस्वीर।
Sayani Ghosh TMC Rebellion के बीच दिल्ली पहुंचीं सांसद सयानी घोष और ममता बनर्जी की तस्वीर।
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Sayani Ghosh TMC Rebellion: कभी संसद और सियासी मंचों से अपने विरोधियों पर तीखे शब्दों के तीर छोड़ने वाली जादवपुर की सांसद सयानी घोष आज खुद राजनीतिक व्यंग्य के केंद्र में खड़ी दिखाई दे रही हैं। कुछ समय पहले दल बदलने वाले नेताओं पर हमला बोलते हुए उनसे जुड़ा कथित बयान खूब वायरल हुआ था ‘मैं चड्ढा नहीं हूं कि चड्डी बन जाऊंगी।‘ उस वक्त इस टिप्पणी को राजनीतिक वफादारी का प्रमाण बताकर पेश किया गया था। लेकिन अब वही सवाल सयानी घोष का पीछा कर रहा है जब तृणमूल कांग्रेस में बगावत की आग भड़की तो सबसे आगे दिखाई देने वालों में उनका नाम कैसे आ गया?

रविवार, 14 जून 2026 को दिल्ली पहुंचीं सयानी घोष से जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या वह ममता बनर्जी के खिलाफ बने असंतुष्ट गुट में शामिल हो चुकी हैं, तो उन्होंने सीधा जवाब देने के बजाय कहा, ‘अभी मैं कुछ नहीं कहूंगी, सही समय आने पर अपनी बात रखूंगी।‘ राजनीति में कई बार मौन भी बयान से अधिक बोलता है। उनके इस जवाब को न तो ममता के प्रति स्पष्ट समर्थन माना जा सकता है और न बगावत से इनकार।

Sayani Ghosh TMC Rebellion अब सिर्फ अटकल नहीं रही है, क्योंकि उनका नाम विद्रोही सांसदों द्वारा सौंपे गए दस्तावेजों और दिल्ली की बैठकों में प्रमुखता से सामने आया है।

READ: कई दिनों की चुप्पी के बाद दिल्ली पहुंचीं सयानी घोष, खामोशी ने बढ़ाए सियासी सवाल

‘सही समय’ का इंतजार या सियासी ठिकाना तय करने की तैयारी?

सयानी घोष के शब्दों में सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा था, ‘सही समय आने पर।‘ सवाल यह है कि सही समय आखिर किसके लिए? ममता बनर्जी के साथ खड़े होने की घोषणा के लिए, बागी गुट का नेतृत्व संभालने के लिए या फिर किसी नए सियासी समीकरण की औपचारिक घोषणा के लिए?

ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस के असंतुष्ट सांसदों ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के दिल्ली स्थित आवास पर बैठक की। इसके बाद विद्रोही सांसद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिले और सदन में अलग बैठने की व्यवस्था तथा अलग संसदीय पहचान की मांग रखी। इस गुट ने 28 में से 20 सांसदों के समर्थन का दावा किया है। कुछ रिपोर्टों में 22 सांसदों तक के समर्थन की बात भी कही गई, हालांकि इसकी स्वतंत्र और अंतिम आधिकारिक पुष्टि अभी लोकसभा सचिवालय के निर्णय पर निर्भर है।

सबसे बड़ा राजनीतिक मोड़ यह है कि सयानी घोष को नए विद्रोही खेमे की संभावित लोकसभा नेता के रूप में पेश किया जा रहा है। यानी जिस सांसद से केवल पाला बदलने की आशंका जताई जा रही थी, वह अब बगावत का संसदीय चेहरा भी बन सकती हैं।

Sayani Ghosh TMC Rebellion की कहानी इसलिए अधिक दिलचस्प है क्योंकि यहां एक अभिनेत्री से सांसद बनी नेता अब अपनी ही पार्टी की सियासी पटकथा बदलती नजर आ रही हैं।

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ममता का मंच, ममता का टिकट और अब ममता से दूरी?

सयानी घोष को बंगाल की राजनीति में पहचान केवल अभिनय से नहीं मिली। ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें संगठन में अवसर दिया, चुनावी मंच दिया और जादवपुर जैसी महत्वपूर्ण लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया। वह लंबे समय तक टीएमसी की आक्रामक युवा आवाज मानी जाती रही। भाजपा और केंद्र सरकार के खिलाफ उनके भाषणों को पार्टी समर्थकों ने खूब प्रचारित किया।

उनका नाम पहले भी विवादों में रहा है। धार्मिक प्रतीकों से संबंधित पुरानी सोशल मीडिया पोस्ट पर बड़ा राजनीतिक विवाद हुआ था। विरोधियों ने उन पर हिंदू आस्था के अपमान का आरोप लगाया, जबकि उनकी ओर से पुराने अकाउंट और पोस्ट को लेकर सफाई दी गई थी। चुनावी अभियानों और सार्वजनिक कार्यक्रमों से जुड़े उनके वीडियो भी अक्सर राजनीतिक बहस का विषय बने। ऐसे विवादों के बावजूद ममता बनर्जी ने उन्हें आगे बढ़ाया।

अब कटाक्ष यही है जिस पार्टी ने राजनीतिक जमीन दी, क्या उसी जमीन पर खड़े होकर सयानी घोष ममता बनर्जी के सिंहासन के नीचे से कालीन खींचने जा रही हैं? विरोधी कह सकते हैं कि “चड्ढा से चड्डी” बनने का मजाक उड़ाने वाली नेता अब खुद “दीदी की वफादार से दिल्ली की बागी” बनने के मोड़ पर पहुंच गई हैं। हालांकि किसी नेता पर निजी या अश्लील टिप्पणी के बजाय उनके राजनीतिक विरोधाभास को ही बहस का केंद्र बनाया जाना चाहिए।

Sayani Ghosh TMC Rebellion टीएमसी की उस राजनीतिक संस्कृति पर भी प्रश्न खड़ा करता है, जिसमें कल तक एक नेता “दीदी का सिपाही” होता है और अगले दिन “लोकतंत्र बचाने वाला बागी” बन जाता है।

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भूपेंद्र यादव के घर क्यों लगा टीएमसी सांसदों का मेला?

दिल्ली में भूपेंद्र यादव के आवास पर हुई बैठक ने इस पूरे घटनाक्रम को सामान्य आंतरिक नाराजगी से उठाकर राष्ट्रीय राजनीतिक संकट बना दिया। बैठक में सयानी घोष, माला रॉय, शताब्दी रॉय, काकोली घोष दस्तीदार, अरूप चक्रवर्ती और सुदीप बंद्योपाध्याय समेत कई सांसदों की उपस्थिति की खबर सामने आई। कम से कम 16 सांसदों की मौजूदगी तस्वीरों में दिखाई देने का दावा भी किया गया।

विद्रोही सांसदों ने बाद में लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर अलग बैठने की मांग रखी। इसके अतिरिक्त 20 सांसदों के नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया यानी NCPI में विलय और एनडीए को समर्थन देने की घोषणा से समीकरण और बदल गए। यह कम चर्चित त्रिपुरा-आधारित दल अब टीएमसी के विद्रोही सांसदों के लिए दलबदल कानून से जुड़ा राजनीतिक रास्ता बनता दिखाई दे रहा है।

तृणमूल खेमे पर व्यंग्य करें तो पार्टी की स्थिति ऐसी नजर आ रही है जैसे कोलकाता में बोर्ड अभी भी “मां, माटी, मानुष” का लगा हो, लेकिन टिकट खिड़की दिल्ली में खुल चुकी हो। दीदी संगठन बचाने में लगी हैं और सांसद नई सीटिंग व्यवस्था नाप रहे हैं।

Sayani Ghosh TMC Rebellion में भूपेंद्र यादव की बैठक इसलिए निर्णायक है क्योंकि उसने पर्दे के पीछे चल रही बातचीत को सार्वजनिक राजनीतिक विद्रोह में बदल दिया।

 सुदीप का अस्पताल और महुआ का ‘नकाब-विग’ हमला

इस बगावत के बीच महुआ मोइत्रा और सुदीप बंद्योपाध्याय का विवाद टीएमसी के अंदर मची अव्यवस्था को खुलकर सामने ले आया। महुआ ने आरोप लगाया कि सुदीप ने पार्टी को बताया था कि वह कोलकाता के एक अस्पताल में भर्ती हैं, लेकिन बाद में उन्हें दिल्ली में केंद्रीय मंत्री के आवास पर देखा गया। महुआ ने कटाक्ष करते हुए लिखा कि उनका नकाब और विग दोनों उतर गए।

इस प्रकरण ने दिखाया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता अब बंद कमरों में असहमति नहीं जता रहे, बल्कि सोशल मीडिया पर एक-दूसरे की राजनीतिक विश्वसनीयता की धज्जियां उड़ा रहे हैं। एक नेता अस्पताल का हवाला दे रहा है, दूसरा दिल्ली की तस्वीर दिखा रहा है और तीसरा अलग संसदीय समूह बनाने का पत्र लेकर स्पीकर के दरवाजे पर पहुंच रहा है।

यह वही टीएमसी है जो कभी ममता बनर्जी के एक इशारे पर एकजुट दिखाई देती थी। अब हालत यह है कि पार्टी के भीतर कौन वफादार है और कौन विद्रोही, यह पता लगाने के लिए अस्पताल का रजिस्टर, एयरपोर्ट का कैमरा और दिल्ली के बंगलों की अतिथि सूची देखनी पड़ रही है।

Sayani Ghosh TMC Rebellion केवल एक सांसद की बगावत नहीं, बल्कि टीएमसी के अंदर टूट चुके विश्वास की कहानी है।

20 सांसदों का दावा बगावत है या पूरी पार्टी पर कब्जे की कोशिश?

तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा में 28 सांसद हैं। विद्रोही गुट ने 20 सांसदों के समर्थन का दावा करते हुए कहा है कि उसके पास दो-तिहाई से अधिक संख्या है। लेकिन दलबदल कानून के तहत केवल अलग समूह बनाने की पुरानी व्यवस्था अब उपलब्ध नहीं है; विलय को मान्यता मिलने के लिए संवैधानिक और कानूनी शर्तों की जांच जरूरी होगी। टीएमसी की ओर से अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर विद्रोही गुट को अलग मान्यता न देने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि सदन में पार्टी का प्रतिनिधित्व उसके अधिकृत नेता और व्हिप के माध्यम से ही होना चाहिए।

इसलिए यह मान लेना जल्दबाजी होगी कि विद्रोही गुट को तत्काल “असली टीएमसी” या अलग संसदीय दल की मान्यता मिल गई है। अंतिम फैसला लोकसभा अध्यक्ष और संबंधित कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

फिर भी राजनीतिक नुकसान हो चुका है। ममता बनर्जी के लिए संकट केवल संख्या का नहीं, संदेश का है। जब पार्टी के चर्चित युवा चेहरे सयानी घोष से लेकर पुराने संसदीय नेता सुदीप बंद्योपाध्याय तक विरोधी खेमे में दिखाई दें, तो संगठन की मजबूती पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

Sayani Ghosh TMC Rebellion अब बंगाल की राजनीति में उस वाक्य का प्रतीक बनती जा रही है दूसरों के दल बदलने पर व्यंग्य करना आसान है, लेकिन सत्ता की नाव डगमगाए तो अपनी वैचारिक लाइफ जैकेट संभालना कठिन।

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 ‘चड्ढा-चड्डी’ का तंज अब सयानी के लिए राजनीतिक आईना

सयानी घोष के पुराने कटाक्ष को उनके विरोधी अब उन्हीं के खिलाफ इस्तेमाल कर रहे हैं। सवाल पूछा जा रहा है क्या ‘मैं चड्ढा नहीं कि चड्डी बन जाऊंगी” कहने वाली सांसद अब खुद राजनीतिक वेशभूषा बदलने जा रही हैं? इस व्यंग्य का असली अर्थ कपड़ों से नहीं, राजनीतिक चरित्र और वफादारी से जुड़ा है।

सयानी घोष के पास अब दो रास्ते हैं। पहला, वह स्पष्ट करें कि उन्होंने ममता बनर्जी और टीएमसी से दूरी क्यों बनाई। दूसरा, यह बताएं कि नई राजनीतिक व्यवस्था में जाने का आधार विचारधारा है, नेतृत्व से असहमति है या केवल सत्ता का नया गणित।

फिलहाल उनका सही समय वाला जवाब रहस्य को और गहरा कर रहा है। लेकिन राजनीति में सही समय बहुत देर तक गोपनीय नहीं रहता। तस्वीरें सामने आ चुकी हैं, हस्ताक्षर की सूचियां प्रकाशित हो चुकी हैं और संभावित फ्लोर लीडर के रूप में उनका नाम भी चल पड़ा है।

ममता बनर्जी के लिए यह बगावत बड़ा झटका है, लेकिन सयानी घोष के लिए यह उससे भी बड़ी अग्निपरीक्षा है। कल तक वह दूसरों की राजनीतिक पलटी पर पंचलाइन बोल रही थीं; आज जनता उनकी राजनीतिक पलटी का शीर्षक लिख रही है।

Sayani Ghosh TMC Rebellion का अंतिम अध्याय लोकसभा अध्यक्ष के फैसले से तय होगा, लेकिन एक बात साफ है टीएमसी की दीवार में अब केवल दरार नहीं, दिल्ली तक दिखाई देने वाला बड़ा सियासी सुराख बन चुका है।

Sayani Ghosh TMC Rebellion

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